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उत्तर प्रदेश

फ्रैंक हुज़ूर के मौत की पूरी कहानी और राहुल गांधी की चिट्ठी!

चंद्रभूषण सिंह यादव-

अस्वस्थ रहने के बावजूद फ्रैंक हुज़ूर जी लखनऊ से दिल्ली “संविधान बचाओ कार्यक्रम” करवाने वाली कोर कमेटी के सदस्यों से मिलने के राहुल गांधी जी के प्रोग्राम में 04 मार्च 2025 को पंहुच गए। अनिल जयहिंद साहब के नेतृत्व में फ्रैंक हुज़ूर जी, एचएल दुसाध जी आदि बहुजन बुद्धिजीवी राहुल गांधी जी से 04 मार्च 2025 को मिले।

04 मार्च 2025 को आदरणीय राहुल गांधी जी से मिलकर निकलने के बाद एचएल दुसाध जी एवं फ्रैंक हुजूर जी मेट्रो से हिंदू कालेज परिसर में रह रहे प्रो रतन लाल जी से मिलने हेतु चल दिए। विश्विद्यालय मेट्रो स्टेशन के आसपास फ्रैंक साहब मेट्रो में बेहोश हो गए या दिल का दौरा पड़ गया। शायद यह उनका प्रथम हृदयाघात था लेकिन फ्रैंक हुजूर जी या एचएल दुसाध जी ने इसे हृदयाघात नही समझा और सामान्य बेहोशी मानकर प्रो रतन लाल जी के वहां पंहुचकर देर रात तक गप -शप करते रहे,इस दौरान फ्रैंक हुज़ूर जी एक चद्दर ओढ़ ब्रेंच पर सोते और उठते हुए बेचैन रहे। प्रो रतन लाल जी ने डाक्टर को फ़ोन कर बीमारी का सिम्पटम बता दवा पूछा और फ्रैंक हुजूर जी को ईलाज हेतु अस्पताल चलने को कहा जिसे फ्रैंक हुजूर जी ने अनसुना कर दिया और रात में अपने मित्र के वहां माडल टाउन चले आए जहां वे ठहरे हुए थे।

अगले दिन 05 मार्च 2025 को फ्रैंक साहब पिछले दिन की बेहोशी को सामान्य घटना मान दिन भर इलाज नही करवाने गए। रात में माडल टाउन स्थित फ्लैट पर उनके मित्र के वहां दो लोग फ्रैंक हुजूर जी से मिलने आ गए जो रात के सवा बारह बजे तक बातें करते रहे।इस दौरान असहज फ्रैंक हुजूर जी कभी भाप लेते दिखे तो कभी विक्स को पीठ पर मलते हुए खुद को चंगा दिखाने की कवायद करते दिखे।

रात के सवा बारह बजे के करीब जब दोनो बाहरी साथी जाने लगे तो उनका मित्र उन्हे छोड़ने गेट तक चला गया।जब गेट से छोड़कर वह कमरे में आया तो फ्रैंक हुजूर जी अचेत गिरे मिले जो शायद उनका दूसरा हार्ट अटैक था जिसने फोर्टीज अस्पताल जाते -जाते उन्हे शांत कर दिया था और हमारा प्रिय फ्रैंक सदा -सदा के लिए हम सबसे जुदा हो गया था।

इस पूरे प्रकरण में जो महत्त्वपूर्ण बात है वह यह है कि अस्वस्थ अवस्था में फ्रैंक हुजूर जी को दिल्ली बुलाया क्यों गया? यदि वे दिल्ली पंहुच ही गए तो उन्हे राहुल गांधी जी से मिलने के बाद प्रापर इलाज का इंतजाम क्यों नही किया गया?बीमार फ्रैंक हुजूर को देश की सबसे प्राचीन पार्टी कांग्रेस ने मेट्रो के भरोसे क्यों छोड़ दिया?क्या कांग्रेस पार्टी के पास इतनी भी सामर्थ्य नहीं है कि वह बहुजन समाज के इतने बड़े थिंक टैंक को किसी ढंग के होटल, गेस्ट हाउस, वेस्टर्न कोर्ट, यूपी भवन आदि जगह पर ठहरा सके?
फ्रैंक हुजूर जी राहुल गांधी जी से मिलने के बाद 04 मार्च और 05 मार्च 2025 को दिल्ली में बीमार अवस्था में पड़े रहे लेकिन किसी ने उनकी खोजबीन नहीं की। वे 05 और 06 मार्च 2025 की रात में फोर्टीज अस्पताल में मृत घोषित होने के बाद पुलिस द्वारा जहांगीर पुरी के बाबू जगजीवन राम हॉस्पिटल की मर्चरी में पंहुचा दिए गए लेकिन 05 मार्च 2025 को दिन में 12 बजे तक किसी को पता नहीं था कि उनकी डेड बाडी कहां है?

शालीमार बाग में रह रहे युवा साथी डा मुलायम सिंह यादव जी जब फ्रैंक साहब के मृत्यु की खबर पाए तो वे माडल टाउन के नजदीकी अस्पताल फोर्टीज में कयास लगाए हुए पन्हुचे कि शायद वे इलाज हेतु यहीं ले जाए गए होंगे। फोर्टीज में बताया गया कि फ्रैंक हुजूर नाम का व्यक्ति इलाज हेतु आया था जिसकी मृत्यु हो गई और पुलिस ने उसे अपनी कस्टडी में ले लिया था। मुलायम जी जब माडल टाउन पुलिस के पास गए तो पुलिस ने बताया कि फ्रैंक हुजूर जी की डेड बाडी बाबू जगजीवन राम अस्पताल, जहांगीर पुरी के पोस्ट मार्टम हाउस में रखी है तो मुलायम सिंह यादव ने ट्वीट कर बताया कि फ्रैंक हुजूर जी की बाडी बाबू जगजीवन राम अस्पताल में रखी है।इस सूचना के मेरे सहित अनेक बुद्धिजीवी उक्त मर्चरी पर दोपहर बाद पंहुचे।

05 मार्च 2025 को जब फ्रैंक हुजूर जी के पिताजी आदरणीय बब्बन सिंह यादव जी दोपहर बाद अपनी पत्नी के साथ फ्लाइट से पटना से दिल्ली पंहुच गए तो उन्होंने मेडिकल बोर्ड से अंत्य परीक्षण करवाने की बात कही। मेडिकल बोर्ड द्वारा अगले दिन 06 मार्च 2025 को शव विच्छेदन कार्य संपन्न हुआ।उपरोक्त सम्पूर्ण घटनाक्रम के दौरान एकमात्र अनिल जयहिंद साहब दोपहर बाद 05 मार्च को पन्हुचे थे।

05/06 मार्च 2025 की रात में फ्रैंक हुजूर जी हर्ट अटैक से असमय काल कवलित हो गए जिसकी जानकारी 06 मार्च को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हो गई।इस दुखद घटना के बाद 08 मार्च 2025 को राहुल गांधी जी का सांत्वना पत्र उनकी पत्नी फरमिना मुक्ता सिंह जी के नाम सोशल मीडिया पर पढ़ने को मिला।इस दुखद पल में राहुल गांधी जी का पत्र लिखना उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।

09 मार्च 2025 को आदरणीय राहुल गांधी जी के 08 मार्च 2025 को लिखे पत्र को लेकर कांग्रेस पार्टी के कुछ साथी फ्रैंक हुजूर जी के लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी स्थित किराए के घर पर उनकी बेसहारा व बेहोश पड़ी पत्नी मुक्ता सिंह जी के पास पंहुचकर उन्हे दया है।इस दुःख की घड़ी में 08 मार्च को लिखा गया पत्र जब सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हो ही गया था तो उसे प्रिंट करवा के दुख के सागर में डूबी मुक्ता सिंह जी को देने का निहितार्थ मुझे समझ में नहीं आया है।

कांग्रेस के साथियों! कांग्रेस पार्टी देश की सबसे पुरानी पार्टी है। कांग्रेस के पास वर्तमान दौर में भी भाजपा के बाद सर्वाधिक पैसा है। फ्रैंक हुजूर जी कांग्रेस पार्टी का हिस्सा हो चुके थे और कांग्रेस के नेता राहुल गांधी जी के बुलावे पर अस्वस्थ रहने के बावजूद दिल्ली पंहुच खुद की शहादत दे चुके थे, ऐसे में आपका यह प्रिंटर से निकाला हुआ पत्र जिसे आप कांग्रेस जन बड़े सलीके से दुःख के सागर में डूबी हुई बेसहारा हो चुकी फ्रैंक हुजूर जी की पत्नी को देकर फोटो शूट करवाके सोशल साइट्स पर डाल रहे हैं, इससे क्या होगा?आप क्या चाहते हैं कि जिस तरीके से फ्रैंक हुजूर जी तमाम तस्वीरों और पत्रों को फ्रेम कराके अपनी दीवार पर सैकडो की तादात में टांगे हुए हैं वैसे ही राहुल जी के इस बहुमूल्य पत्र को मुक्ता सिंह जी भी फ्रेम कराके टांग दें?

कांग्रेस के साथियों! मैं किसी और की बात नहीं करता क्योंकि फ्रैंक हुजूर जी की मौत उस समय में हुई है जब वे राहुल गांधी जी के बुलावे पर दिल्ली उनसे मिलने गए थे जहां उन्हें मिलने के बाद अस्वस्थ होने के बावजूद लावारिश छोड़ दिया गया और उनकी मौत हो गई। ऐसी विषम परिस्थिति में जब फ्रैंक हुजूर जी अब इस दुनिया में नहीं हैं और उनकी पत्नी मुक्ता सिंह जी और 08-09 साल का बच्चा मार्कोस अनाथ और बेसहारा हो गए हैं,आप देश के सबसे पुराने दल के लोगों को संवेदना स्वरूप पत्र के रूप में कागज का टुकड़ा देने के साथ – साथ सम्मानजनक आर्थिक मदद भी देना चाहिए।

मैं राहुल गांधी जी द्वारा शोक पत्र लिखने पर उनकी संवेदनशीलता को पूरी शिद्दत से एप्रिशिएट करता हूं लेकिन यह पत्र फ्रेम कराके सजा देने से दुःख के पहाड़ तले दबी मुक्ता जी और मार्कोस उबर नहीं पाएंगे इसलिए कांग्रेस पार्टी को फ्रैंक हुजूर जी के परिवार की आर्थिक मदद करनी चाहिए।

मैं जानता हूं कि श्रद्धेय फरमीना मुक्ता सिंह जी स्वाभिमानी महिला हैं, वे क्राउड फंडिंग की इजाजत नहीं देंगी लेकिन मैं उनसे मिलकर इस हेतु याचना करूंगा कि हमलोगो को अनुमति दें कि बेटे मार्कोस की शिक्षा-दीक्षा के लिए कुछ किया जाए जिससे दूसरा फ्रैंक हुजूर तैयार हो सके।

राहुल गांधी जी द्वारा 08 मार्च 2025 को फ्रैंक साहब के निधनोपरांत शोक पत्र लिखने हेतु साधुवाद लेकिन पुनः यही अनुरोध कि पत्र के साथ आर्थिक सहयोग की भी महती आवश्यकता है जिस पर कांग्रेस पार्टी जरूर ध्यान देगी।


साहित्यिक जगत की मशहूर हस्ती और अंतर्राष्ट्रीय लेखक फ्रैंक हुजूर जी की दिल्ली में हृदयाघात से 48 वर्ष की अल्पायु में हुई मृत्यु। पाकिस्तान के क्रिकेटर इमरान खान के प्रधानमन्त्री बनने से पूर्व “इमरान वर्सेज इमरान” नामक लिखी गई बायोग्राफी ने फ्रैंक हुजूर जी को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई। वे “सोशलिस्ट मुलायम सिंह यादव” के अतिरिक्त अखिलेश यादव पर “टीपू स्टोरी” नामक किताब सहित अनेक पुस्तकों के लेखक थे।अंग्रेजी मासिक पत्रिका सोशलिस्ट फैक्टर के संपादक फ्रैंक हुजूर जी थे। वे एक अत्यन्त जीवन्त सख्शियत के अंग्रेज़ी लेखक थे। फ्रैंक हुज़ूर के निधन से हमने एक मूर्धन्य विद्वान, लेखक, पत्रकार, नाटककार, स्तंभकार, कवि को खो दिया है।


उपरोक्त पोस्ट पर हेमंत कुमार की एक टिप्पणी-

फ्रैंक जब अपनी तबीयत को लेकर खुद लापरवाह थे तो, कांग्रेस पार्टी या राहुल गांधी को कोसने का क्या मतलब है! इसी रिपोर्ट में लिखा है कि मेट्रो में बेहोश होने फिर होश में आने के बाद वह प्रोफेसर रतनलाल के घर गये। तबीयत ठीक नहीं थी। सिम्पटम्स के आधार पर दवा ली। अस्पताल जाने से इंकार किया। मॉडल टाउन में भी घर में ही भाप और विक्स से उपचार करते रहे। ऐसा तो कोई नहीं बता रहा है कि उन्होंने किसी से अस्पताल जाने के लिए मदद मांगी और नहीं मिली। रिपोर्ट बता रही हैं कि फ्रैंक ने अपनी सेहत की अनदेखी की। वरना उनकी जान बच सकती थी।

रही बात राहुल गांधी की चिट्ठी के साथ फोटो सेशन की तो यह बहुत ही घटिया दृश्य है। संवेदनहीन और चिरकुट नेताओं से इससे अधिक उम्मीद बेकार है।

राहुल गांधी का शोक संदेश पहले आना चाहिए था। उनको फ्रैंक की पत्नी से फोन पर बात करनी चाहिए थी। राहुल के मीडिया सलाहकार क्या घास छील रहे थे! फ्रैंक के आने-जाने,रहने-खाने के इंतजाम को लेकर कांग्रेस पार्टी को कोसने की जरूरत क्या है! यह सब भावनात्मक बातें हैं। फ्रैंक ने संघर्ष का रास्ता चुना था। इस रास्ते की दुश्वारियों से वह वाकिफ थे। शायद निजी सुख सुविधाओं को लेकर बहुत आकांक्षी नहीं थे। अन्यथा अपनी तबीयत की अनदेखी नहीं करते।

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