
बंगाल में महिला को प्रधानमंत्री आवास देने का फर्जी विज्ञापन याद है? प्रधानमंत्री आवास योजना में 9451 पदों पर भर्ती की फर्जी अधिसूचना के यूट्यूब वीडियो से छात्रों को भ्रमित किया गया। कहा गया, शिक्षक भर्ती घोटाला, कोयला व मवेशी तस्करी कांड के बाद अब बंगाल में प्रधानमंत्री आवास योजना में फर्जीवाड़ा सामने आया है। 17 लाख अयोग्यों को लाभार्थी सूची से हटाया गया। बंगाल के हर मामले की सीबीआई-ईडी जांच कराने वाली केंद्र सरकार ने बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि घोटाले में शामिल लोगों पर एफआईआर दर्ज करें। अभी तक किसी की गिरफ्तारी की बात तो दूर आगे क्या हुआ इसका पता नहीं चला। उत्तर प्रदेश से संबंधित खबर है, आवास योजना में भ्रष्टाचार की जांच पूरी, दूसरों के प्लॉट पर फोटो खिंचाए; रुपये अपने मकान में लगाए।
संजय कुमार सिंह
आज वायनाड में लोकसभा उपचुनाव के लिए मतदान है जहां से प्रियंका गांधी पहली बार लड़ रही हैं। इसके अलावा देश के 10 राज्यों की 31 विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव है। झारखंड में पहले दौर का मतदान है और 43 सीटों पर 683 उम्मीदवरों के भाग्य का फैसला होगा। इनमें हेमंत सोरेन के ‘रबड़ी’ भी हैं जिन्हें बेटे के साथ मलाई खाने का मौका राज्य में डबल इंजन की सरकार बनाने के लिए दिया गया है। आज ही केरल, पंजाब और उत्तर प्रदेश में विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान की घोषणा की गई थी पर बाद में इसे आगे बढ़ा दिया गया जो अब 20 नवंबर को होने हैं। आरोप है कि इससे भाजपा को बंटेंगे तो कटेंगे और एक हैं तो सेफ हैं करने वाले अपने स्टार प्रचारकों का भरपूर उपयोग करने के लिए पर्याप्त समय मिल गये है। जो लोग हाल तक आज के मतदान के लिए ‘काम’ कर रहे थे वे अब उत्तर प्रदेश और बाकी जगहों के लिए चुनाव प्रचार कर पायेंगे। झारखंड में भाजपा की सरकार नहीं है और डबल इंजन की सरकार बनाने के लिए और बातों के अलावा कुछ अतिरिक्त श्रम की जरूरत थी। इसके लिए घुसपैठ को भी मुद्दा बनाया गया। संवैधानिक पदों पर बैठे प्रचारकों ने सरकारी खर्चे पर यह प्रचार किया गया कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण झारखंड में आदिवासियों की आबादी कम हो जायेगी।
विपक्षी दलों ने अपने तरीके और क्षमता से इसका विरोध किया लेकिन इस आरोप को गंभीरता मिली कल झारखंड और बंगाल में ईडी के छापे से। आज अमर उजाला में टॉप पर और नवोदय टाइम्स में नीचे कहीं छपी खबर के अनुसार झारखंड मुक्ति मोर्चा ने कहा है कि यह गलत विमर्श स्थापित करने का प्रयास है। मतदान से ठीक एक दिन पहले इस कार्रवाई के राजनीतिक मायने नहीं हैं तो सरकार और ईडी को यह बताना चाहिये था कि छापे की कार्रवाई एक दिन पहले ही क्यों जरूरी थी। एक दिन बाद होती तो क्या बदल जाता या कल छापे में क्या मिला। वैसे भी छापे में क्या मिला से यह अंदाजा लग जाता है कि छापा कितना जरूरी था। पर छापे की खबर ही नहीं छपे तो यह समझना मुश्किल होता है कि खबर नहीं छपी या कुछ मिला नहीं। सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी अपनी ओर से झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठ को मुद्दा बनाना चाह रहे हैं तो आम नागरिकों को यह बताया जाना चाहिये था कि इसे रोकना केंद्र की भाजपा सरकार का ही काम था। अगर घुसपैठ हुई है तो सबसे पहले केंद्र की भाजपा सरकार जिम्मेदार है।
अमर उजाला में छपी खबर के अनुसार, बांग्लादेशी घुसपैठियों के मामले में झारखंड और बंगाल में छापे। इसके साथ अवैध घुसपैठ बना चुनावी मुद्दा बोल्ड फौन्ट में शीर्षक के साथ तीन कॉलम में पांच लाइन की एक खबर के रूप में छपी है। खबर के अनुसार पीएम मोदी ने सोरेन सरकार पर घुसपैठ को संरक्षण का आरोप लगाते हुए कहा इसके चलते आदिवासी बहुल राज्य में आबादी के स्वरूप में बदलाव हो रहा है। ऐसा होता तो अखबारों में पहले खबर छपी होती, लोगों को पता होता और सबसे बड़ी बात केंद्र सरकार को घुसपैठ रोकने के लिए सक्रिय होना पड़ता न कि चुनावी मुद्दा बनाकर। अब यह सब नहीं होता है। जैसा मैने कहा। छापे के साथ उसका विवरण होता तो पाठकों और नागरिकों को समझ आ जाता कि छापे की कार्रवाई विमर्श स्थापित करने के लिए की गई थी। यह अलग बात है कि यह सब उस इलाके के अखबार में छपे तो बात बनती और दिल्ली के अखबारों में है कि नहीं या कहां है उसका बहुत मतलब नहीं है।
खबर के अनुसार कल की छापामारी और तलाशी में तीन लोग गिरफ्तार हुए हैं हालांकि, ऐसी कार्रवाई आम आदमी की गिरफ्तारी के लिए नहीं बरामदगी के लिए की जाती है। खबर के अनुसार, आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि देर रात रोनी मंडल, संदीप चौधरी और पिंटू हलधर को पश्चिम बंगाल में गिरफ्तार किया गया। बताया जा रहा है कि कि ये बिचौलिये हैं। स्पष्ट है कि यह कार्रवाई के बाद की घोषणा या अधिकृत विवरण नहीं है और गिरफ्तार लोग बिचौलिये हैं, यह सूत्र ने नहीं कहा है – बताया जा रहा है। खबर का अंतिम वाक्य, ऐसा आरोप है कि घुसपैठ और तस्करी से आपराधिक आय अर्जित की गई। लेकिन बरामदगी में अचल संपत्ति के दस्तावेज (घुसपैठिये या उनसे प्राप्त बांग्लादेशी संपत्ति?), नकदी, आभूषण और आपत्तिजनक वस्तुएं बरामद की गई हैं। इसमें यह नहीं बताया गया है कि नकदी और आभूषण कितने के हैं, यह जरूरी होता है वरना कुछ हजार लाख तो घर में हो ही सकते हैं। अगर किसी के घर में अवैध तरीके से आये किसी बांग्लादेशी ने वहां की करेंसी छोड़ी हो या रह गई हो तो उसे भी बरामद करके मामला तो बनाया ही जा सकता है। कोई बड़ा नेता हो तो पीएमएलए का भी बन सकता है लेकिन उससे घुसपैठ साबित नहीं होगा और मामला कोर्ट में साबित होगा कि नहीं यह तो बाद की बात है ही। ऐसे समय में इस छापे मारी का मतलब अगर है तो चुनाव आयोग को समझना और समझाना चाहिये। खबर से तो समझ में नहीं आया।
हेडलाइन मैनेजमेंट और विमर्श के मुद्दे गढ़ने के साथ ईडी-सीबीआई के जरिये अगर कहानी लिखी जा रही हो तो उसे देखना भी चुनाव आयोग का काम है लेकिन वह तारीख तय करने में ही असफल और व्यस्त है तो यह सब कब और कैसे करेगा। ऐसे में आइये देखें प्रधानमंत्री और प्रचारक ने कल के चुनाव प्रचार में जो कहा वह कैसे छपा है। उदाहरण के लिए अमर उजाला की लीड का शीर्षक है, कांग्रेस का शाही परिवार मानता है शासन के लिए ही हुआ उसका जन्म। अखबार ने फ्लैग शीर्षक से बताया है कि यह परवान चढ़ते चुनाव प्रचार में पीएम मोदी के तीखे आरोपों में है और ….. एकता तोड़ना कांग्रेस का खेल है। पिछले चुनाव में आग लगाने वालों को कपड़ों से पहचानने का दावा करने वाले प्रधान सेवक की जानकारी या सूचना का आधार क्या होता है यह तो सबको समझ में आ चुका है और शायद इसीलिए राहुल गांधी ने जो कहा है वह भी यहां सिंगल कॉलम में ही सही, छपा है जो एक नई शुरुआत की तरह है। इसके अनुसार भाजपा व संघ संविधान को खत्म करने के लिए काम कर रहे हैं। इसके साथ दो कॉलम का शीर्षक है, पाकिस्तान की भाषा बोल रही कांग्रेस – यह अनुच्छेद 370 वापस करने की मांग पर है।
इसके मुकाबले नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है, महंगाई 14 महीने में सबसे ज्यादा। उपशीर्षक है, खुदरा मुद्रास्फीति अक्तूबर में बढ़कर 6.21% पर तथा यह आरबीआई के संतोषजनक स्तर से ज्यादा है। इसके साथ की एक खबर का शीर्षक है, सब्जियों, फलों, तेलों में महंगाई। साथ में छपी सिंगल कॉलम की एक और खबर का शीर्षक है, सेंसेक्स 821 अंक टूटा, निफ्टी 258 अंक गिरा। इससे निवेशकों की संपत्ति 5.29 लाख करोड़ रुपये घटी। हिन्दी के इन दो अखबारों की यह लीड अंग्रेजी के अखबारों की लीड से अलग है। हालांकि, आज इंडियन एक्सप्रेस की लीड मुद्रास्फीति बढ़ने की खबर है। मुख्य शीर्षक हिन्दी में इस तरह होगा, खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 14 महीने में सबसे ज्यादा हुई, अगले महीने दरों में कटौती की उम्मीद घटी। इसके साथ उपशीर्षक में बताया गया है, विनिर्माण, खनन और ऊर्जा की मदद से सितंबर में फैक्ट्री उत्पादन 3.1% बढ़ा जबकि अगस्त में यह 0.1% कम हुआ था। द टेलीग्राफ की आज की लीड का शीर्षक है, मणिपुर हत्याकांड के बाद शिविर से छह लापता। आप जानते हैं कि कल मणिपुर में सुरक्षा बलों की गोली से मारे गये 10 लोगों को उग्रवादी कहा गया था। द टेलीग्राफ में इस खबर के शीर्षक में उग्रवादी इनवर्टेड कॉमा में था। आज का शीर्षक गौरतलब है, ‘हत्याकांड के बाद’, शिविर से छह लापता।
हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड का शीर्षक है, “आज झारखंड में मतदान से चुनावी चक्र शुरू होता है”। इसके साथ तीन कॉलम की खबर का शीर्षक है, “नरेन्द्र मोदी ने कहा, सीएम कौन बनेगा के सवाल पर एमवीए अंदरूनी कलह से जूझ रहा है”। दि एशियन एज की लीड का शीर्षक है, “कांग्रेस आदिवासियों को कमजोर करने के लिए उन्हें बांटना चाहती है : प्रधानमंत्री”। टाइम्स ऑफ इंडिया और द हिन्दू में प्रधानमंत्री के चुनाव प्रचार की ऐसी खबर पहले पन्ने पर नहीं है। हालांकि, ऐसी खबर इंडियन एक्सप्रेस और द टेलीग्राफ में भी लीड नहीं है। इस तरह इन अखबारों ने अगर प्रधानमंत्री के फूहड़ चुनावी प्रचार और झूठे आरोपों को पहले पन्ने पर जगह नहीं दी तो यह भी तथ्य है कि इंडियन एक्सप्रेस में आज पहले पन्ने पर प्रकाशित एक खबर के अनुसार, ग्रामीण आवास योजना के तहत 2024-25 में एक तिहाई हिस्सा चुनावी राज्यों – महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ को मिला है। आप जानते हैं कि विपक्ष की सरकार अगर जनता को कुछ मुफ्त में देना चाहे तो प्रधानमंत्री उसे रेवड़ी कहते हैं और खुद के शासन में सरकारी योजनाएं उन राज्यों में प्रभावी हैं जहां उपचुनाव होने हैं।
यहां यह बताना दिलचस्प होगा कि पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव के समय अखबारों में विज्ञापन छपा था कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 24 लाख घर बांटे गये हैं। इसमें एक महिला को यह कहते हुए दिखाया गया था कि उसे छत मिल गई है और उसके जैसे कई लोग लाभान्वित हुए हैं। न्यूजलौन्ड्री ने विज्ञापन वाली महिला को ढूंढ़ा, उसके घर गई और सवालों के जवाब में उसने कैमरे पर स्वीकार किया कि उसे पता भी नहीं था कि उसके नाम पर सरकारी घर आवंटित होने का विज्ञापन छपा है और उसे कोई सरकारी घर मिला है। महिला को यह भी पता नहीं था कि उसकी फोटो कहां, कब ली गई और उसने साफ कहा कि विज्ञापन में दिखाया गया घर उसका नहीं है (उसे नहीं मिला है) और उसने कहा कि घर होता तो हम झोपड़ी में रहते? महिला जिस झोपड़ी में रह रही थी वह भी उसका नहीं था और 500 रुपये महीने के किराये पर था। उसने साफ कहा कि विज्ञापन में जो छपा है वह झूठी बात है। यही नहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना में 9451 पदों पर भर्ती की फर्जी अधिसूचना के यूट्यूब वीडियो से छात्रों को भ्रमित किया गया। यही नहीं, दैनिक जागरण की एक खबर के अनुसार, शिक्षक भर्ती घोटाला, कोयला व मवेशी तस्करी कांड के बाद अब बंगाल में प्रधानमंत्री आवास योजना में फर्जीवाड़ा सामने आया है। अक्तूबर 2023 की एक खबर के अनुसार केंद्र सरकार ने बंगाल में इस मद के फंड की बर्बादी रोक दी और पीएम आवास के तहत 17 लाख अयोग्यों को लाभार्थी सूची से हटाया गया। ऐसे ही घोटाले की खबर उत्तर प्रदेश से भी थी। एक खबर के अनुसार, 27 अपात्रों को लाभ दिया गया उनके खाते में 10.80 लाख रुपये भेजे गये और इसकी पूरी वसूली नहीं हो पाई थी। उत्तर प्रदेश डबल इंजन वाला राज्य है लेकिन पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री के ना खाउंगा ना खाने दूंगा के बावजूद घोटाला हुआ। बंगाल के हर मामले की सीबीआई से जांच कराने वाली केंद्र सरकार ने इसकी जांच सीबीआई से नहीं कराई बल्कि बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि घोटाले में शामिल लोगों पर एफआईआर दर्ज करें। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर कहा कि केंद्र योजना के लिए बंगाल को धन जारी नहीं कर रहा है। जवाब में भाजपा ने टीएमसी पर धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया पर जांच और जांच के आदेश का पता नहीं चला, किसी की गिरफ्तारी की बात तो दूर है। बंगाल में क्या हुआ इसका पता तो नहीं चला, उत्तर प्रदेश से संबंधित जागरण की खबर है, आवास योजना में भ्रष्टाचार की जांच पूरी, दूसरों के प्लॉट पर फोटो खिंचाए; रुपये अपने मकान में लगाए।
सरकारी आवास योजना से संबंधित इन खबरों से पता चल रहा है कि केंद्र सरकार कैसे काम कर रही है और उसकी योजनाओं का क्या हाल है। ऐसी सरकार के मुखिया ने, “ना खाउंगा का ना खाने दूंगा” की बहुप्रचारित घोषणा की थी और विपक्षी सरकारों को परेशान करती रही है और यह तब किया जाता है जब सरकार गिराई नहीं जा पाती है। अपनी इस अयोग्यताओं, अक्षमताओं, वीरताओं और खुलासों के बावजूद भाजपा और संघ परिवार के आम नेताओं को तो छोड़िये प्रधानमंत्री खुद, “एक हैं तो सेफ हैं” जैसे नारे लगाते हैं जिसका मतलब यह लगाया और बताया गया है कि वे अपनी सुरक्षा यानी पद पर बने रहने के लिए यह सब कर रहे हैं। इसमें मदद के लिए कई संवैधानिक संस्थान अपना काम ठीक से नहीं कर रहे हैं। अखबार इनसे अलग भले हों ज्यादातर सरकार की सेवा में एक लगते हैं। ऐसे में आइये आज प्रधानमंत्री के चुनाव प्रचार की कुछ बातें जो अखबारों में खबर की तरह छपी हैं उन्हें भी देख लें। क्योंकि आज की राजनीतिक खबरों में सबसे महत्वपूर्ण औऱ दिलचस्प है अजीत पवार का खुलासा। उन्होंने कहा है और आज अखबारों में छपा है, पांच साल पहले भाजपा-एनसीपी वार्ता में अदाणी, शरद पवार, शाह और प्रफुल पटेल शामिल थे। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह खबर तीन कॉलम में है। दि एशियन एज ने तीन कॉलम में अमित शाह का कहा छापा है, घुसपैठिये ट्रेन में भरकर बांग्लादेश भेजे जायेंगे। इसके नीचे पांच कॉलम की खबर है, गोलीबारी के एक दिन बाद मणिपुर में तनाव बढ़ गया है। दूसरी ओर, हेमंत सोरेन ने भाजपा और उनके खिलाफ प्रचार को लेकर कई आरोप लगाये हैं और जवाब दिये हैं पर वह सब अखबारों के पहले पन्ने पर नजर नहीं आता है।


