नई दिल्ली, 25 सितंबर 2025 — पूर्व सीबीआई निदेशक एम. नागेश्वर राव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सरकारी धन का दुरुपयोग कर मतदाताओं को प्रभावित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने चुनाव आयोग को लिखे पत्र में कहा है कि बिहार में 75 लाख महिलाओं में से प्रत्येक को ₹10,000 की सीधी आर्थिक सहायता देना लोकतंत्र और चुनाव की निष्पक्षता के खिलाफ है।


राव ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत ₹7,500 करोड़ की पहली किस्त बिहार की महिलाओं के खातों में स्थानांतरित करने का ऐलान कर “जनता को रिश्वत” देने का काम किया है। उनके अनुसार यह “फ्लैग्रेंट एक्ट ऑफ मास ब्राइबरी” यानी खुलेआम सामूहिक रिश्वतखोरी है, जो चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की नीयत से की गई है।
बिहार की 75 लाख महिलाओं में से प्रत्येक को 10 हज़ार रुपये सरकारी खजाने से देने की घोषणा महज़ कल्याणकारी योजना नहीं, बल्कि राज्य की नाज़ुक अर्थव्यवस्था पर एक राजनीतिक दांव है। ऐसी लोकलुभावन घोषणाएँ वित्तीय जिम्मेदारी और शासन की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
पूर्व सीबीआई निदेशक ने लिखा कि इस तरह की कार्रवाई चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को ठेस पहुँचाती है और लोकतंत्र की बुनियाद को कमजोर करती है। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि इस मामले में तुरंत निर्णायक कदम उठाए जाएँ।
नागेश्वर राव ने चुनाव आयोग से सिफारिश करने को कहा कि वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल पूरा होते ही बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाया जाए और चुनाव कम-से-कम छह महीने के लिए स्थगित कर दिए जाएँ। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हो तो चुनाव आयोग को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से भी हस्तक्षेप की मांग करनी चाहिए।
उन्होंने चुनाव आयोग को चेतावनी दी कि यदि उसने इस मौके पर सख्ती से कार्रवाई नहीं की तो जनता का भरोसा चुनाव आयोग से पूरी तरह उठ जाएगा। उन्होंने लिखा, “यह चुनाव आयोग के लिए निर्णायक पल है। यदि आयोग अब भी निष्क्रिय रहा तो लोकतंत्र की नींव रखने वाली चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा ढह जाएगा।”
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