
न्यायपालिका पर कब्जा जमाने की खुली कोशिशों के बीच आज दि एशियन एज और हिन्दुस्तान टाइम्स में खबरें है। विमानन क्षेत्र की ढेरों खबरों से मंत्री लापता, प्रधानमंत्री जी-7 में पर ट्रम्प अमेरिका रवाना जैसे तथ्य मेरे आठ अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं हैं लेकिन औपचारिकता के लिए ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं पर जोर देने का प्रचार कइयों में है।
संजय कुमार सिंह
न्यायपालिका पर कब्जे की सरकार की कोशिश के मामले में इंडियन एक्सप्रेस के बाद आज दि एशियन एज ने खबर छापी है। आप जानते हैं कि सरकार दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई शुरू करना चाहती है जबकि इसके लिए कोई सबूत नहीं है। कपिल सिबल ने यह भी कहा है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज न्यायमूर्ति शेखर यादव के खिलाफ उनकी कथित सांप्रदायिक टिप्पणी के लिए महाभियोग की कार्रवाई के लिये विपक्ष के प्रस्ताव पर सरकार ने कुछ नहीं किया है। इस तरह, सरकार न्यायमूर्ति शेखर यादव को तो बचाना चाहती है पर न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग लाने की जल्दी में हैं। देश में इससे पहले के जो दो मामले हुए हैं उनसे करीबी से जुड़े रहे कपिल सिबल का कहा कल इंडियन एक्सप्रेस में छपा था। आज दि एशियन एज में है। हिन्दुस्तान टाइम्स की एक खबर के अनुसार दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश से कहा था कि ‘अनुचित’ प्रक्रिया के कारण वे इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा है कि उन्हें उचित सुनवाई का मौका नहीं मिला। कपिल सिबल ने जो कहा है उसपर आने से पहले बता दूं कि कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व जज, जस्टिस अभिजीत गांगुली भाजपा के सांसद बन चुके हैं और भाजपा सरकार से अन्य ईनाम पाने वाले जजों की संख्या कम नहीं है। एक जज की संदिग्ध मौत और उसकी जांच नहीं होने देने का भी मामला भी है। पर अभिजीत गांगुली का मामला सबसे बेशर्म और खुल्लम-खुल्ला है। तृणमूल सांसद शायोनी घोष ने उनका नाम लिये बगैर कहा था, …. गोमूत्र से कुल्ला करके फैसला सुनाते थे। ऐसे में कपिल सिबल का विरोध सही और जरूरी है। कल उनका कहा सिर्फ इंडियन एक्सप्रेस में था आज सिर्फ दि एशियन एज में है। इसका शीर्षक है, महाभियोग लाने की सरकार की कोशिश न्यायपालिका पर नियंत्रण के लिए, सिबल का दावा। उपशीर्षक है, केंद्र न्यायमूर्ति वर्मा को निशाना बना रहा है ताकि कॉलेजियम की व्यवस्था को खत्म किया जा सके।
खबर के अनुसार, सिबल ने कहा है कि सरकार कॉलेजियम सिस्टम को खत्म करके नेशनल जूडिशियन अप्वायंटमेंट्स कमीशन बनाना चाहती है। उल्लेखनीय है कि जेडीयू नेता संजय झा की बेटियों को सरकारी वकील बनाये जाने पर विवाद चल रहा है और यह बिहार में चुनाव से पहले एनडीए नेताओं के उपकार का मामला लग रहा है। राष्ट्रीय जनता दल ने पूछा है कि बिना अनुभव एंट्री कैसे मिली। पिछड़ों के अधिकारों के हनन का आरोप भी है। यही नहीं, चिराग पासवान के बहनोई और जीतनराम मांझी के दामाद को पद मिलने के बाद उन्होंने जमाई आयोग बनाने की बात भी कही है। ये चार पद अगर प्रतिभा के आधार पर नहीं दिये गये हैं तो इनसे दलितों, पिछड़ों और अति पिछड़ों के अधिकार मारे जा रहे हैं। इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने केंद्र सरकार के आदेश की कॉपी ट्वीट कर उसपर निशाना साधा था। प्रधानमंत्री कह चुके हैं कि कांग्रेस की सरकार तुष्टीकरण करती थी और उनकी सरकार संतुष्टीकरण करती है। इन नियुक्तियों को आप चाहे जैसे देखिये, स्पष्ट है कि बिहार चुनाव से पहले किये जाने का मकसद है और चुनाव आयोग सरकार के नियंत्रण में नहीं होता तो देखता कि यह मामला चुनाव के लिये सभी दलों को लेवल प्लेइंग फील्ड मुहैया कराने में रोड़ा तो नहीं है। सुप्रीम कोर्ट स्वतंत्रता पूर्वक काम कर पाता, सही सरकारी वकील और दूसरे मामलों का बोझ व दबाव नहीं होता तो मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति का मामला भी निपट गया होता। तब चुनाव आयोग से निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद की जा सकती थी। लेकिन इसे और कई अन्य मामलों में सरकार के पक्ष में फैसले के लिए न्यायपालिका पर नियंत्रण जरूरी है और सरकार के काम उस दिशा में लग रहे हैं पर खबर नहीं छपी तो सिबल बोल रहे हैं और वह कभी-कभी, यहां वहां छप रहा है।
इसके बावजूद इस मामले में किसी और मीडिया संस्थान ने उनसे बात नहीं की और यह सब पाठकों को नहीं बताया है। मीडिया संस्थानों के लिए यह मुद्दा नहीं है वह अलग चिन्ता का विषय है। मीडिया पर सरकार के नियंत्रण का मुद्दा तो है ही। आज इंडियन एक्सप्रेस की लीड का शीर्षक है, ट्रम्प के कदम रखने से तेहरान खाली होना शुरू, बिना शर्त समर्पण की मांग। सेकेंड लीड प्रधानमंत्री की खबर है, (जी7) सम्मेलन में नेताओं से मिलेंगे, कहा ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं पर जोर देंगे। यह खबर इस तथ्य के बावजूद या बगैर है कि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा है (देशबन्धु), प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 11 साल के दौरान कई बैठकों में हिस्सा ले चुके हैं, देश को कोई लाभ होता तो दिखता नहीं है। अमर उजाला में छह कॉलम की लीड का शीर्षक है, इस्राइल-ईरान संघर्ष में कूदा अमेरिका, ट्रम्प बोले – ईरान के पूरे आसमान पर हमारा कब्जा, बिना शर्ते करे सरेंडर। छह कॉलम में दो लाइन के इस शीर्षक में अमेरिका की तारीफ तो है ही। बिना कहे यह भी बताया गया है कि ट्रम्प का सरेंडर अभियान भारत-पाकिस्तान तक सीमित नहीं है। इस खबर को मजबूती देने के लिए उत्तर प्रदेश में लोकप्रिय हिन्दी के इस अखबार की एक और खबर का शीर्षक है, पाकिस्तान के सेना प्रमुख मुनीर का अमेरिका में विरोध, अपनों ने ही कहा कातिल और भगोड़ा। अखबार के पहले पन्ने की खबरों में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का यह बयान नहीं है कि जनगणना की अधिसूचना में जाति जनगणना का जिक्र नहीं है। इसे लेकर उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है। लेकिन सिंगल कॉलम की खबर है, पूर्व अग्निवीरों के बेहतर भविष्य के लिए बनेगा रोडमैप।
सरकार के प्रचार की इन खबरों के बीच द टेलीग्राफ की लीड का शीर्षक है, स्केअर इंडिया (भारत में डर या डरा हुआ भारत या भारत को डराने वाली खबरें)। मोटे तौर पर एअर इंडिया की आठ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द होने की खबर है (नवोदय टाइम्स)। अमर उजाला ने इसे टॉप पर छापा है। शीर्षक है, एअर इंडिया की 13 उड़ानें रद्द… सभी बोइंग ड्रीमलाइनर। खबर है कि छह दिनों में ड्रीमलाइनर की 248 में से 66 उड़ानें निरस्त हो चुकी है, हादसे के बाद अहमदाबाद से लंदन की दूसरी उड़ान भी रद्द क्योंकि विमान उपलब्ध नहीं है और इसका कारण वायुक्षेत्रों में प्रतिबंध तथा उड़ान पूर्व जांच में गड़बड़ी पाया जाना है। हिन्दुस्तान टाइम्स की एक खबर का शीर्षक है, जून 12 से ड्रीमलाइनर की 66 उड़ानें रद्द की गईं। हालांकि, द हिन्दू के अनुसार, एअर इंडिया ने 16 उड़ानें रद्द की हैं; डीजीसीए को बोइंग 787 के साथ सुरक्षा से संबंधित कोई अहम मामला नहीं मिला है।
हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर लीड है, एअर इंडिया के 787 बेड़े में सुरक्षा से संबंधित कोई अहम मामला नहीं है। एअर इंडिया से संबंधित इन खबरों के बीच एक खबर इंडिगो की भी है। बम की सूचना के बाद इंडिगो के विमान की नागपुर में इमरजेंसी लैंडिंग। यही नहीं, 228 लोगों के साथ सैन फ्रांसिस्को से मुंबई जा रहा एअर इंडिया का विमान तकनीकी खराबी के बाद कलकत्ता में खड़ा कर दिया गया है। यहां यह ईंधन भरने लिए रुका था। देशबन्धु की लीड का शीर्षक है, एक दिन में एअर इंडिया की सात उड़ानें रद्द। उपशीर्षक है, विमान हादसे के बाद एयरलाइंस के अंतरराष्ट्रीय संचालन पर असर। टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है, विमान की कमी से एअर इंडिया के अहमदाबाद लंदन उड़ान को रद्द करना पड़ा। विमानों की कमी का एक कारण यह भी बताया गया है कि अतिरिक्त जांच के कारण फेरे लगाने का समय बढ़ गया है। देश की जरूरत और प्रधानमंत्री की जानकारी अथवा प्राथमिकता की बात करूं तो आज दैनिक भास्कर की खबर है, इंफ्रास्ट्रक्चर सेफ्टी को लेकर गंभीरता नहीं, रिपोर्ट बनती हैं, पालन नहीं होता है। उड़ानें बढ़ाईं, रनवे नहीं : अहमदाबाद जैसे कई एयरपोर्ट सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं। यह स्थिति तब है जब सरकार संरचना विकास का दावा करती है और सड़कों के निर्माण के दावे किये जाते हैं। अहमदाबाद हवाई अड्डे से संबंधित एक रिपोर्ट का जिक्र कल मैंने भी किया था और आज यह आ गई। लेकिन विदेश दौरे पर रहने वाले, प्रेस कांफ्रेंस नहीं करने वाले प्रधानमंत्री ने अखबारों की खबरों पर कार्रवाई करने की व्यवस्था की हो तो उन्हें यह सब पता चलेगा वरना किस अधिकारी की हिम्मत होगी कि ऐसी खबरों की चर्चा कर पाये।
प्रधानमंत्री जब विदेश में हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति उनके पहुंचने से पहले जा चुके हैं तब आज देश भर में डर होने जैसी खबरें छपी हैं। देश के विमानन क्षेत्र की इस स्थिति को कौन देख रहा है और कैसे क्या चल रहा है यह सब जानने समझने के लिए आम आदमी के पास अखबार, रेडियो और टीवी चैनल ही है। आज इन खबरों में कहीं विमानन मंत्री (बड़े, छोटे दोनों) का नाम या तस्वीर तो छोड़िये, काम भी नहीं दिख रहा है। प्रधानमंत्री से संबंधित खबर दि एशियन एज में लीड है। ट्रम्प जी-7 छोड़कर अमेरिका रवाना (देशबन्धु) का शीर्षक है तो दि एशियन एज के अनुसार, प्रधानमंत्री जी-7 के लिए कनाडा में हैं दक्षिण कोरियाई और मैक्सिको के नेताओं से मुलाकात की। द हिन्दू की लीड है, अपने वाहन वाले भारतीयों से कहा गया है कि वे तेहरान शहर छोड़ दें। दि एशियन एज ने लिखा है, “ट्रम्प ने चेतावनी दी : तेहरान को तुरंत खाली करें”। हिन्दुस्तान टाइम्स ने लिखा है, ट्रम्प ने खामनेई को समर्पण करने की चेतावनी दी है। पर दैनिक भास्कर ने लिखा है, ट्रम्प ने धमकाया – जानता हूं कि ईरान के सुप्रीम कमांडर खामेनेई कहां हैं? पर अभी मारेंगे नहीं। टाइम्स ऑफ इंडिया की सेकेंड लीड लगभग यही है। देश, दुनिया और मीडिया की इन खबरों के बीच, प्रधानमंत्री ने कहा है कि जी7 में वे ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं पर चर्चा करेंगे और नेताओं के साथ प्रमुख मुद्दे उठायेंगे (टाइम्स ऑफ इंडिया, दि हिन्दू)। दि एशियन एज की लीड के अनुसार, दक्षिण कोरिया और मैक्सिको के नेताओं से मिल चुके हैं।



