डॉ अरविंद मिश्रा-
कभी कभी ऐसी भयानक कुदरती घटनायें अप्रत्याशित तौर पर घट जाती हैं जिनका तनिक भी अंदेशा नहीं होता। सहसा ही उन्हें झेलने को हम मजबूर हो जाते हैं बिना किसी तैयारी और बचाव के उपायों के। मतलब, प्रकृति से हम पार नहीं पा सकते – वह सहसा ही हमें बेबस कर देती है। अब जैसे अभी इथोपिया के ज्वालामुखी के विस्फोट ने भारतीय उप महाद्वीप के आकाश को आच्छादित कर दिया और हम बेबस देखते रहे।
इथियोपिया के हेली गुब्बी (Hayli Gubbi) ज्वालामुखी विस्फोट की राख देखते देखते भारतीय उपमहाद्वीप तक आ पहुंची। और अब चीन की ओर रुख कर रही है। यह उड़ते विमानों की ऊंचाई की सीमा तक यानि 45 हजार फीट तक भी जा पहुंची। इतवार के विस्फोट के बाद राख कल 24 नवंबर, सोमवार रात करीब 11 बजे दिल्ली-NCR तक आ पहुंची । अनेक विमानों की उड़ान रोकी गई। जो पहले से ही आसमान में थे उनका रुट डाईवर्जन कर दिया गया। यात्रियों को यात्रारंभ करते समय आने वाली आफत का कहां पता था।
मौसम विभाग इस घटना पर बारीकी से नजर रख रहा है। हेली गुब्बी लंबे समय से शांत था। रविवार (23 नवंबर) को यह फट पड़ा। यह विगत 10,000 सालों में पहली बार फटा है। इसकी राख में सल्फर डाइऑक्साइड की बड़ी मात्रा है जिसका एक मोटा गुबार आसमान में ऊपर छा गया है। दिल्ली एनसीआर ही नहीं उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में यह गुबार फैलता गया है। इससे राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और पंजाब में भी आकाशीय विजिबिलिटी कम हो गई और एयर ट्रैफिक प्रभावित हुआ है।
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन के अनुसार एयरलाइंस और एयरपोर्ट को एक एडवाइजरी भेजी गई थी जिसमें उन्हें ज्वालामुखी की राख से होने वाली ऑपरेशनल चुनौतियों के बारे में आगाह किया गया था. रेगुलेटर ने ऑपरेटरों से अलर्ट रहने, रियल-टाइम अपडेट पर नजर रखने और हालात बदलने पर जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाने को कहा है। एअर इंडिया, अकासा एयर, इंडिगो ने कई ऑपरेशन कैंसिल किये, कुछ के रूट और शेड्यूल बदल दिये । राहत की बात है कि आज शाम (25 नवंबर) को यह धुंध भारतीय नभ क्षेत्र को पीछे छोड़ते हुये चीन में दाखिल हो जायेगी।
ज्वालामुखियों के भयानक विस्फोटों में सुमात्रा – इंडोनेशिया के टोबा नामक ज्वालामुखी का नाम पहले नंबर पर दर्ज है जो चौहत्तर वर्ष पहले फटा था और भारत इसकी जद में बुरी तरह आ गया था। वोल्कैनिक इक्सप्लोजिविटी इंडेक्स पर यह 8 नंबर का था और इस तरह पृथ्वी के इतिहास में सबसे भयानक ज्वालामुखी विस्फोट के रुप में दर्ज है। इससे उड़ी राख ने पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर पांच सेमी मोटी परत चढा दी थी। अध्ययन बताते हैं कि मानव इतिहास के सबसे बड़े जनहानियों में टोबा विस्फोट था। मनुष्य ही नहीं, कई कपि मानव प्रजातियां जैसे चिंपाजी, ओरंगुटान, गोरिल्ला भी बड़ी तादाद में मारे गए थे।
मनुष्य अपने कारनामों से अनेक संकट उत्पन्न कर रहा है जैसे तरह तरह के प्रदूषण मानव जनित ही हैं। वह प्रकृति पर भी निरंतर कुठाराघात कर रहा है मगर जब प्रकृति बदला लेती है तो फिर उसके सामने रक्षा का कोई उपाय नहीं रहता। उसे आने वाले संकट का पूर्वाभास तक नहीं रहता। बच निकलने का न मौका।
हेली गुब्बी और टोबा के विस्फोट हमें मानव की निरीहता का ही संदेश देते हैं। यह अहसास कराते हैं कि अपनी तमाम उपलब्धियों के बावजूद, हे मानव तुम आज भी प्रकृति के सामने एक तुच्छ प्राणी ही हो। जानकारी के लिए बताता चलूं कि टोबा ज्वालामुखी आज भी स्पंदित है, बस सुषुप्त है। किसी भी समय फट सकता है।
चित्र में हेली गुब्बी विस्फोट के गुबार का नभ मार्ग दिखाया गया है जिसमें उत्तर भारत के ऊपर के नभ क्षेत्र को देखा जा सकता है।




RAGHAVENDRA
November 25, 2025 at 4:36 pm
YE VOLCANO MODI KI WAJAH SE FATA….YE SAB KUDRATI KEHER MODI KI WAJAH SE HAI…..GAAND ME YA TATTON ME KHUJLI HONA BHI MODI KI WAJAH SE HI HOTA HAI…SUBAH PATLI TATTI AANA BHI MODI KI DEN HAI….