यशवंत सिंह-
उपराष्ट्रपति पद के लिए योग्यतम दावेदार तो हरिवंश जी ही हैं! बेदाग पत्रकारीय करियर, सहज सरल व्यक्तित्व, सादगी वाली जीवनशैली, विनम्रता और ईमानदारी की प्रतिमूर्ति! और… ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर!!!
कौन हैं हरिवंश!
हरिवंश नारायण सिंह का जन्म 30 जून 1956 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सिताबदियारा गांव में हुआ, जो स्वतंत्रता सेनानी जयप्रकाश नारायण की जन्मभूमि भी है। उनके पिता बांके बिहारी सिंह गांव के प्रधान थे, जिनका अनुशासन हरिवंश के जीवन पर गहरा प्रभाव छोड़ गया।

उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से स्नातक, अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। पत्रकारिता में उनका करियर टाइम्स ऑफ इंडिया समूह से ट्रेनी के रूप में शुरू हुआ, फिर ‘धर्मयुग’ (1977–1981) में उप-संपादक के रूप में कार्य किया, जहां उन्हें धर्मवीर भारती जैसे दिग्गजों के सान्निध्य में काम करने का अवसर मिला।
बाद में वह ‘रविवार’ पत्रिका से जुड़े और बिहार-झारखंड में ग्रासरूट रिपोर्टिंग की। 1989 में वह ‘प्रभात खबर’ के प्रधान संपादक बने और इस अख़बार को ईमानदार पत्रकारिता का प्रतीक बना दिया।
1990 में प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने उन्हें अपने सूचना सलाहकार (संयुक्त सचिव) के रूप में पीएमओ में बुलाया। चंद्रशेखर के पद छोड़ते ही हरिवंश ने इस्तीफा देकर पत्रकारिता में वापसी की।
अप्रैल 2014 में जनता दल (यू) की ओर से राज्यसभा सदस्य बने। 9 अगस्त 2018 को पहली बार राज्यसभा के उपसभापति निर्वाचित हुए और सितंबर 2020 में दोबारा इस पद पर चुने गए।
उन्हें 1996 में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी पत्रकारिता सम्मान, 2008 में माधव राव सप्रे पुरस्कार और 2012 में विश्व हिंदी सम्मेलन (जोहांसबर्ग) में हिंदी सेवा हेतु सम्मानित किया गया।
हरिवंश ने कई किताबें सम्पादित की और लिखीं, जिनमें मेरी जेल डायरी (भाग 1 व 2), चंद्रशेखर संवाद शृंखला और 2019 में प्रकाशित Chandrashekhar: The Last Icon of Ideological Politics प्रमुख हैं।


