अपनी पहुंच और ताकत की बदौलत अखिलेश दास गुप्‍ता भारतीय बैडमिंटन संघ के सचिव डा. विजय सिन्‍हा पर भारी पड़ गए

उत्‍तर प्रदेश बैडमिंटन एसोसिएशन में मचे घमासान ने जाहिर कर दिया है कि देश भर के खेल संस्‍थानों पर नेता-अधिकारी और धनपशुओं का कब्‍जा है। खेलों के नाम पर आने वाले धन का बंदरबांट तो यह लोग करते ही हैं, खिलाडि़यों का शारीरिक, मानसिक और आर्थिक शोषण भी करते हैं। खासकर महिला खिलाडि़यों का शोषण खेल संस्‍थानों में आम हो चुका है। फुटबालर सोना चौधरी के आरोप हों या केरल साईं सेंटर में आत्‍म हत्‍या करने वाली एथलीट अपर्णा रामचंद्रन, या फिर महिला क्रिकेट या हॉकी, तमाम खिलाड़ी इस खेल संघों के कर्ताधर्ताओं के शोषण की शिकार हुई हैं। प्‍लेयरों की शिकायतों की कोई सुनने वाला नहीं है। उत्‍तर प्रदेश बैडमिंटन एसोसिएशन से पैदा हुआ विवाद इस बात का गवाह है कि खेल संस्‍थाएं खेल को दरकिनार कर ‘गंदा खेल’ खेलने में जुटी हुई हैं। संभावना है कि आपसी विवाद के बाद अब इसके भीतर की गंदगी भी बाहर आएगी, लेकिन सवाल यह है कि नेता-अधिकारी और धनपशुओं के कब्‍जे से खेल संस्‍थानों को मुक्ति कब मिलेगी? आखिर कब ये संस्‍थाएं भाई-भतीजावाद और शोषण से खिलाडि़यों को मुक्‍त करेंगी? बड़ा सवाल है।

गंदा ‘खेल’
12 फरवरी को बीबीडी यूपी बैडमिंटन एकेडमी के मुख्‍य सुरक्षा अधिकारी गोमतीनगर थाने में  एक शिकायत देते हैं, मामला बड़े लोगों से जुड़ा होता है, लिहाजा पुलिस तत्‍काल कोई मामला दर्ज नहीं करती है। गोमतीनगर पुलिस अपने वरिष्‍ठ अधिकारियों को भी इसकी जानकारी नहीं देती बल्कि आदतन मामले को लटकाए रखती है, लेकिन जब थानेदार पर वादी पक्ष का दबाव लगातार बढ़ता है तो वह बिना उच्‍चाधिकारियों के संज्ञान में लाए 21 फरवरी को बैडमिंटन एसोसिएशन से जुड़े मामले में मुकदमा दर्ज कर लेता है। एकेड‍मी के मुख्‍य सुरक्षा अधिकारी जंग बहादुर सिंह की शिकायत पर दर्ज हुए इस मुकदमे के साथ ही उत्‍तर प्रदेश बैडमिंटन एसोसिएशन के भीतर चल रही बहादुरों की जंग और सडांध भरी खदबदाहट, दोनों खुलकर सामने आ जाती है। फिर एसोसिएशन और एकेडमी के भीतर का कच्‍चा-चिट्ठा भी खुलकर सामने आने लगता है। मीडिया में आती खबरों से ऐसा प्रतीत होने लगता है, जैसे- ‘‘उत्‍तर प्रदेश बैडमिंटन एसोसिएशन का बीबीडी बैडमिंटन एकेडमी लंबे समय से अय्याशी, शराबखोरी, छेड़खानी, लूट, अमानत में खयानत, रिश्‍वतखोरी, खिलाडि़यों का कैरियर बरबाद करने का अड्डा बना हुआ है। यूपी बैडमिंटन एसोसिएशन के पूर्व सचिव डा. विजय सिन्‍हा अपने पुत्र एवं एसोसिएशन के कार्यकारी सचिव निशांत सिन्‍हा के साथ मिलकर एकेडमी को पूरी तरह बरबाद कर दिए हैं। पिता-पुत्र की जोड़ी ने एकेडमी के अंदर ऐसा दशहत कायम कर रखा है, जिससे कोई उनके खिलाफ चूं बोलने तक की हिम्‍मत नहीं जुटा पाता है। एकेडमी के भीतर का पूरा माहौल ऐसे गुंडे के अड्डे जैसा महसूस होने लगता है, जिसके खिलाफ किसी की बोलने की हिम्‍मत नहीं होती है या जो बोलेगा उसे अपनी जिंदगी और करियर दोनों गंवाना पड़ा जाएगा। फिर, अचानक एसोसिएशन के कुछ बड़े लोगों की इंट्री एकेडमी के अंदर होती है, और वे किसी हीरो की तरह खिलाडि़यों और एसोसिएशन को पिता-पुत्र के हाथों से बचा लेते हैं। उनके दहशत से बाहर निकाल लेते हैं।’’

पहली नजर में देखने पर मामला ऐसा लगता है, जैसे कि पूर्व सचिव डा. विजय सिन्‍हा एवं कार्यकारी सचिव निशांत सिन्‍हा ने इस पूरे बीबीडी बैडमिंटन अकादमी को अपना चारागाह बना रखा था और लंबे समय से मनमानी करते आ रहे थे, लेकिन अगर थोड़ी गहराई में जाएं तो मामला उतना सीधा-सरज नहीं है, जितना दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। यह अकादमी और उसके भीतर के नापाक गठजोड़ के स्‍याह पक्ष का केवल यह एक छोटा सा हिस्‍सा भर है। असली कहानी तो कहीं और भयावह है। बैडमिंटन एसोसिएशन की भूमिका पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं कि यदि निशांत सिन्‍हा के खिलाफ पदाधिकारियों को शिकायतें लगातार मिल रही थीं, तो जांच कराने और एक्‍शन लेने में इतना समय क्‍यों लगाया गया? देर इसलिए की गई कि ताकि मामला आपस में ही सलट जाए? यही देरी इस पूरे मामले को संदिग्‍ध बनाती हैं। सवाल है कि जब यह शिकायत चेयरमैन अखिलेश दास को लगातार मिल रही थी तो जांच कराने या हटाने में इतनी देर क्‍यों की गई? क्‍यों लंबे समय तक खिलाडि़यों का शोषण होता रहा और वरिष्‍ठ लोग देखते रहे? आखिर उन्‍हें किस बात का इंतजार था? ऐसा क्‍या था कि यह कदम पहले नहीं उठाया गया?  

दरअसल, यह पूरा मामला भ्रष्‍टाचार और आर्थिक हितों के टकराव का है, जैसे-जैसे विवाद बढ़ता जाएगा गंदगी मय सबूत बाहर निकलती जाएगी। इस लड़ाई की शुरुआत तब हुई जब अखिलेश दास गुप्‍ता और डा. विजय सिन्‍हा में कुछ आपसी मामलों को लेकर मतभेद हो गया। दोनों गुट एक दूसरे को शह-मात देने की कोशिश में जुटे गए, लेकिन अपनी पहुंच और ताकत की बदौलत अखिलेश दास गुप्‍ता भारतीय बैडमिंटन संघ के सचिव डा. विजय सिन्‍हा पर भारी पड़ गए। वैसे, इस लड़ाई की आधिकारिक शुरुआत तब हुई जब 4 अक्‍टूबर 2016 को उत्‍तर प्रदेश बैडमिंटन एसोसिएशन के चेयरमैन अखिलेश दास ने बैठक में पिता-पुत्र के खिलाफ जांच का निर्णय लिया। 27 अक्‍टूबर 2016 को इस मामले में जांच के लिए पूर्व जिला जज यूपीएस कुशवाहा को पत्र जारी किया गया, जिसमें अधिवक्‍ता अशोक कुमार सिंह भी सदस्‍य बनाए गए। इस दो सदस्‍यीय कमेटी ने 15 दिसंबर 2016 को अपनी जांच शुरू की। इस बीच, 9 जनवरी 2017 को डा. विजय सिन्‍हा को संघ से हटाए जाने की घोषणा कर दी गई। बेंगलुरु में हुए एक्‍जीक्‍यूटिव कमेटी की मीटिंग में सिन्‍हा को हटाए जाने का फैसला किया गया। अध्‍यक्ष अखिलेश दास गुप्‍ता ने अपनी आपातकालीन शक्तियों का प्रयोग करते हुए डा. सिन्‍हा को संघ के सचिव पद से हटाकर अनूप नारंग को यह जिम्‍मेदारी सौंप दी। अखिलेश दास के फैसले को संघ ने सर्वसम्‍मति से स्‍वीकार कर लिया। प्रेस रिलीज जारी कर यह बताया गया कि डा. विजय सिन्‍हा के खिलाफ न्‍यायिक जांच चल रही है, लिहाजा उन्‍हें हटा दिया गया है। दूसरी तरफ डा. विजय सिन्‍हा लगातार आरोप लगाते रहे कि चेयरमैन संघ में अपनी मनमानी नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए उन्‍हें हटाया गया है। उन्‍होंने अपने हटाए जाने के फैसले को भी गैर-कानूनी करार दिया।      

खैर, इस मामले में असली मोड़ तब आया, जब 23 जनवरी को जांच कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट संघ को सौंपी। जांच में आया कि निशांत पिछले 26 महीने से एकेडमी के अंदर अपनी हुकूमत चला रहा था। निशांत ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कई महिला खिलाडि़यों का यौन शोषण किया। छेड़खानी की, कई खिलाडि़यों को प्रताडि़त किया। बंधक बनाया। वसूली की। कई खिलाडि़यों का करियर बरबाद कर दिया। न्‍यायिक जांच में यह भी सामने आया कि निशांत सिन्‍हा ने अकादमी के 13 लाख रुपए अपनी अय्याशी में उड़ा डाले। उसने 28 जनवरी 2014 से लेकर 2 अप्रैल 2016 के बीच अकादमी से कुल 12,94,451 रुपए लिए, लेकिन यह धनराशि कहां खर्च की गई, इसका कोई हिसाब-किताब नहीं दिया। जांच में कहा गया कि यह धनराशि डा. विजय सिन्‍हा के मौखिक आदेश पर दिए गए। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद एसोसिएशन के एक्‍जीक्‍यूटिव कमेटी की 12 फरवरी को बैठक हुई, जिसमें डा. विजय सिन्‍हा को सचिव तथा उनके पुत्र निशांत सिन्‍हा को कार्यकारी सचिव के पद से हटा दिया गया। इसी दिन बीबीडी बैडमिंटन एकेडमी के मुख्‍य सुरक्षा अधिकारी जंग बहादुर सिंह ने गोमती नगर थाने में पिता-पुत्र तथा पीआरओ करन श्रीवास्‍तव के खिलाफ शिकायत दी, लेकिन हाई प्रोफाइल मामला होने की वजह से पुलिस ने तत्‍काल रिपोर्ट दर्ज नहीं किया। उपर से दबाव पड़ने के बाद गोमतीनगर थाना ध्‍यक्ष मनोज कुमार मिश्रा ने 21 फरवरी को एफआईआर दर्ज की।      

एफआईआर में जंग बहादुर सिंह के हवाले से बताया गया कि एसोसिएशन को महिला खिलाडि़यों की ओर से शिकायतें प्राप्‍त हुई हैं कि डा. विजय सिन्‍हा के बेटे निशांत ने पद का दुरुपयोग कर उनका शारीरिक और मानसिक शोषण किया है। इसकी जांच कराई गई। जांच में आरोप सही पाए गए। तहरीर के अनुसार एक खिलाड़ी आकाश ने विभिन्‍न प्रतियोगिताओं में खिलाने के लिए निशांत पर वसूली करने का भी आरोप लगाया है साथ ही यह भी कहा कि अपने कक्ष में महिला खिलाडि़यों को लाने के लिए बाध्‍य करता था। डा. विजय सिन्‍हा से अनुमति दिलाने के नाम पर 50 हजार रुपए की मांग की थी। एक अन्‍य खिलाड़ी अंकित पटेल ने भी निशांत पर फिजियोथेरेपी के नाम पर तीन बार में 22 हजार रुपए वसूलने का आरोप लगाया है। खिलाड़ी रजत शर्मा का आरोप है कि निशांत के कहने पर ही उसके परिजन पिछले चार महीने से उनके पीए करन श्रीवास्‍वत के खाते में 15 हजार रुपए प्रतिमाह के हिसाब से जमा करा रहे हैं, लेकिन उन्‍हें कोई रसीद उपलब्‍ध नहीं कराई गई। निशांत सिन्‍हा पर यह भी आरोप लगाए गए कि वह एक धर्म विशेष के खिलाफ काम कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट और एफआईआर के जरिए ऐसा सिद्ध किया गया कि निशांत सिन्‍हा पूरी तरह से अराजक और धर्म विशेष के खिलाफ काम करने वाला शख्‍स है।

दरअसल, भारतीय बैडमिंटन एसोसिएशन और उत्‍तर प्रदेश बैडमिंटन एसोसिएशन अखिलेश दास गुप्‍ता और उनके सहयोगी डा. विजय सिन्‍हा का जेबी संगठन बन गया है। जब तक दोनों के आर्थिक हित सुरक्षित रहे सारे काम बेरोकटोक चलते रहे। दोनों एक दूसरे की पूंछ सहलाते रहे, लेकिन इसी बीच एकेडमी में एक आईएएस अधिकारी नवनीत सहगल की इंट्री के बाद दोनों के बीच मतभेद उभरने शुरू हो गए। बैडमिंटन एसोसिएशन एवं बैडमिंटन एकेडमी गोरखधंधों का गढ़ बन गया। खेल के नाम पर अपने परिजनों को उपकृत करने की कोशिशें होने लगीं। वर्ष 2014 का जापान दौरा इसका उदाहरण है। एक्‍सचेंज प्रोग्राम के तहत वर्ष 2014 में बैडमिंटन खिलाडि़यों को जापान भेजे जाने का प्रस्‍ताव आया, जिसका पूरा खर्च जापानी एम्‍बेसी को वहन करना था। बैडमिंटन खिलाडि़यों के चयन के लिए दिल्‍ली बैडमिंटन एसोसिएशन के सचिव एसपी सिंह को जिम्‍मेदारी दी गई थी, लेकिन अपरिहार्य कारणों ने उन्‍होंने यह जिम्‍मेदारी अध्‍यक्ष अखिलेश दास गुप्‍ता को देकर टीम जापान भेजने का आग्रह किया। भारत ने 23 खिलाडि़यों समेत कुल 25 लोगों को जापान भेजा, लेकिन दिलचस्‍प बात यह रही कि इस एक्‍सचेंज प्रोग्राम में खिलाड़ी कम नाते-रिश्‍तेदार ज्‍यादा शामिल किए गए। इसके लिए कोई सलेक्‍शन ट्रायल तक नहीं आयोजित किया गया। अखिलेश दास की बेटी सोना दास समेत उनके कई नजदीकी खिलाडि़यों के एक्‍सचेंज प्रोग्राम को अपनी मौज-मस्‍ती का टूर बना डाला। बैडमिंटन की इस टीम में एक फुटबॉलर तक को भेज दिया गया क्‍योंकि वह टीम मैनेजर की बेटी थी। दरअसल, बैडमिंटन अकादमी पूरी तरह मनमानी करने का अड्डा बन गया था। इस टूर में अखिलेश दास की बेटी सोना दास के अलावा डीसीबीए के सचिव अपिंदर सब्‍बरवाल की बेटी एंजल सब्‍बरवाल, डीसीबीए के उपाध्‍यक्ष हरीश आहूजा का पुत्र हिमांशु आहूजा, सचिव जतिंदर कोचर की बेटी गीतिका कोचर, कोषाध्‍यक्ष कमल थापर के पुत्र सुद्रित थापर, उपाध्‍यक्ष मधुमिता विष्‍ट के पुत्र हर्षबर्धन विष्‍ट तथा मैनेजर संजीव जोशी की बेटी संजना को जापान भेजा गया। संजना बैडमिंटन के बजाय फुटबाल की प्‍लेयर थी। जाहिर है कि प्रोग्राम के लिए प्‍लेयरों को भेजा जाना था, उसको पर्यटन टूर बनाकर नाते-रिश्‍तेदारों को भेज दिया गया और कहीं कोई उंगली नहीं उठी। जांच में भी सब कुछ ठंडे बस्‍ते में डाल दिया गया।  

दरअसल, बैडमिंटन संघ और बीबीडी बैडमिंटन एकेडमी में विवाद की शुरुआत तब हुई, जब 30 साल से जमे-जमाए डा. विजय सिन्‍हा अपने पुत्र निशांत सिन्‍हा को संघ के अंदर घुसा दिया। पिता के नक्‍शेकदम पर चलते हुए निशांत संघ तथा एकेडमी के भीतर अपना प्रभाव बढ़ाने लगा और अपने पिता की तरह अखिलेश दास या उनकी टीम के लोगों की हर बात आंख मूंदकर मानने को तैयार नहीं था, लिहाजा यह बात दास और उनकी टीम को खटकने लगी। अखिलेश दास भी अपने परिवार को संघ के भीतर एडजस्‍ट करने की कोशिश करने लगे हुए थे। मामला बिगड़ा तब, जब अखिलेश दास और उनके एक नजदीकी आईएएस अधिकारी नवनीत सहगल की नजर एकेडमी की जमीन पर गड़ गई। इस जमीन के कामर्शियल इस्‍तेमाल की तैयारी की जाने लगी, जो डा. विजय सिन्‍हा और निशांत को परेशान करने लगी। इन दोनों ने जब इसका विरोध शुरू किया तो उठा-पटक शुरू हो गई। निशांत ने अखिलेश दास के कामों को सबसे ज्‍यादा विरोध किया, लिहाजा सबसे ज्‍यादा टार्गेट पर उसी को लिया गया ताकि पुत्र पर दबाव बनाकर पिता को भी चुप्‍पी साधे रखने को मजबूर किया जा सके।

अखिलेश दास संघ पर पूरा आधिपत्‍य स्‍थापित करने के लिए ही अपने कर्मचारियों की नियुक्ति संघ और एकेडमी में करा दी। बीबीडी के रजिस्‍ट्रार रहे सुधर्मा सिंह को बैडमिंटन संघ का कोषाध्‍यक्ष बनाकर इसकी शुरुआत की गई। फिलहाल जिस अरुण कक्‍कड़ को उत्‍तर प्रदेश बैडमिंटन एसोसिएशन के सचिव की जिम्‍मेदारी दी गई है, वो भी बीबीडी के कर्मचारी हैं। यह अखिलेश दास का ही कमाल है कि उन्‍होंने अवैतनिक पदों पर वैतनिक कर्मचारी रख डाले। आर्थिक टकराव के बाद ही डा. विजय सिन्‍हा को संघ से बाहर किए जाने की कोशिशें शुरू हो गईं। इसके बाद डा. सिन्‍हा ने भी पत्र लिखकर आरोप लगाया कि नवंबर 2015 से दिसंबर 2016 के बीच मात्र 13 महीनों में संघ के 36 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए, लेकिन इसकी कोई जांच नहीं की गई। इस खाते की निगरानी के लिए सेवानिवृत्‍त जज वीएन खरे को ऑर्बिरेटर नियुक्‍त किया गया था, लेकिन उनसे भी सहमति नहीं ली गई। डा. सिन्‍हा की जगह सचिव बनाए गए अरुण कक्‍कड से फोन कर जब भी इस पूरे विवादित मामले में जानकारी मांगी गई, उन्‍होंने मीटिंग का बहाना करके बात करने से इनकार कर दिया। इधर, संघ के कार्यकारी सचिव निशांत सिन्‍हा आरोप लगाते हैं कि एकेडमी की जमीन पर अखिलेश दास की नजर है, वह इसका का‍मर्शियल इस्‍तेमाल करना चाहते हैं। जब हम लोग बाधक बन रहे थे तो हमलोगों पर इस तरह से दबाव बनाने की कोशिश की गई।

दूसरी तरफ, इस विवाद के पूरे तह तक जाएं तो एक बात सामने आती है कि अखिलेश दास अरबों की सरकारी जमीन पर हास्‍टल बनवाने की तैयारी कर रहे थे। बताया जा रहा है कि उनके इस प्‍लान में एक रेस्‍टोरेंट खोलने की योजना भी बनाई गई थी। एकेडमी को पूरी तरह कामर्शियल बना देने की तैयारी थी। इसमें डा. सिन्‍हा के हाथ कुछ खास नहीं आ रहा था। बात बढ़ी तब जब, डा. विजय सिन्‍हा ने पत्र लिखकर अध्‍यक्ष आलोक रंजन से शिकायत की। विवाद इसी को लेकर शुरू हुआ। इस पत्र के बाद ही अखिलेश दास डा. विजय सिन्‍हा से पूरी तरह नाराज हो गए। उन्‍हें संघ और अकादमी से बाहर करने के लिए रणनीतियां बनानी शुरू कर दी। अखिलेश दास पर एकेडमी की जमीन कब्‍जा करने का आरोप लगा, लेकिन श्री दास ने एक वेबसाइट से बातचीत में कहा कि डा. सिन्‍हा चाहते थे कि इस प्रोजेक्‍ट का काम उनके बेटे निशांत को मिले, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

दरअसल, अखिलेश दास का इतिहास है कि वह जमीनों एवं अन्‍य मामलों को लेकर अक्‍सर विवाद में रहते हैं। मर्केंटाइल बैंक का मामला हो या फिर सेमरा गांव में कब्‍जे का या फिर राज्‍यसभा के लिए बसपा सुप्रीमो मायावती को करोड़ों दिए जाने का या फिर दिल्‍ली वाली चर्च की जमीन का। वैसे, इस मामले को लेकर भी तमाम तरह के सवाल उठ रहे हैं। इतनी बड़ी घटना के बाद भी बैडमिंटन संघ पुलिस जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। गोमतीनगर थाना प्रभारी पर मुकदमा लिखने का इतना दबाव बनाया गया कि उसने अपने वरिष्‍ठ अधिका‍रियों को ही एफआईआर दर्ज करने की जानकारी नहीं दी। जांच अधिकारी बनाए गए उप‍निरीक्षक नारदमुनि सिंह को भी एसोसिएशन सहयोग नहीं कर रहा है। नारदमुनि कहते हैं, ‘‘वादी पक्ष के कई लोगों के बयान लिए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक कर्मचारियों की सूची उपलब्‍ध नहीं कराई गई है। आरोप लगाने वाले खिलाड़ी अभी गुजरात गए हुए हैं, लिहाजा उनका बयान दर्ज नहीं किया जा सका है। विवेचना चल रही है।’’ जाहिर है, संघ के लोग डा. विजय सिन्‍हा और निशांत सिन्‍हा के खिलाफ मामला तो दर्ज करा दिया है, लेकिन इसे लटकाकर लंबा खिंचना चाहते हैं। पूरी कोशिश डराकर दबाव बनाए रखने की है ताकि एक-दूसरे का भेद छुपा रह सके। संभव है कि अन्‍य मामलों की तरह इसे भी देर-सबेर ठंडे बस्‍ते में डाल दिया जाए।  

अवैधानिक है बैडमिंटन संघ
उत्‍तर प्रदेश बैडमिंटन संघ में चल रहे विवाद के बीच सबसे बड़ी बात यह है कि नियमानुसार पूरी कार्रवाई ही अवैध है, लेकिन रसूख के आगे कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। कार्यालय डिप्‍टी रजिस्‍ट्रार फर्म्‍स, सोसाइटीज एवं चिट्स, लखनऊ ने पूरे एसोसिएशन को कालातीत घोषित कर रखा है। अपने तीन फरवरी के आदेश में डिप्‍टी रजिस्‍ट्रार अजय गुप्‍ता ने उत्‍तर प्रदेश बैडमिंटन एसोसिएशन को कालातीत बताते हुए निर्वाचन कराने का निर्देश दिया था। केसी श्रीवास्‍तव ने 18 अक्‍टूबर 2016 को रजिस्‍ट्रार को पत्र लिखकर दस बिंदुओं की एक शिकायत दी तथा तीन बिंदुओं पर संस्‍था हित में कार्रवाई करने का अनुरोध किया। उन्‍होंने मांग किया था कि उत्‍तर प्रदेश बैडमिंटन एसोसिएशन पर अवैधानिक रूप से कब्‍जा जमाए व्‍यक्तियों को सोसायटी के परिचालन से मुक्‍त करते हुए उक्‍त सोसाइटी का परिचालन रजिस्‍ट्रार द्वारा नियुक्‍त प्रशासन के अधीन करवाया जाए। दूसरा पंजीकृत नियमावली के अनुसार उत्‍तर प्रदेश बैडमिंटन एसोसिएशन की कार्यसमिति का गठन करने हेतु निष्‍पक्ष एवं स्‍वतंत्र चुनाव शीघ्र करवाए जाएं। तीसरा वि‍धिवत निर्वाचित कार्यकारिणी से इतर व्‍यक्तियों द्वारा संबद्ध या आमेलित या नामित सदस्‍यों को अवैधानिक रूप से दी गई सदस्‍यता की जांच के उपरांत समाप्‍त करने तथा जांच के दौरान सदस्‍यता निलंबित करने की मांग की गई थी। दूसरे पक्ष से डा. विजय सिन्‍हा ने तमाम सबूत दिए। दोनों पक्षों का परीक्षण करने के बाद डिप्‍टी रजिस्‍ट्रार अजय गुप्‍ता ने लिखा कि संस्‍था द्वारा प्रारंभ से नियमावली के नियम 6ए (3) के अनुसार प्रबंध समिति का चुनाव तीन वर्ष के लिए नहीं किया जा रहा था। सदस्‍यों की संख्‍या भी मनमाने ढंग से बढ़ाई जा रही थी। 1980 में संस्‍था के 18 सदस्‍य थे, जो 2014 में बढ़कर 76 हो गई थी। नियमावली में संसोधन किए बगैर अनाधिकृत रूप से चेयरमैन का पद मैनेजिंग कमेटी में शामिल कर लिया गया। वर्ष 2005 से 2008 के बीच चेयरमैन का पद हटाकर वरिष्‍ठ उपाध्‍यक्ष का पद बढ़ा दिया गया। 2014-15 में फिर चेयरमैन का पद दिखा दिया गया तथा 67 सदस्‍यीय प्रबंध समिति की सूची प्रस्‍तुत की गई। उक्‍त से स्‍पष्‍ट है कि संस्‍था बिना नियमावली संशोधन कराए प्रबंध समिति में सदस्‍यों की संख्‍या लगातार अनाधिकृत रूप से बढ़ाई जाती रही, साथ ही अनाधिकृत रूप से चेयरमैन और वरिष्‍ठ उपाध्‍यक्ष के पद भी बनाए गए, जबकि नियमावली में उक्‍त का कोई उपबंध नहीं था। उक्‍त विवेचन से स्‍पष्‍ट है कि क्‍योंकि संस्‍था के पंजीकरण दिनांक 25.07.1983 को ही कालातीत हो गई थी, क्‍योंकि संस्‍था के पंजीकरण दिनांक 25.07.1980 को प्रस्‍तुत 29 सदस्‍यीय प्रबंध समिति का कार्यकाल 1983 में ही समाप्‍त हो गया था। डिप्टी रजिस्ट्रार ने अपने आदेश में लिखा है कि संस्था उत्तर प्रदेश बैडमिंटन एसोसिएशन की प्रबंध समिति का कार्यकाल संस्था नियमावली के अनुसार तीन वर्ष के लिए था। निर्वाचन कार्रवाई मूल रूप में अथवा पत्रावली में उपलब्ध न होने के कारण संस्था की प्रबंध समिति को सोसाइटी रजिस्ट्रार अधिनियम 1860 की धारा 25(2) के कर्म में कालातीत घोषित करते हुए कार्यालय द्वारा निर्वाचन कराये जाने के आदेश पारित किये जाते हैं। उक्‍त के क्रम में साधारण सभा के सदस्‍यों की सूची कार्यालय में याथाशीघ्र प्रेषित करना सुनिश्चित करें ताकि अनंतिम सूची के प्रकाश के साथ निर्वाचन कार्यक्रम की घोषणा की जा सके। यह आदेश डिप्‍टी रजिस्‍ट्रार ने 3 फरवरी 2017 को जारी किए थे, लिहाजा अब सवाल यह है कि जब यह संस्‍था कालातीत हो चुकी थी तथा चेयरमैन एवं वरिष्‍ठ उपाध्‍यक्ष के पद अनाधिकृत घोषित कर दिए गए थे, तब कैसे प्रबंध समिति ने किस आधार पर उक्‍त कार्रवाइयों को अंजाम दिया?   

शादी घर बन गया था एकेडमी
उत्‍तर प्रदेश सरकार ने उत्‍तर प्रदेश बैडमिंटन संघ को गोमतीनगर में कई एकड़ में फैले भूखंड को खेल के लिए लीज पर दे रखा है, लेकिन यहां खेल छोड़कर सारी गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। सरकार द्वारा संघ को दी गई जमीन पर अवैध रूप से बीबीडी एकेडमी का संचालन हो रहा है। बीबीडी एकेडमी खेल का मैदान कम शादी और आयोजनों का अड्डा ज्‍यादा बन चुका था। यहां शादी से लेकर तमाम तरह के आयोजन किए जाते थे। इस दौरान खेलों की गतिविधियां प्रभावित होती थीं या फिर पूरी तरह ठप पड़ जाती थीं। खिलाडि़यों की प्रैक्टिस तक पर रोक लग जाती थी, लेकिन किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता था। सरकार से खेल के लिए लीज पर मिली जमीन का खुलेआम कामर्शियल उपयोग किया जा रहा था, लेकिन इसे रोकने की हिम्‍मत किसी में नहीं थी। आयोजनों के दौरान परिसर में मौजूद हास्‍टल को बारातियों के इस्‍तेमाल के लिए दे दिया जाता था। फिजिकल ट्रेनिंग सेंटर पर मंडप बनाया जाता था। बैडमिंटन अकादमी में शादी करना स्‍टेटस सिंबल बन चुका था, लिहाजा सहालग के सीजन में तो अक्‍सर ही बीबीडी बुक रहता था। मनमाने ढंग से बुकिंग की जाती थी। शादियों एवं अन्‍य आयोजनों की बुकिंग के जरिए करोड़ों रुपए का वारा-न्‍यारा हुआ, लेकिन पैसा किसकी जेब में गया इसकी कोई लिखा-पढ़ी नहीं है। दोनों पक्ष पैसा वसूलने का आरोप एक दूसरे पर लगा रहे हैं। वैसे, भी जिस खेल विभाग पर इसे रोकने की जिम्‍मेदारी थी वह भी बड़े लोगों के प्रभाव में आंख मूंद कर बैठा हुआ था।

चर्च जमीन फर्जीवाड़ा में थे साथ-साथ
इस पूरे प्रकरण के पीछे की असलियत को समझना चाहते हैं तो आपको थोड़ा फ्लैश बैक में चलना होगा। आज एक दूसरे के दुश्‍मन बने यह दोनों गुट कभी एक दूसरे की पीठ खुजलाया करते थे। वर्ष 2006 में अखिलेश दास कांग्रेस की सरकार में केंद्रीय इस्‍पात राज्‍य मंत्री हुआ करते थे। राष्‍ट्रीय इस्‍पात निगम के घाटे में होने के चलते इसका स्‍टील अथारिटी ऑफ इंडिया यानी सेल में मर्ज करने का निर्णय लिया गया। दिल्‍ली के मथुरा रोड पर बहापुर में राष्‍ट्रीय इस्‍पात निगम ने कैथोलिक सोसाइटी की 14 बीघा 5 बिस्‍वा जमीन लीज पर ले रखी थी, जिस पर चर्च का मालिकाना हक था। निगम इसे चर्च को लौटाने की तैयारी कर रहा था कि इनलोगों की नजर इस जमीन पर पड़ गई। इस जमीन की फर्जी सेल डीड 13 मार्च 1956 की तारीख में 4 लाख रुपए में चार लोगों- श्रीमती विद्या देवी, श्‍याम लाल गुप्‍ता, वीके टुटेजा तथा राम शंकर तिवारी के नाम से बना ली गई। दिलचस्‍प बात यह रही कि इस जमीन की मालिकाना हक रखने वाली विद्या देवी अखिलेश दास के मर्केंटाइल बैंक में सहयोगी और बैडमिंटन संघ के सचिव विजय सिन्‍हा की मां थीं। जबकि श्‍याम लाल गुप्‍ता और वीके टुटेजा क्रमश: अखिलेश दास गुप्‍ता और आईएएस अधिकारी नवनीत सहगल के रिश्‍तेदार थे। चौथे राम शंकर तिवारी नवनीत सहगल के खास थे। दिल्‍ली के कालिकाजी के तहसीलदार को मिलाकर इन लोगों ने 4000 करोड़ के जमीन के फर्जीवाड़े का पूरा स्क्रिप्‍ट तैयार कर लिया। 17 जनवरी 2008 को उपरोक्‍त चारों व्‍यक्तियों ने 100 रुपए के स्‍टाम्‍प पेपर पर अखिलेश दास गुप्‍ता की पत्‍नी अलका दास तथा आईएएस अधिकारी नवनीत सहगल की पत्‍नी वंदना सहगल के नाम से पॉवर ऑफ अटार्नी जारी कर दी। इस अटॉर्नी में यह भी मेंशन किया गया कि अशोक पाठक और प्रवीन गोयल को म्‍यूटेशन यानी दाखिल खारिज कराने और नाम परिवर्तन के लिए अधिकृत किया जाता है, लेकिन इस प्रापॅर्टी को बेचने का अधिकार केवल अलका दास गुप्‍ता और वंदना सहगल के पास रहेगा। इसके बाद इस अरबों की प्रापर्टी को बेचने की तैयारी शुरू कर दी गई। दिल्‍ली कैथोलिक आर्कडिओसेस के प्रधान पादरी विशेंट एम कांसेसाओ के हवाले से पत्र जारी किया गया, जिसमें लिखा गया कि विद्या देवी अन्‍य को बेचे गए जमीन की लीज द इंडियन ऑयरन एवं स्‍टील कंपनी लिमिटेड के पास है, उसका मालिकान के पक्ष में दाखिल खारिज कराने के लिए चर्च की तरफ से अधिवक्‍ता निशि रंजन सिंह को अधिकृत किया जाता है, जिनका हस्‍ताक्षर नीचे दिया गया है। इस पत्र पर कोई तिथि अंकित नहीं की गई।

इधर, 12 मार्च 2008 को अलका दास गुप्‍ता और वंदना सहगल के हस्‍ताक्षर वाला एक पत्र एम्‍मार एमजीएफ के सीएमडी सिद्धार्थ सरीन को भेजा गया, जिसमें 1500 करोड़ में उक्‍त जमीन बेचने की इच्‍छा जताई गई। इसके जवाब में सिद्धार्थ सरीन के अधिवक्‍ता राजीव अग्निहोत्री ने 9 अप्रैल 2008 को गोपनीय पत्र लिखकर पूछा कि आपलोगों से लगातार संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन संपर्क नहीं हो पा रहा है। मेरी कंपनी और कालिकाजी तहसीलदार आलोक शर्मा म्‍यूटेशन में प्रासेस में लगे हुए हैं। आप लोग मेरे इन नंबरों 98110232.. या 93126333.. पर संपर्क करें। इसी बीच दिल्‍ली कैथोलिक आर्कडिओसेस के प्रधान पादरी विशेंट एम कांसेसाओ के हवाले से 7 जुलाई 2008 को एक पत्र स्‍टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया के चेयरमैन को भेजा गया, जिसमें कहा गया कि उपरोक्‍त जमीन विद्या देवी एवं अन्‍य को 13 मार्च 1956 को बेच दिया गया है, लिहाजा लीज का रेंट नए मालिकों को उपलब्‍ध कराया जाए, हमें कोई आपत्ति नहीं है। हम इस पत्र के साथ सेल डील की सत्‍य फोटोकॉपी, जो 1371 नंबर के पेज नंबर 377 से 380 पर रजिस्‍टर्ड है। यह सब प्रक्रिया चल ही रही थी कि इस फर्जीवाड़े की सुगबुगाहट की जानकारी कैथोलिक आर्कडिओसेस के प्रधान पादरी विशेंट एम को हो गई। उन्‍होंने 28 अगस्‍त 2008 को इस फर्जीवाड़े के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दिया, जिसमें विद्या देवी, बृजराज नागर, श्‍याम लाल गुप्‍ता राम शंकर तिवारी को नामजद कराया गया, जबकि मुकदमा दर्ज होने से पहले ही विद्या देवी की मौत हो गई थी। इस पूरे मामले की जांच दिल्‍ली क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। मार्च 2010 से पहले श्‍याम लाल गुप्‍ता और वीके टुटेजा की भी मौत हो चुकी थी। यानी राम शंकर को छोड़कर शेष तीन जमीन मालिक जांच के दौरान ही मर चुके थे।  

इस पूरे फर्जीवाड़े के तैयार कागजातों के आधार पर यह तय हो गया था कि अगर यह फर्जीवाड़ा सफल हो जाता तो इसका सीधा फायदा अलका दास गुप्‍ता और वंदना सहगल को मिलता, लेकिन इन दोनों के पतियों के रसूख और पहुंच की बदौलत इस जांच की आंच इन लोगों तक नहीं पहुंच पाई। जमीन के म्‍यूटेशन की जिम्‍मेदारी उठाने वाले अशोक पाठक, तहसीलदार एवं अधिवक्‍ता को बलि का बकरा बना दिया गया, जबकि म्‍यूटेशन में शामिल किए गए प्रवीण गोयल आश्‍चर्यजनक से बरी हो गए। कहा जाता है कि इस फर्जीवाड़े की आंच से बचने के लिए लाखों रुपए पानी की तरह बहाए गए। इसी रुपए के बहाव में जांच अधिकारी ने कई सारे एविडेंसों को नजरंदाज करते हुए इस पूरे फर्जीवाड़े के लिए अशोक पाठक और राम शंकर तिवारी को जिम्‍मेदार ठहराया। जांच में अशोक पाठक के साथ म्‍यूटेशन के लिए अधिकृत किए गए प्रवीण गोयल को भी बचा लिया गया, क्‍योंकि यह नवनीत सहगल के करीबी थे। इस खेल में अखिलेश दास गुप्‍ता और नवनीत सहगल के साथ डा. विजय सिन्‍हा भी शामिल थे, क्‍योंकि विद्या देवी उन्‍हीं की मां थीं, लेकिन आंच इन तीनों में से किसी पर नहीं आई। इन लोगों ने अपनी पहुंच और रसूख के साथ पैसे का इस्‍तेमाल करते हुए खुद को बचा लिया, जबकि पॉवर ऑफ अटार्नी के लिहाज से उस जमीन की खरीद-बिक्री का सीधा लाभ अलका दास गुप्‍ता और वंदना सहगल को होना था, लेकिन जांच अधिकारी समीर श्रीवास्‍वत ने इन सभी तथ्‍यों को नजरअंदाज कर दिया। पॉवर ऑफ अटार्नी और सिद्धार्थ सरीन को भेजे गए पत्रों को भी जांच में शामिल नहीं किया गया। जबकि अगर हस्‍ताक्षरों की ही फोरेंसिक जांच करा ली जाती तो सच्‍चाई सामने आ जाती, लेकिन जांच अधिकारी जिंदा मक्‍खी निगल गया। यह इन दोनों का ही प्रभाव था कि 12 जुलाई 2012 को एसएसपी लखनऊ को पत्र लिखकर कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने अशोक पाठक को ब्‍लैमेलर बताते हुए उस के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा तथा अपने पत्र में उन्‍होंने दोनों को खुद ही क्‍लीन चिट देते हुए लिखा था कि उक्‍त दोनों महिलाओं का इस मामले से किसी भी प्रकार का संबंध नहीं है। इन लोगों ने 17 नवंबर 2011 को द इंडियन एक्‍सप्रेस के दिल्‍ली संस्‍करण में इसकी घोषणा भी कर दी थी। दरअसल, ऊपरी स्‍तर पर सब एक दूसरे की पूंछ-पीठ सहलाते रहते हैं, क्‍योंकि सभी का कुछ ना कुछ फंसा रहता है। अगर इस मामले की सीबीआई जांच कराई जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है तथा अरबों की जमीन हड़पने की कोशिश करने सफेदपोश चेहरों के पीछे छिपी कालिमा भी बाहर आ सकती है, लेकिन सभी दलों में पकड़ रखने वाले रसूखदारों के चलते यह संभव नहीं है। केवल म्‍यूटेशन कराने के जिम्‍मेदारी बनाए गए अशोक पाठक को बलि का बकरा बना दिया गया, लेकिन बैडमिंटन संघ की आपसी कलह के बाद अब संभावना बन रही है कि जब दोनों गुट आमने-सामने आ गए हैं तो देर सबेर पाप की गठरी कभी भी खुल सकती है।    

सहगल जहां, विवाद वहां
उत्‍तर प्रदेश बैडमिंटन संघ के कार्यकारी सचिव के पद से हटाए गए निशांत सिन्‍हा सीधा आरोप लगाते हैं कि पूरा मामला एकेडमी की जमीन के कामर्शियल उपयोग से रोकने के चलते दबाव में लेने के लिए यह पूरा खेल रचा गया है। अखबारों में हमलोगों के खिलाफ इतना कवरेज आईएएस अधिकारी नवनीत सहगल के चलते दिया जा रहा है। उन्‍होंने मेरी गिरफ्तारी कराने में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। दरअसल, बैडमिंटन एकेडमी और बैडमिंटन संघ में विवाद का सबसे बड़ा कारण एकेडमी की जमीन को माना जा रहा है, जिसके कामर्शियल इस्‍तेमाल की तैयारी की जा रही थी। इस पर अखिलेश दास के साथ उनके खासमखास साथी नवनीत सहगल की भी नजर थी। वैसे भी, नवनीत सहगल और विवादों में चोली-दामन का साथ है। सहगल जहां भी जाते हैं, भ्रष्‍टाचार और विवाद उनके पीछे-पीछे चुंबक की तरह खींचे चले आते हैं। सहगल की खूबी है कि सरकार चाहे जिसकी हो, हुकूमत वही चलाते हैं। कभी भाजपाई-बसपाई सरकार में लालजी टंडन के खासमखास रहे नवनीत सहगल के चलते ही भाई-बहन के प्‍यार में दरार पड़ गई, राखी बंधन बंद हो गया, लेकिन बाद में वही सहगल बहनजी के भी सबसे खास बन गए। बसपा के शासन में सहगल ने सपाइयों को जमकर पिटवाया, लेकिन सरकार बदली तो अखिलेश यादव के खासमखास बन गए। कहा जाता है कि कामर्स के विद्यार्थी रहे नवनीत सहगल पैसा को अपने उंगलियों पर नचाने की कला तो जानते ही हैं, कमाने और इस्‍तेमाल करने का भी ऐसा मंत्र जानते हैं, उतना कोई अन्‍य अधिकारी नहीं जानता, इसलिए सरकार चाहे किसी की भी हो उनकी पूछ हमेशा बनी रहती है। सहगल विरोधियों को ठिकाने लगाने के लिए साम, दाम, दंड, भेद सब चीजों का इस्‍तेमाल करते हैं। ज्‍यादा पीछे जाने की आवश्‍यकता नहीं है। सपा के प्रवक्‍ता रह चुके तथा वर्तमान एक विश्‍वविद्यालय के वीसी निशीथ राय के मामले से ज्‍यादा अच्‍छा उदाहरण भला क्‍या हो सकता है? एक अखबार के मालिक रहे निशीथ राय को नवनीत सहगल ने भ्रष्‍टाचार की खबरें छापने के कारण इतना परेशान और प्रताडि़त किया कि वह सहगल के समक्ष घुटने टेकने को मजबूर हो गए। नवनीत सहगल ने ना केवल उनका सरकारी आवास जबरिया खाली कराया बल्कि श्री राय के इलाहाबाद के घर पर भी कई थानों की पुलिस से छापेमारी करके उन पर लगातार दबाव बनवाया। उन्‍हें तमाम तरह से परेशान किया गया। थक-हार कर निशीथ राय नवनीत सहगल से समझौता करने को मजबूर हो गए। एनआरएचएम घोटाला हो, टोरेंट पॉवर मामला हो, कानपुर का पेयजल योजना हो, चीनी मिलों के बिक्री का मामला हो, आबकारी नीति में बदलाव का मामला हो, सहगल का नाम सभी मामलों में प्रत्‍यक्ष-अप्रत्‍यक्ष जुड़ता रहा। वह जिस भी विभाग में रहे भ्रष्‍टाचार और विवाद के छींटे उन पर पड़ते ही रहे, यह अलग बात रही कि उसकी आंच कभी उन तक नहीं पहुंच पाई। अभी आगरा-लखनऊ एक्‍सप्रेस-वे को लेकर वे विवादों में हैं। यह उनकी ही काबिलियत है कि जो सड़क केंद्र सरकार के अधीन 16 से 18 करोड़ प्रति किमी में बन जाती है, उनके अधीन वाली यूपीडा ने 30 से 32 करोड़ रुपए प्रति किमी के हिसाब से बनवाकर अपनी काबिलियत दिखाई है। कहा जाता है कि अगर नवनीत सहगल को लहरें गिनने का काम दे दिया जाए तो वह वहां से भी पैसा पैदा कर लेंगे। धर्माथ कार्य विभाग इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। जिस विभाग को प्रशानिक गलियारे में सजा वाला विभाग समझा जाता है, नवनीत सहगल ने वहां से भी पैसा पैदा करने का इंतजाम कर लिया था। यह तो भला हो काशी विश्‍वनाथ मंदिर के पुजारियों का, जिनके विरोध के बाद वह इस काम को अंजाम नहीं दे पाए। इतने विवादों और आरोपों के बावजूद नवनीत सहगल पर कभी सीधी आंच नहीं आई, क्‍योंकि वह किसी भी काम में हाथ आजमाने से पहले अपने बचाव के लिए मोहरे फिट करके रखते हैं। प्‍लान इतना फूलफ्रूफ होता है कि किसी भी मामले में आंच सीधे सहगल तक कभी नहीं आ पाती। फंसते मोहरे हैं। कहा जाता है कि वह विवादित परियोजनाओं के कागजातों पर हस्‍ताक्षर भी दबाव डालकर अपने जूनियर से कराते हैं ताकि अगर कोई मामला बने भी तो उसकी लपट अधीनस्‍थों तक ही बनी रहे।

लखनऊ की मैग्जीन ‘दृष्टांत’ में प्रकाशित खोजी पत्रकार अनिल सिंह की रिपोर्ट. संपर्क : 09984920990

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Comments on “अपनी पहुंच और ताकत की बदौलत अखिलेश दास गुप्‍ता भारतीय बैडमिंटन संघ के सचिव डा. विजय सिन्‍हा पर भारी पड़ गए

  • hariom yadav se paanch laakh vasool chuka hain . yah sakhs . is sakhs ka medis se koi vaasta nahi hain . maamooli sa institute chalaane waala yah sakhs raton raat karodhpati kaise ban gaya , koi bataane waala nahi hain , bataya ja raha hain zee main upar tak ladkiyan dilvaata tha .

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  • Raj Aryan says:

    BADE DUKH KE SAATH SUCH IT KARNA PAD RAHA HAI KI JIS DOST NE YEH LEKH LIKHA HAI USNE ROSHNI KA PRKARN SAMNE AANE PAR REQUEST KI THI KE KAISE BHI KAR KE MERI MATA PATNI OR BEHAN KA NAAM IS MAAMLA MAI NAHI AANA CHAHIYE TAB SHEHER KE PATRKARO NE AAPAS MAI BAAT KAR KE YEH BAAT CHUA LI THI PAR AB BATAYA JA RAHA HAI KI LEKH LIKE WALE DOST KI MAA BEHEN OR PATNI BHI IS SEX RACKET MAI SHAMIL THI KHABAR TO YAHAN TAK HAI KI IN LOGO KAI SARI ADHIKARUION KA BISTAR BHI GARAM KIYA THA AFSOS HAI KI BAAT CHUPI NA REH SAKI OR JALDI HI POLICE JAANCH MAI INKA NAAM SAB K SAAMNE AA JAYEGA……JAI HO ROSHNI JI KI…….

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  • Raj Aryan says:

    SUTRO SE GYYAT HUA HAI KI LEKH LIKHNE WALE PATRKAR SAATHI KI PATNI BAHUT SUNDAR HAI PURAV MAI AGRA MAI TAINAAT RAHE EK IPS. ADHIKARI KO BHI APNI SEVA DE CHUKI HAI OR APNI. PATNI KE BALBUTE YE PATRKAR JINHONE LEKH LIKHA HAI APNE KAI SARE KAAM NIKLWA CHUKE HAI..

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  • ye zee news me vinod mishra aur vasindra mishra ke hi chele hain. dono ko nai ladkiya khoob pasand hain tabi to sex reket chalane wale ko reporter bana diya. wah re haramkhoron zee ka naam dubo diya.

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  • ashu.jadon says:

    लड़कियां सप्लाई करना गुनाह है ? तो ऐसा जुर्म तो ऐसे सख्स बार बार करेंगे क्यों ये भी तो एक तरह से समाज सेवा है यही सोच ऐसे पत्रकारों को स्टार बनाती है

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  • prdhan mantri narendra modi ki pachh mai mahol bana kar modi ki sarkar banane wale zee news or uske patrakar se or kya umeed ke ja sakti hai kyoki dono ho apni kimat jante hai or agar kahi se achhi keemat milti hai to burai kya hai?

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  • इस व्यक्ति ने हमें भी बेबकूफ़ बनाया है ….ये बहुत बेकार व्यक्ति है ..इसे जेल जाना चाहिए

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  • आगरा शहर में इतने पत्रकार है हर बार नाम इसी का क्यों आता है ..क्यों की इसे कम समय में बहुत पैसा कमाने की भूंख है हमने कभी नहीं सोचा के ये व्यक्ति ऐसा भी कर सकता है रौशनी के कॉल डिटेल में इसका 300 बार फोन आया ..अब आप लोग ही बताइये ये आदमी कैसे निर्दोष हो सकता है . और सुनने में तो ये भी आया है कि इतना सब होने के वाबजूद ज़ी न्यूज़ ने इसे दोबारा रख लिया है ..हद हो गयी बेशर्मी की

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  • सब चोर है साले मुझे तो लगता है इसने अपने बॉस लोगो की कोई सीडी बना ली है किसी लड़की के साथ तभी तो इसे अभी तक निकाला नहीं गया ….सुनने में तो ये भी आया है की इसका चेला इसका भी गुरु निकला इस मामले में उसने ताजगंज में एक गुप्ता नाम के दलाल के साथ एक होटल में और अपने घर से कुछ दूर सेक्स रैकेट चलबा रहा है ….

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  • Ye to bahut bada firod hai sala isne bahut bachcho ke sath patrkaar banane ke naam par thagi ki hai ….kuch din pehle thana new agra par kuch sipahiyo ne ise buri tarah maara tha lekin sala bahut besharm hai ye …

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  • arun sharma says:

    Ha ha ha ha ab aaya oont pahad ke niche hamne bhi ise bahut dekha hai raat ko ladkiyo ke sath gulchharre udaate huye ….kisi aur se saboot ki jarurat nahi hai khud iski bibi ise range haath pakad chuki hai …. iski ayyashi ki list bahut lambi hai ….

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  • Iske jese logo ne patrkarita ko badnaam kar rakha hai ..sab logo ko Mil kar iska virodh karna chahiye …lekin Jo log iska samrthan kar rahe hai sayad unhe bhi koi lalach hoga

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  • राजकुमार शर्मा says:

    विवेक पाठक तो एक बानगी भर है इस पूरे गोरखधंधे की अन्यथा तो भ्रष्ट अधिकारियों और दलाल पत्रकारों के गठजोड़ तो आगरा में काफी लम्बे समय से विभिन्न चैनलों के लोगो के साथ सक्रिय है !
    !
    विवेक पाठक (जी संगम),शाहनवाज़ (स्टार न्यूज़) ,विवेक जैन,मनीष जैन ,देवेश शुक्ल (सी न्यूज़),गौरव (प्रिंट मीडिया में पंजाब केसरी से अवमुक्त)आदि आदि ऐसे नाम है जिन्होंने आगरा में दलाली प्रथा का गौरव बढाया है !वैसे जानकारी के लिए बता दें कि आगरा में इस व्यवस्था का जनक परवेज़ सागर को माना जाता है जिन्होंने अपने आगरा में आज तक चैनल के कार्यकाल में स्टार न्यूज़(शाहनवाज़),एन डी टी वी (नसीम) और स्वयं अपने गठजोड़ से सभी प्रशासनिक अधिकारिओं को काबू कर खूब माल बटोरा था ! वैसे इन सभी के चैनलों का प्रबंधन भी जानता है कि उनके स्ट्रिंगर आगरा में क्या गुल खिला रहे है लेकिन उनके आगरा आगमन पर इनकी सेवाओं का उपभोग कर तृप्त मस्त हो इन्हें और छूट दे जाता है खुली लूट की !

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  • Raj Aryan says:

    Sahi Hai 900 Chuhe Kha Kar BillI Haj Ko Chali Ab Zara Rajkumar Sharma JINHONE Comment Kiya Hai Unki Sune Apni Parvez Sagar Ne Inko PATRKAR Banane k Naam Par Inki PATNI se Khoon SEVA li hai Dalai Mai to Yeh Apni Behan ko Bhi Pel Aaye Abhi Abhi Parvez Sagar Se Baat Hui To Unhone Bataya Yeh Sab Or Kuch Aisa Bataya In ki PATNI KE Bare Mai jo Mai Post Nahi Kar Sakta Yahan Par….?

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  • Ye tatha kathit patrkar pahale bhi kai bar police ko moti rakam dila chuka hai .
    Jisme new agra pahale sthan pe hai . Agar police ne is patrkar ke madhyam se rishwat na li hoti to kai mujrim aj jail me hote .
    Adhikariyo se iski seting. Se sara shahar waqif hai , pata ni unhe kya suply karta tha ye.
    Jo ashu nam ka vyakti gayab hai kai patrkar sathi jante hain ki. Is kuch mahine pahale is zee sungam ke patrkar. Se kisi bat pe jhagda hua tha .
    Jis roshni nam ki mahila ka is prakran me nam aya hai . Us roshni se is patrakar ke kya samabndh the bo iska camerman tatha iske mitra bata sakte hain jo roshni ko bhabhi kah kar pukarte the .
    Ankit sethi jo spa ka malik hai . Us se is patrkar ke najdiki sambandh the
    Shriman purv S.P. Sahab ke liye ye patrkar. Tatha iska camera man. Rishwat ke liye madhyam ban chuke hain
    Iska cameraman pure shahar me. Zee news ki dhons jamata tha tatha pese ki ugahi karta tha .
    Ab iske bad police kya karyawahi karti hai ye ap sub samajh sakte hain tatha me umeed karta hun ki mere sabhi patrkar sathi is pure prakran ko samajh chuke honge or apni rai jarur denge .

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  • Sonpapadi prakran, hariom yadav prakran , zef chanel ke nam par farji seriel. Banane wala prkaran , thana new agra me ek teacher pe lage. Balatkar ke arop ka prakran tatha ese kai sare karnamo se pahale bhi. Kafi pesa kamaya hai isne

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  • धीरज भारद्वाज says:

    इस खबर से और कुछ हो या नहीं, स्ट्रिंगर साहब की दूसरे किसी नामचीन संस्थान में नौकरी पक्की हो गयी.
    ऐसे ‘काबिल पत्रकार’ की जरूरत भला किसे नहीं होगी?

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  • Are mitro ye little ponty chadda. Ka chela hai .
    Unki wajah se hi aj tak ye bachta aya hai is evej me ye unhe kya seva deta tha ap log samajh hi gaye honge

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  • singh sahab says:

    aaj roshni ke bayaan ho rahe hai ..saayad patrkaar mahodey is bayaan ke baad jail ki hawa kha sakte hai ..agr is mamle se ye bari ho gaye to shahar bhar me phir se inka tandav dekhne ko milega …phir manoj dhabe par inki gunda gardi dekhi jaygi ye bhar pet khana khaybge aur jab bechara betar paise mangega to usse jam kar peeta jayga … aur hamare sathi patrkaar inka khul kar samrthan karenge jaise aaj kar rahe hai … mahaan hai hamare shahar ke patrkaar bhi …chullu bhar paani me doob maro saalo

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  • Mitro is dalal. Urf. Patrkar ki jitni tareef ki jaye kam hai .pahale bhi ek muslim mahila se isne kisi mamale me police se samjhota karane ke liye pese le liye the fir kam na karane par jub us mahila me pese wapis mange to is ne us se sharirik sambandh banane le liye dawab dala jiski us mahila ne shikayat bhi ki thi mahila thane me . Tab bhi shriman sameer ji ne police karmchari ko phone kar ke karyawahi karne se mana kiya tha . Pata ni kis lalach me

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  • Ye harami khana bhi free me kha raha hai kamaal hai Bhai isne to neechta ki had hi kardi brahman ke naam par kalank hai ye admi isme jitne joote maare jaaye kam hai iske sarparsto ko ab bhi sharm nahi arahi

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  • Mujhe. To lagta hai isne apni biwi or bahan ko bhi kisi ke sath sula diya hoga tabhi sare adhikari is se khush rahate hain

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  • shiv sharma says:

    is haram khor ko channle se nikaal diya gaya hai iske wabjood ye kamina ab bhi logo me bhram vyakt kiye huye hai ke ye abhi bhi channle me hai ….dekhlo kitna makkar hai iski makkari ki daad deni padegi apne paapo ka paschtaap karne ki bajay sala ab bhi sajish kar raha hai … aur sunne me to ye bhi aaya hai ki roshni ne apne bayan me bataya hai ki ese ek raat ke ek ladki se 4 hajar rupey milte the … aur police ki saari jimmedaari bhi iski thi kai bar isne roshni aur uski ladkiyo ko police se pese lekar chhudaya hai ….. pandito ki to naak hi kaata di is haram khor ne

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  • Kya shahar me koi patrkar sangh esa ni hai jo. Is dalal ko jisne patrkarita ka balatkar kiya hai ise benaqab kar sake . Ise tatha iske cameraman ko gadhe pe bitha ke sare shahar me ghuma sake . Pata ni kyun abhi shahar ke taman patrkar ise bachane me lage hain . Kya un sab ko bhi isne apni biwi , bahan parosi hain . Ya un logo ki biwi , bahan . Ma ki bhi dalali bhi yahi pathak karta hain . Haram khoro kyun patrakarita ko badnam kar rahe ho

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  • Mitro kahin esa to ni zee walo ne sex racket ka naya dhanda khol liya ho . Vivek pathak. To sirf unka pyada bhar ho . Or sargana koi or hi ho

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