
यशवंत सिंह-
यशवंत मैं वीगन हो गया हूं…
अरे कैसे कब… अचानक से… कभी इसको लेकर चर्चा नहीं की आपने…
बस कुछ दिन पहले… पत्नी बोलीं- दूध छोड़ पाएंगे… असल में दूध मुझे बहुत प्रिय रहा है.. रोज सोते वक्त एक गिलास पीता था… यही तो परीक्षा है. सबसे प्रिय चीज छोड़ पाने का साहस होना चाहिए. बुद्ध ने जाने कितनी प्रिय चीजों को छोड़ सड़क का रास्ता पकड़ा.
पतंजलि समूह के भारतीय शिक्षा बोर्ड के कर्ताधर्ता एनपी सिंह जी से यूं ही मिलने नोएडा फिल्म सिटी पहुंच गया था. संस्कार टीवी के भूतल में भारतीय शिक्षा बोर्ड का स्थानीय आफिस है. उनके साथ राजस्थान से आए शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों की मीटिंग थी. ये लोग जब निकल गए तो फिर हम दोनों की भीतरी-बाहरी जगह की चर्चा होने लगी. इसी दरम्यान उन्होंने खुद के वीगन बन जाने की जानकारी दी.

नोएडा, आजमगढ़ के जिलाधिकारी रहे एनपी सिंह का तर्क है कि दरअसल दूध प्रकृति ने किसी और के लिए बनाया लेकिन हम मनुष्यों ने उस पर कब्जा कर लिया. ये एक संगठित और मान्य अन्याय है जो गलत है तो गलत है.
मैं चुपचाप उनकी बात सुनता रहा.
हरिद्वार जब जाता हूं तो बस एनपी सिंह जी को फोन करता हूं. वे कहीं न कहीं गंगा तट के किनारे रुकने की अच्छी व्यवस्था करा देते हैं. पिछली बार भूमा निकेतन में रुका था जो सप्त धारा रोड के बिलकुल किनारे है.
एनपी सिंह जी से बात होते होते पत्रकारों को लेकर चर्चा होने लगी. वे बोले- सबसे कम भ्रष्ट अगर कोई है तो वे पत्रकार हैं. ज्यादातर पत्रकार प्रेम और सम्मान के भूखे होते हैं. आप उनसे सम्मान से बात कर लो, सम्मान दे दो, वे खुशी खुशी आपको सम्मान देते हैं. लेकिन अब लोग पत्रकारों के साथ दुर्व्यहार करने लगे हैं, उन्हें अपमानित करते हैं, उन पर जाने क्या क्या आरोप लगाते हैं. ये गलत है. मैंने अपने पूरे कार्यकाल में एक पत्रकार नहीं पाया जिसने मुझसे कभी पैसे की डिमांड की, जिसने कभी मुझसे बदतमीजी की हो या मुझे टारगेट किया हो.
मैं सोचता रहा. ऐसे लोग भी हैं आजकल दुनिया में जो किसी पत्रकार से बदतमीजी न करें, पत्रकारों को अच्छा बताएं. बछड़े के हिस्से का दूध हम मनुष्य क्यों पी जाते हैं, ये सोच कर वीगन बन जाएं.
एनपी सिंह से जब भी मिलता हूं कुछ न कुछ सीख कर आता हूं, कुछ न कुछ हासिल कर लेता हूं. इसीलिए उनसे बिना मकसद मिलने चला जाता हूं. दो चार महीने में फोन कर मीटिंग अरेंज कर लेता हूं.
और हां, एनपी सिंह जी वाट्सअप यूज नहीं करते. कभी नहीं किया. मेल और एसएमएस के जरिए उनसे मैं संपर्क रखने की कोशिश करता हूं.
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