भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच को लेकर जनता में नाराजगी पसरी है। टीवी चैनलों पर इसे लेकर बहसें भी चल रही हैं। एंकर-एंकराएं पानी पी-पीकर चीख रहे हैं। सबसे ज्यादा अर्नब गोस्वामी गुस्से में है। इतना गुस्सा की वह स्टूडियो के भीतर एसी के फुल तापमान के बावजूद बार-बार लाल हुआ जा रहा है। वह चिल्ला-चिल्लाकर सचिन, सौरव, सहवाग को कोस रहा है। लेकिन सत्ता से सवाल का जिक्र होते ही वह ठंडा पड़ जाता है।
नीचे कुछ प्रतिक्रियाओं के साथ वीडियो भी देखिए…
रामा शंकर सिंह-
ये खुद को पत्रकार कहता है। सारा दिन चिल्ला चिल्ला कर खुद ही सवाल उठा कर खुद ही जवाब देता है और सामने बैठे पैनलिस्ट को बोलने ही नहीं देता।
ये कभी अज्ञात काल्पनिक जानकारी पर शत्रु बनाकर उन्हें देशद्रोही घोषित करता रहता है। असली बात यह कि जब भी कभी किसी मुद्दे या समस्या पर इसके वैचारिक मालिक फँसते दिखें तो तत्काल ज़ोर ज़ोर से बोलकर उनसे सवाल पूछने लगता है जिनका दूर दूर तक उस समस्या से सम्बन्ध न हो और जिनसे सीधा ताल्लुक़ हो उन्हें साफ़ बचा देता है।
कई लोग कहते हैं कि ऐसा बोलना बल्कि चिल्लाना व चिल्लाते रहना बगैर नशे के संभव नहीं है । आप इसकी आँखों पर गौर करें तो समझ में आ जायेगा कि भारत की वर्तमान पत्रकारिता के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले चैनल और उनके सम्पादक ड्रग्स के असर में दर्शकों के बीच भी एक ख़ास ज़हरीला नशा पैदा करने के लिये प्रशिक्षित हैं और अंतिम बात यह कि ये चैनल सबसे अधिक मुनाफा कमाते हैं । नशा और मुनाफा एकसाथ !
थोड़ा सा सुनकर बर्दाश्त कर लीजिये और न्यू इंडिया की राष्ट्रवादी पत्रकारिता को सराहिये !
कुणाल शुक्ला-
जब पाकिस्तान के साथ लहू और पानी एक साथ नहीं बह सकता तो फिर जय शाह के लिए क्रिकेट मैच कैसे खेला जा सकता है?
पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच खेले जाने को लेकर आज मैंने मनी हाइस्ट की वेशभूषा में राजधानी रायपुर के चौक चौराहों और तेलीबंधा मरीन ड्राइव में अकेले ही विरोध प्रदर्शन किया।
पहलगाम हमले में मारे गए शहीदों को मेरा शत-शत नमन है।

अशोक कुमार पांडेय-
औक़ात और हिम्मत है तो जय शाह से पूछो, अमित शाह से पूछो, मोदी से पूछो। ऐसे पागलों की तरह चिल्लाये बिना शांति से ही पूछो, जनता सिर्फ हँसती है अब इसपर।
शीतल पी सिंह-
सिर्फ़ संदर्भ-
- 1986: इंडिया ने श्रीलंका के खिलाफ एशिया कप बॉयकॉट किया।
- 1990: पाकिस्तान ने इंडिया में होने वाला एशिया कप बॉयकॉट किया।
- 1993: इंडिया-पाक तनाव की वजह से एशिया कप ही कैंसिल हो गया।
- 2008: इंडिया ने पाकिस्तान में चैंपियंस ट्रॉफी खेलने से इनकार कर दिया।
सुप्रिया श्रीनेत-
सोशल मीडिया पर… TV डिबेट पर… ऐसे बहुत सारे BJP समर्थक हैं… बहुत सारे गोदी पत्रकार हैं.. बहुत सारे ‘स्वतंत्र’ विशेषज्ञ हैं।
जो इंडिया-पाकिस्तान मैच का विरोध कर रहे हैं… लेकिन इनमें से एक भी BJP, सरकार, नरेंद्र मोदी, अमित शाह और जय शाह का नाम नहीं ले रहा।
नक़ली आक्रोश… ढोंगी कहीं के
दिलीप मिश्रा-
अरनब गुस्से में है। शायद होना चाहिए। पहलगाम में खून बहा और उसके बाद भारत-पाकिस्तान का मैच खेला जा रहा है। खून और पानी साथ नहीं बह सकते लेकिन खेल और पैसा साथ बह सकते हैं।
हमेशा की तरह अरनब चीख चीखकर…बीसीसीआई, सोनी टीवी, स्पॉन्सर, सचिन, गांगुली…राजीव शुक्ला सबको घेरता है। मगर जिनके इशारे से मैच रुक सकता था, उनका नाम तक नहीं लेता। जय शाह, अनुराग ठाकुर, खेल मंत्री, प्रधानमंत्री… सबकी तरफ़ उसकी ज़ुबान बंद है।
सवाल वहीं उठाओ जहाँ असली ताकत है। बाकी शोर TRP के लिए है। अरनब का गुस्सा, भावनाएं सब नकली लगती हैं। उसका फर्जी राष्ट्रवाद डर से जन्मा है जहां सत्ता से सवाल पूछने की सख़्त मनाही है…
खुशदीप सहगल-
ये आदमी चीख चीख कर सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली से सवाल कर रहा है कि वो भारत-पाकिस्तान के मैच पर चुप क्यों हैं?
जैसे ये तीनों पूर्व क्रिकेटर्स ही इस मैच के लिए ज़िम्मेदार हैं? अरे भारत-पाकिस्तान के मैच पर सवाल करना है तो क्रिकेट एडमिनिस्ट्रेशन के शाहों से करो, सरकार में बैठे अपने पॉलिटिकल मास्टर्स से करो,जिनके इशारों पर हर दिन AC स्टूडियो में बैठ कर बकैती करते हो…
इसी चैनल के एक रिपोर्टर पर नेपाल में चांटों की बौछार हो गई…फोटो में नीचे दिख रहा ये आदमी जिस तरह स्टूडियो में आस्तीन चढ़ा कर, मेज़ पर हाथ पीट कर सवाल पूछता है, इसकी ख़ुद हिम्मत क्यों नहीं हुई नेपाल जाने की… क्यों अपने एक निरीह रिपोर्टर को बलि का बकरा बनाया?
ये क्या आपको किसी भी चैनल से कोई कथित बड़े नाम वाला एंकर या रिपोर्टर नेपाल जाकर रिपोर्टिंग करता दिखा? ये वही लोग हैं जो रिपोर्टिंग के नाम पर विदेश जाने का कोई छोटा सा मौका भी नहीं छोड़ते?
नेपाल में न्यूज़ चैनल्स ने अपने अनजान चेहरों को भेज कर उनकी दुर्गति कराई…
एक बात तो सही है नेपाल के घटनाक्रम ने इन सत्ता के चरण चुम्बक पत्रकारों के दिल में ख़ौफ़ ज़रूर बिठा दिया है…भारत में ऐसा कुछ है भी नहीं लेकिन ये महारथी अपनी डिबेट्स में छुटभैये नेताओं के बयानों का हवाला दे देकर कह रहे हैं कि विपक्ष भारत में भी नेपाल जैसा घटनाक्रम देखना चाहता है…
ये और कुछ नहीं अंदर का डर है जो बाहर आ रहा है… संभल जाओ चमन वालों… के आए दिन बहार के…
नदीम अख़्तर-
कभी ये आदमी अन्ना आंदोलन के टाइम पत्रकारिता का पुरोधा बन गया था। तब के पीएम मनमोहन सिंह की प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसे सवाल पूछने जाता था कि देश, बस इसी की तरफ ताक रहा है, सरकार को घेरने के लिए।
बाद में पता चला कि अन्ना और उसके आंदोलन की तरह ये आदमी भी फर्जी है। टाइम्स ग्रुप की नौकरी छोड़कर अपने चैनल का मालिक बन गया। पैसा कहां से आया, उस पे आप लोग खोजबीन करिए।

लेकिन अब ये आदमी सरकार से सवाल नहीं पूछता। भूतपूर्व क्रिकेटर्स से सवाल पूछता है। वह भी मजबूरी में। व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की जनता को दिखाने के लिए। पाकिस्तान विरोध बना रहे और दिखता रहे, तो उसके लिए सचिन और सौरव से सवाल पूछ रहा है।
इस देश की मूर्ख जनता को कोई बताए कि क्रिकेट मैच पाकिस्तान से होगा या नहीं, यह भारत रत्न सचिन डिसाइड नहीं करते। यह फैसला भारत सरकार लेती है। कहने को BCCI लेती है, लेकिन सरकार ही अंतिम पायदान है।
तो देखिए कि भारत सरकार से सवाल पूछने की बजाय ये आदमी किस तरह खिलाड़ियों से सवाल पूछकर पत्रकारिता को भी कलंकित कर रहा है और जनता को भी बेवकूफ बना रहा है। उनके पाकिस्तान विरोध की आग को satisfy कर रहा है।
ये communication का आजमाया तरीका है। सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे। पाकिस्तान का विरोध भी कर दो और भारत सरकार को इसके लिए कठघरे में खड़ा भी ना करो। तोप का मुंह बेचारे रिटायर्ड क्रिकेट खिलाड़ियों की तरफ घुमा दो। बाद में व्यक्तिगत रूप से उनको फोन करके माफी मांग लो कि आप तो जानते हैं कि न्यूज़ में ये सब करना पड़ता है।
सोचिए ये आदमी किस दर्जे का शातिर है।



