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सुख-दुख

अमेरिका के सबसे बड़े बाल यौन तस्कर की ईमेल्स में स्वयं महामानव जी और उनके मंत्रियों का जिक्र आखिर क्यों आ रहा है?

विजय सिंह ठकुराय-

अभी फेसबुक स्क्रॉल कर रहा था तो एक खबर पता चली कि समीर वानखेड़े ने शाहरुख खान पर मानहानि का केस किया है और दो करोड़ का हर्जाना मांगा है। आरोप है कि शाहरुख ने अपने शो “The Bads Of Bollywood” में एक समीर जैसे दिखने वाले किरदार के नाटकीय चित्रण से समीर की छवि खराब करने की कोशिश की है।

इस घटना से मुझे याद आया कि आर्यन के पास कोई मादक पदार्थ मिले ही नहीं थे, जिस बंदे के पास वे पदार्थ थे, उसकी आर्यन से व्हाट्सएप्प चैट हुई थी और यह कहा गया था कि – We Will Have A Great Time Today. इस बात पर एनसीबी ने आर्यन को धर लिया। कई हफ्तों जमानत न हुई। मीडिया में हफ्तों तक सुबह-शाम बस आर्यन ही छाया हुआ था।

यही मीडिया सेम केस में रिया चक्रबर्ती के पीछे भी हफ्तों तक पड़ा रहा, जबकि मिला उसके पास भी कुछ नहीं था। जो भी था, व्हाट्ससप्प कन्वर्सेशन में था।

वहीं दूसरी ओर, भारत के “राष्ट्रीय सेठजी” के बंदरगाह पर पिछले 5 साल में कम से कम 5 बार छापेमारी में 6400 करोड़ के गैरकानूनी मादक पदार्थ जब्त किए जा चुके हैं। याद करिये कि आपने इस बात की चर्चा, चिंता अथवा बहस मीडिया में कभी होती देखी हो?

मैं तो न्यूज़ चैनल देखना छोड़ चुका हूँ पर मैं दावे से कह सकता हूँ कि भारत के किसी न्यूज़ चैनल को आपने पिछले 24 घण्टे में यह सवाल उठाते नहीं सुना होगा कि अमेरिका के सबसे बड़े बाल यौन तस्कर की ईमेल्स में स्वयं महात्मा जी और उनके मंत्रियों का जिक्र आखिर क्यों आ रहा है? क्या एप्सटीन का कोई संबंध महात्मा जी अथवा उनके मंत्रिमंडल के किसी व्यक्ति से रहा है क्या? सवाल पूछने में क्या जाता है? क्या पिछले 24 घण्टे में आपने किसी भी मीडिया चैनल को यह पूछते हुए सुना है कि पिछले दस साल में वायुसेना के 121 विमान क्रैश हो चुके हैं। आख़िर किसी की जवाबदेही क्यों नहीं?

मेरी एक बात लिख कर रख लीजिए। जिस दिन इस देश का मीडिया जाग गया और सही सवाल पूछने शुरू कर दिए, उस दिन भारत की जनता के दिमाग में दस साल से छाई धूल एक दिन में झड़ जाएगी।

पर अफसोस, लोकतंत्र का चौथा खंबा इस दौर में सत्ता के सामने अपनी रीढ़ का पूरी तरह समर्पण कर चुका है।

बहरहाल, हां तो हम कहाँ थे? वानखेड़े ने शाहरुख को बेइज्जती का आरोप लगा कर मानहानि का नोटिस भेजा है।

भाई वानखेड़े, बेइज्जती तो आपकी हुई है। मैंने सीरीज देखी है, मैं गवाही दूँगा। फिकर नॉट। मेरे ख्याल से तो शाहरुख को आपको दो करोड़ रुपये देकर आरोप स्वीकार कर लेना चाहिए और पोस्ट क्रेडिट में यह जुड़वाना चाहिए कि – ये सीरीज वानखेड़े सर की बेज्जती करने के लिए ही बनाई गई है।

क्या है कि थोड़ी सी बेइज्जती तो आप डिजर्व करते हैं वानखेड़े सर।


कृष्णन अय्यर-

लेफ्ट साइड में जेफ़री एप्सटीन..दुनिया का सब से घिनौना इंसान जो छोटे बच्चों का यौन शोषण करता था..

  • 5 साल की ‘उम्र की बच्चियों का भी बलात्कार किया और दुनिया भर के नेताओं, अरबपतियों को दूध मुंही बच्चियों की सप्लाई की थी..लिखने में मेरे हाथ कांप गए
  • आज इस कांड के कुछ ईमेल पब्लिश हुए हैं..जितना पढा है वो छोटा सा लिखता हूं..
  • नरिंदर मोदी और ट्रंप के रिश्तों का ज़िक्र है
  • भारत इसराईल रिश्तों का ज़िक्र है
  • प्रणव मुखर्जी के इसराईल दौरे का ज़िक्र है
  • भारत के साथ व्यापार का ज़िक्र है
  • चोर अनिल अंबानी का ज़िक्र है
  • अनिल अंबानी के व्यापार का ज़िक्र है
  • मेल में बताया जा रहा है कि एप्सटीन का कोई असिस्टेंट नरिंदर मोदी के साथ ट्रंप के पूर्व चीफ स्ट्रेटेजिस्ट की मीटिंग सेट करने की बात कर रहा है..
  • मेल में लिखा गया है कि “मोदी ऑन बोर्ड”..या’नि मोदी तैयार/सहमत है..
  • जितना पढ़ पाया हूं उस में नरिंदर मोदी, अनिल अंबानी के मुत’ल्लिक़ किसी सेक्स स्कैंडल का ज़िक्र नहीं मिला है..सिर्फ़ सियासी बातों का ज़िक्र है
  • सवाल यह है कि दुनिया का सब से बड़े सेक्स क्रिमिनल के मेल में नरिंदर मोदी, अनिल अंबानी, भारत की विदेशनीति का ज़िक्र क्यों आया?
  • मैंने The Wire के आर्टिकल की बुनियाद पर यह सब लिखा है..पूरी दुनिया के अख़बारों में मोदी, अनिल अंबानी और एप्सटीन की बातें हो रही है
  • गुज़ारिश है कि मेरे लिखे हुए पर यक़ीन मत कीजिए..ख़ुद पढ़िए और जानकारी कीजिए..
  • दुनिया का सब से घिनौना सेक्स कांड फूट चुका है..भारत के PM नरिंदर मोदी और मुकेश अंबानी के छोटे भाई डकैत अनिल अंबानी के नाम का ज़िक्र आ चुका है..
  • गोदीमीडिया ख़ामोश है..बच्चियों के बलात्कारियों से रिश्ता रखने वालों को बचाने का गुनाह हम कैसे बर्दाश्त करेंगे..

सौमित्र राय-

बिग ब्रेकिंग– आखिरकार वही हुआ, जिसका इस महफ़िल के कई मित्रों को शक था। अमेरिकी बाल यौन अपराधी जेफ्री एप्स्टीन के तंबू से निकली जानकारी में महामानव, नॉन बायोलॉजिकल, ज़लीले इलाही नरेंद्र मोदी का भी नाम आया है।

अभी तक भारत की हिंदू सत्ता एप्स्टीन फाइल में मोदी के नाम की पर्ची पर चुप है। शायद इसे भी सनातनी हिंदू संस्कृति में जायज़ ठहराकर नकार दिया जाए।

मतबल, एप्स्टीन के तंबू में बहुत से कंकाल दबे हुए हैं। उनमें से एक इस फोटू में है।


ये 2019 की बात है। इस ईमेल के एक तरफ़ जेल में बंद रेपिस्ट और बाल यौन अपराधी जेफ्री एप्स्टीन है तो दूसरी ओर ट्रंप के पुराने सलाहकार स्टीव बेनन।

बेनन को एप्स्टीन लिखता है कि मैं नरेंद्र मोदी से मुलाकात करवा सकता हूं। तुम्हें मोदी से मिलना चाहिए। एप्स्टीन के मेल से पता चलता है कि उसमें यह कॉन्फिडेंस मोदी के मंत्री हरदीप पुरी से दर्जनों मुलाकातों के बाद आया।

मुलाकातें नाश्ते और लंच तक जा पहुंची थीं। क्यों? आज पेट्रोल में एथेनॉल की मिलावट कहीं अमेरिकी GM मक्के और सोयाबीन के लिए तो नहीं? एप्स्टीन कोई डील करना चाहता था या फिर एक चायवाले के हाथ की चाय पीना चाहता था?

एक यौन अपराधी की हिम्मत कैसे हुई की वह बेनन को मोदी से डील करवाने का ऑफर दे रहा है? भारत में आसाराम और राम–रहीम जैसे यौन अपराधी सत्ता से डील करवाने के लिए हो छोड़े जाते हैं। इसलिए सवाल तो लाज़िमी है।

ऐसी कौन सी डील थी? उसमें क्या अदानी और अंबानी की कोई भूमिका थी? क्यों भारत का दलाल मीडिया इस मुद्दे को छेड़ना नहीं चाहता? क्यों ट्रंप ने भारत पर ट्रेड डील का दबाव डालने के लिए कहा–मैं मोदी का राजनीतिक करियर खराब नहीं करना चाहता?

पत्रकारिता की एक कागज़ी डिग्री लेकर कलम और माइक आईडी थामे बिके हुए लोगों के पास ऐसे सवाल पूछने का आज कोई नैतिक हक़ नहीं है। क्यों मोदी ट्रंप से आज नज़रें नहीं मिलाना चाहता? हरदीप पुरी के मामले में उसकी सत्ता क्यों ख़ामोश है?

दुनिया का और कोई देश होता तो यही सवाल पूछे जाते। यह भारत है। यहां 80% को एप्स्टीन के गंदे कारनामों का पता नहीं। यह भारत है। भारत मोदी को डिजर्व करता है।

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