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मंत्री हरदीप सिंह पुरी को एप्सटीन ने “Bastard” क्यों कहा था?

सौमित्र राय-

मैंने कुछ दिन पहले लिखा था कि एक हरदीप पुरी को हटाया तो पूरी मोदी सत्ता एक झटके में गिर जाएगी। आज पवन खेड़ा ने भेद खोल दिया।

हरदीप पुरी असल में 1977–79 का वह मोरारजी देसाई है, जिसने पाकिस्तान को हमारे खुफिया राज़ बेचे थे। अब यही हरदीप पुरी चैनलों में घूम–घूमकर सफाई दे रहा है।

वहीं, बीजेपी ने बदनामी से बचने के लिए सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स को लाखों रुपए दिए हैं। हरदीप पुरी को भी निशाने एप्सटीन मिलना चाहिए। गद्दारी का सम्मान।

साथ में सरेंडर नरेंदर को भी ले जाए अपने साथ एप्सटीन की बदनाम गुफ़ा में।

पवन खेड़ा को सुनिएhttps://www.facebook.com/share/v/1E73jhUvHS/?mibextid=wwXIfr


पुष्प रंजन-

मंत्री हरदीप सिंह पुरी को, एप्सटीन ने “दोगला” Bastard क्यों कहा था? ये तो सिखों और पूरे भारत का अपमान था. और सरकार ने चुप्पी साध ली?

पुरी जी, देश को सच बता दो. तू इधर-उधर की न बात कर. बता दो, कि किस वास्ते कमसिन लड़कियों के अंतरराष्ट्रीय दलाल से मिलने गए थे? हरदीप सिंह पुरी ने राहुल गांधी के एपस्टीन वाले आरोप को खारिज किया: ” क्राइम से कोई लेना-देना नहीं’ केंद्रीय पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्री का कहना है कि वह उस बदनाम फाइनेंसर से आठ साल में तीन या “ज़्यादा से ज़्यादा चार बार” मिले, जिसे पीडोफिलिया (बच्चियों का यौन शोषण) के आरोप में दोषी ठहराया गया था, जिसने जेल में सुसाइड कर लिया था।” पुरी बोले, ‘एप्सटीन से मैं सिर्फ़ “काम के लिए” मिला था।’

अब मंत्री मान ले, कि कमसिन टीन-एजर्स के सप्लायर से एक बार-दो बार नहीं, चार बार मिला था, तो जान लेते हैं इनका भी पक्ष-

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “मुझे इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट में शामिल होने के लिए बुलाया गया था।” “मेरी बातचीत प्रोफेशनल थी और इंडिपेंडेंट कमीशन ऑन मल्टीलेटरलिज़्म से जुड़ी थी, जिसके चेयर ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री थे, और मैंने सेक्रेटरी-जनरल के तौर पर काम किया। IPI में मेरे बॉस, मिस्टर तेर्जे लार्सन, एपस्टीन को जानते थे, और मैं एपस्टीन से सिर्फ़ UN से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने वाले एक डेलीगेशन के हिस्से के तौर पर मिला था। मैं लिंक्डइन के फाउंडर रीड हॉफमैन से भी मिला, लेकिन सिर्फ़ भारत के इंटरनेट और बिज़नेस के मौकों पर प्रोफेशनल चर्चा के सिलसिले में।

उन्होंने कहा, “इसका किसी गलत काम से कोई लेना-देना नहीं था… मैं एक दूर की सोचने वाला प्राइवेट नागरिक था जो भारत के मौकों के बारे में जानकारी दे रहा था। एपस्टीन की क्रिमिनल एक्टिविटीज़ से मुझे जोड़ने वाले कोई भी दावे बेबुनियाद हैं। सिर्फ़ असली ईमेल में भारत की इकॉनमी और इंटरनेट-बेस्ड मौकों के बारे में प्रोफेशनल सलाह शामिल थी।”

पूरी ने कहा, “मुझे एपस्टीन की एक्टिविटीज़ में कोई इंटरेस्ट नहीं था। उनके लिए, मैं ‘सही इंसान’ नहीं था,” उन्होंने आगे कहा कि एपस्टीन ने उन्हें ईमेल में “दोगला” Bastard कहा था और राहुल को वह लेटर पढ़ना चाहिए। पुरी ने कहा कि कांग्रेस लीडर खुलासे के नेचर को गलत तरीके से बता रहे हैं। इससे पहले, गांधी के बजट भाषण के जवाब में, पुरी ने उन पर “बेबुनियाद आरोप” लगाने और हाउस से वॉकआउट करने का आरोप लगाया था।

अब सोचिये, “UN से जुड़े मसलों पर” उस आदमी से वार्ता हो रही थी, जो डिप्लोमेटिक सर्किल का घोषित भड़वा था. समझा जा सकता है, ये देश कैसे चला रहे हैं. क्या भड़वों के सहयोग से देश की डिप्लोमेसी में मदद ली जा रही थी? अटल जी में लाख कमज़ोरी थी, लेकिन वो यहाँ तक नहीं गिरे।


कुणाल शुक्ला-

जरा इन दस्तावेजों को ध्यान से देखिए.. इस सबके बाद तो हरदीप सिंह पुरी इस्तीफ़ा देना ही चाहिए। बाप एप्स्टीन को डिजिटल इंडिया समझा रहा था और बेटी एपस्टीन के आदमी के माध्यम से करोड़ों का फंड ले रही थी..

तो क्या हरदीप सिंह पुरी की बेटी एपस्टीन के करीबी रहे रॉबर्ट मिलर्ड की बिज़नेस पार्टनर है? यह वही रॉबर्ट मिलर्ड है जो कि जोई इटो के साथ MIT में था।और ये दोनों ही एपस्टीन के करीबी गुर्गे रहे हैं।

हरदीप सिंह पुरी 2013 में आईएफएस अधिकारी के पद से रिटायर होता है और 2014 में उसकी बेटी हिमायनी पुरी की कंपनी Realm Partners LLC को 30 इंवेस्टर 2400 करोड़ रुपये का फंड दे देते हैं।

हरदीप सिंह पुरी की लड़की हिमायनी पुरी ने ऐसा क्या जादू कर दिया की उसे 28 करोड़ डॉलर याने की 2400 करोड़ रुपए का फंड मिल गया? 2014 से लेकर 2015 तक कुल 5700 करोड़ रुपये की भारी भरकम रकम हिमायनी पुरी जुटा लेती है।यह कैसे हुआ?

हिमायनी पुरी ऐसी कौन सी हस्ती है जो उसे Realm Partners LLC में पार्टनर रख लिया गया?वह रॉबर्ट मिलर्ड से किसकी मदद और एप्रोच से मिली? इसका जवाब स्वयं हरदीप सिंह पुरी को देना चाहिए।

सबसे मजे की बात तो यह की की हिमायनी पुरी की कंपनी उसी केमेन आइलैंड में रजिस्टर्ड है जो टैक्स हेवन और शैल कंपनियों का जन्नत कहलाता है।

बड़ा सवाल,क्या हिमायनी की कंपनी को जॉर्ज सोरोस से भी फंडिंग मिली है? और क्या हरदीप सिंह पुरी उन 30 आदमियों का नाम बतायेंगे जिनसे हिमायनी पुरी को फंडिंग मिली थी?

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