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आज के अखबार : एक गंभीर मुद्दे को ‘किताब क्रीड़ा’ बनाने वाली राजनीति और दैनिक भास्कर की लीड

संजय कुमार सिंह

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बुधवार को संसद में राष्ट्रपति के संबोधन पर धन्यवाद प्रस्ताव में अपनी बात नहीं रख पाए। उम्मीद है प्रधानमंत्री आज अपनी बात रखेंगे। लेकिन प्रधानमंत्री को पांच बजे बोलना था, आए ही नहीं। यह बड़ा मामला है। इसलिए टाइम्स ऑफ इंडिया में अधपन्ने पर लीड है। इसका इंट्रो है, किताबों की लड़ाई; मोदी कल राज्यसभा में बोल सकते हैं। लेकिन बुधवार को नहीं बोले और राहुल गांधी ने कहा है प्रधानमंत्री डरे हुए हैं तो खबर वैसी होनी चाहिए थी जैसी देशबन्धु ने बनाई है। वैसे भी, ऐसी खबरें रोज-रोज नहीं होती हैं। इस खबर को कम महत्व दिए जाने का कारण जो खबरें हैं उनमें एक है, मणिपुर में राष्ट्रपति का शासन समाप्त हुआ; खेमचंद मुख्यमंत्री बने। मुझे लगता है कि यह खबर आज वैसे ही है जैसे अचानक अमेरिका के साथ व्यापार करार की खबर आ गई थी। इसके बारे में कल यहां लिख चुका हूं। आज यह खबर देशबन्धु में टॉप पर है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने संसद के दोनों सदनों में टैरिफ पर बयान दिया। इसलिए अखबार की खबर का शीर्षक है,  भारत-अमेरिका ट्रेड डील ऐतिहासिक। खबर से पता नहीं चलता है कि व्यापार करार के दस्तावेज तैयार हो गए या नहीं लेकिन हाईलाइट किया हुआ अंश है, भारत के कृषि और खाद्य क्षेत्र का पूरा ध्यान रखा गया है। इससे संबंधित कांग्रेस अध्यक्ष के आरोपों के जवाब में जेपी नड्डा ने राज्यसभा में कहा, किसानों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस तरह आज के अखबार बिना विवरण यह तो बताते हैं कि अमेरिका के साथ व्यापार करार में क्या है या क्या नहीं है लेकिन यह नहीं बताते कि प्रधानमंत्री का संबोधन क्यों नहीं हुआ। राहुल गांधी ने कहा है और यह देशबंधु की लीड है, सच्चाई का सामना करने से डर रहे हैं मोदी

अमर उजाला की लीड गाजियाबाद में ऑन लाइन गेमिंग के चक्कर में तीन बहनों की मौत की खबर है जबकि सेकेंड लीड सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी का आरोप और अपील है। यहां यह बताना महत्वपूर्ण है और अमर उजाला ने फ्लैग शीर्षक से बताया है, पहली बार किसी पदासीन मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में रखी दलीलें, एसआईआर पर ममता बनर्जी बोलीं… बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है, लोकतंत्र बचाने के लिए कोर्ट हस्तक्षेप करे। आप जानते हैं कि भाजपा सरकार ने चुनाव के समय या पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को गिरफ्तार कर जेल में रखने का कारनामा किया है और झारखंड के मुख्यमंत्री ने तो गिरफ्तारी से पहले इस्तीफा भी दे दिया था। इस क्रम में ममता बनर्जी भाजपाई चालों से टक्कर लेती रही हैं और कल काला कोट पहन कर सुप्रीम कोर्ट में पेश हुईं। इसका कानूनी मतलब चाहे जो हो, राजनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व बहुत ज्यादा है। इसलिए यह खबर पहले पन्ने पर तो है ही, द टेलीग्राफ और टाइम्स ऑफ इंडिया में लीड तथा हिन्दुस्तान टाइम्स में सेकेंड लीड है। दि एशियन एज में भी यह टॉप पर है और सेकेंड लीड है। नवोदय टाइम्स में यह दो कॉलम की खबर है और द हिन्दू में अंदर होने की सूचना पहले पन्ने पर है। मणिपुर में सरकार बनने की खबर दिल्ली के तीनों प्रमुख अखबारों में लीड या सेकेंड लीड है। इंडियन एक्सप्रेस और हिन्दुस्तान टाइम्स में यह लीड है जबकि टाइम्स ऑफ इंडिया में सेकेंड लीड है।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर इस प्रकार है, मणिपुर भाजपा विधानमंडल दल का नेता चुने जाने के एक दिन बाद, युम-नाम खेमचंद सिंह ने संघर्षग्रस्त राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इंफाल के लोक भवन में आयोजित एक समारोह में शपथग्रहण हुआ। इस मौके पर राज्य के कुकी-ज़ो और नागा समुदायों से एक-एक नेता ने उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। यह इस बंटे हुए और संवेदनशील राज्य में संतुलन तथा मेल-जोल बनाने की कोशिश लग रही है। ये दोनों नेता हैं – नेमचा किपगेन और लोसी दिखो। नेमचा किपगेन कांगपोकपी निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली बीजेपी की कुकी-ज़ो विधायक हैं। इसी तरह, लोसी दिखो एनडीए सहयोगी नागा पीपल्स फ्रंट के माओ निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक हैं। ऐसा पहली बार हुआ कि किपगेन बुधवार को इंफाल नहीं आईं और उन्होंने नई दिल्ली में मणिपुर भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए वर्चुअली शपथ ली। वह उन दो कुकी-ज़ो मंत्रियों में हैं जो राज्य में संघर्ष शुरू होने पर एन बीरेन सिंह के मंत्रिमंडल का हिस्सा थीं और उनके इस्तीफे तक पद पर बनी रहीं।

इन खबरों में जनरल एमएम नरवणे की कथित अप्रकाशित पुस्तक, “Four Stars of Destiny” का जिक्र नहीं है। नवोदय टाइम्स में यह दो कॉलम में और इंडियन एक्सप्रेस में तीन कॉलम में है। दि एशियन एज में सिंगल कॉलम की फोटो है और प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया का विवरण। नवोदय टाइम्स ने बताया है कि राहुल गांधी कल जनरल नरवणे की किताब हाथ में लेकर संसद पहुंचे थे। इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक है,  कांग्रेस के विरोध ने लोकसभा की कार्यवाही रोक दी, प्रधानमंत्री का जवाब टला। यह दिलचस्प है कि कल राहुल गांधी के पास जनरल नरवणे की किताब थी और वे प्रधानमंत्री को भेंट करने की बात कर रहे थे। आज मुझे खबरों में यह सूचना नहीं दिखी और खबर यही है कि राहुल के जवाब में भाजपा भी लाई किताब, सांसद निशिकांत दुबे बोले- नेहरू-गांधी का भी इतिहास सामने आना चाहिए जबकि मेरी समझ से मामला ऐसा नहीं है। राहुल गांधी एक अप्रकाशित किताब के प्रकाशित अंश को पढ़कर भारत चीन संबंध और चीन के आक्रामक रुख पर सेना प्रमुख को कई घंटे तक कोई आदेश नहीं दिए जाने का उल्लेख करना चाहते थे। लोकसभा अध्यक्ष ने पहले तो उन्हें यह अंश नहीं पढ़ने दिया, दलील यह कि किताब अप्रकाशित है। अगले दिन किताब की प्रति ले आए तो उसकी चर्चा नहीं है लेकिन निशिकांत दुबे को कई पुरानी किताबों के हवाले से संदर्भहीन बातें कहने दिया गया और उसे रिकार्ड से बहुत बाद में निकाला गया। उसकी खबर है। भाजपा इसे किताब के बदले किताब की तरह पेश कर रही है जबकि मामला किताब नहीं छपने देने और उसके (खास) अंश का है जो अब सार्वजनिक है।

दैनिक भास्कर ने इसे किताब क्रीड़ा शीर्षक से तीन कॉलम की लीड बनाया है। कुल मिलाकर मामला मुद्दा बदलने का है और अब साफ दिख रहा है। उदाहरण के लिए, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को गद्दार दोस्त कहने का है। राहुल गांधी ने अपने (पूर्व) मित्र को गद्दार कहा। भाजपा ने उसे सिखों को गद्दार कहने जैसा मामला बनाने की कोशिश की। कितनी कामयाबी मिले – अलग मुद्दा है लेकिन अखबारों ने सहयोग पूरा किया। और घुसकर मारूंगा के दावे के बाद चीन को जवाब देने का आदेश मांगने पर जवाब देने में घंटों लगने का मामला किताब क्रीड़ा में बदल गया है। दैनिक भास्कर के अनुसार, राहुल बोले… नरवणे की किताब पीएम को सौंपूंगा। निशिकांत का दावा… नेहरू-गांधी परिवार के धोखों पर डेढ़ सौ किताबें। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पीएम का जवाब टला…। राहुल ने केंद्रीय मंत्री बिट्‌टू को गद्दार दोस्त कहा, बिट्टू का जवाब – तुम देश के दुश्मन। कुल मिलाकर संसद परिसर में सड़क छाप लड़ाई हो रही है। ठीक है कि खबर वही बनेगी लेकिन न तो स्तर का ख्याल रखा जा रहा है ना निष्पक्षता है। लोकसभा अध्यक्ष के रवैये के बारे में बताने की जरूरत नहीं है और लोगों ने देखा होगा कि बार-बार रोके जाने पर राहुल गांधी ने कहा, … तो फिर ही आप ही बता दीजिए कि मुझे क्या कहना है। जाहिर है, यह उस स्थिति को बयान करने वाला सवाल था। जवाब में अध्यक्ष ने कहा, मैं आपका सलाहकार नहीं हूं। यह उनका अधिकार और बेशक स्तर है। लेकिन दैनिक हिन्दुस्तान ने लिखा है, स्पीकर ने उन्हें नसीहत देते हुए कहा….। मुझे लगता है यह नसीहत नहीं है। जो है उसे अंग्रेजी में फ्रस्ट्रेशन कह सकते हैं। हिन्दी में परेशानी के करीब है। इस तरह राहुल गांधी ने खुद को संबंधित अंश नहीं पढ़ने देने पर जो कहा वह तंज था और भारी पड़ गया। अगले दिन निशाकांत दुबे को भी रोका गया होता तो माना जा सकता था कि राहुल गांधी को नसीहत दी गई। जो भी हो, यह टिप्पणी रिपोर्टिंग और संपादन पर है और मुझे उसी की चिन्ता है। इस काम के लिए रखे जाने वाले लोगों को वेतन मिलता है और वे परीक्षा से चुने जाते हैं। इसलिए यहां लोगों का स्तर बनाकर रखा जा सकता है और यही स्तर आम लोगों को बता सकता है कि चुनकर आने वाले जनप्रतिनिधियों का स्तर क्या है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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