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पत्रिका में उठापटक का दौर : ज्ञानेश उपाध्याय, उपेंद्र शर्मा, संतोष खाचरियवास, अमित वाजपेयी के बारे में सूचनाएं

राजस्थान पत्रिका में इन दिनों जोरदार उठापटक का दौर है। दौलत सिंह चौहान को पत्रिका जयपुर का संपादक बनाए जाने के ठीक पहले के ये हालात हैं। करीब आठ महीने पहले ही अजमेर के स्थानीय संपादक बनकर आए बिहार मूल के ज्ञानेश उपाध्याय यहां अपने पैर जमा भी नहीं पाए थे कि उन्हें जोधपुर का स्थानीय संपादक बनाकर भेज दिया गया। उनकी जगह जयपुर से भीलवाड़ा मूल के उपेन्द्र शर्मा को अजमेर का स्थानीय संपादक बनाया गया है।

राजस्थान पत्रिका में इन दिनों जोरदार उठापटक का दौर है। दौलत सिंह चौहान को पत्रिका जयपुर का संपादक बनाए जाने के ठीक पहले के ये हालात हैं। करीब आठ महीने पहले ही अजमेर के स्थानीय संपादक बनकर आए बिहार मूल के ज्ञानेश उपाध्याय यहां अपने पैर जमा भी नहीं पाए थे कि उन्हें जोधपुर का स्थानीय संपादक बनाकर भेज दिया गया। उनकी जगह जयपुर से भीलवाड़ा मूल के उपेन्द्र शर्मा को अजमेर का स्थानीय संपादक बनाया गया है।

पिछले दस सालों से अजमेर में उप संपादक संतोष खाचरियावास को जयपुर में नए बन रहे डिजिट्लाइज संस्करण में तबादला कर दिया गया है। कोटा के स्थानीय संपादक अमित वाजपेयी को भी जयपुर में फिर से बन रहे स्टेट ब्यूरो में जिम्मेदार पद पर लगा दिया गया है। खबर है कि अभी कई संस्करणों में काफी फेरबदल होने वाले हैं। पांच सात सालों से एक ही जगह जमे लोगों की सूची तैयार हो चुकी है। मजीठिया से निजात पाने की जुगत का शायद एक तरीका हो।

राजस्थान से राजेंद्र हाड़ा की रिपोर्ट. संपर्क: [email protected]

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2 Comments

2 Comments

  1. prem.mishra

    December 20, 2014 at 9:32 am

    rajendra ji rajasthan me uthapatak ho rahi hai, lekin mp patrika me, khaskar jabalpur patrika me sannata pasra hai. yahan majithiya ka chakker nahi hai kya.

  2. ram

    December 20, 2014 at 7:14 pm

    राजेंद्र जी आधी-अधूरी जानकारी क्यों दे रहे हो, जिस जगह पर चीफ साहब जैसे महान लोग संपादक हुआ करते थे, आज वहां उपेंद्र शर्मा जैसे नाबालिग पत्रकार को संपादक बना दिया गया है। अब आप की अंदाजा लगा लो कि वहां पर क्या हालात होंगे। लगता है संस्थान में उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों की अकल का दिवाला निकल गया।
    दौलतसिंह का तो क्या कहे जिसने पहले जोधपुर और फिर अजमेर में अखबार का भट्टा बैठा दिया। अब उसे ही जयपुर की कमान दी है तो आप ही सोच लो वहां भी पत्रिका के क्या हाल होने वाले हैं।

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