संजय सिन्हा-
प्रधान मंत्री से एक गुहार
आदरणीय मोदी जी, आज मैं पहली बार आपके नाम पत्र लिख रहा हूं। यह पत्र मैं एक बहुत छोटी सी मांग को लेकर लिख रहा हूं।
आप पूछेंगे कि इतनी छोटी मांग के लिए प्रधानमंत्री को पत्र क्यों? देखिए, मैं पहले ही स्पष्ट कर दूं कि जबलपुर में अब भाजपा का एक पार्षद भी चुनाव आपके नाम पर ही जीतता है। विधायक और सांसद की तो बात ही छोड़ दीजिए। वहां छोटे से छोटे चुनाव में भी लोग आपकी तस्वीर दिखाकर और आपके हाथ मजबूत करने के नाम पर वोट मांगते हैं। ऐसे में मैं शिकायत तो आपसे ही करूंगा।
सर, पिछले कुछ समय से मेरा दिल्ली से जबलपुर लगातार आना जाना लगा हुआ है। अब मेरा काफी समय वहीं गुजरने लगा है। पहले मैं दिल्ली में रहता था, लेकिन अब जबलपुर रहते हुए वहां की जरूरतों और समस्याओं को समझना भी शुरू कर दिया है।
आप पूछेंगे कि संजय सिन्हा जी, आपकी समस्या क्या है और आप इस पत्र के माध्यम से क्या शिकायत करना चाहते हैं? देखिए, मेरी शिकायत बहुत छोटी है। देश के प्रधानमंत्री से करने लायक तो बिल्कुल नहीं। लेकिन बात यह है कि मैंने पूरी जिंदगी एक पत्रकार के रूप में दिल्ली में बिताई है और पिछले कुछ वर्षों से मैं एक बेहद सामान्य नागरिक बन कर जबलपुर में रह रहा हूं।
जब तक मैं आजतक में संपादक था, तब तक मेरी थोड़ी बहुत पूछ परख थी। जब मैं दिल्ली से जबलपुर आता-जाता था तो एयरपोर्ट से लाने और छोड़ने के लिए गाड़ियां होती थीं। लोगों को लगता था कि यह आदमी काम का है, इसलिए मुझे रिसीव करने और छोड़ने वालों की कमी नहीं रहती थी। लेकिन जैसा कि होता है, जब आदमी पद से हट जाता है तो उसकी पूछ भी कम हो जाती है (सभी की होती है जज, आईएएस, आईपीएस, पूर्व सीएम और पूर्व पीएम की भी)।
प्रधानमंत्री जी, फिलहाल मेरी समस्या यह है कि जबलपुर एयरपोर्ट पर टैक्सी माफिया का राज है। वे लोग दूसरी कंपनियों की टैक्सियों को वहां आने-जाने नहीं देते और न जाने किसकी शह पर एक खास टैक्सी समूह का एकाधिकार चल रहा है।

मैंने इस विषय पर कुछ दिन पहले फेसबुक पर शिकायत लिखी थी। इसके बाद एसपी और कलेक्टर ने बैठक की और एसपी जबलपुर ने अपनी टीम भेजकर मामले की जांच कराई। जांच में यह पाया गया कि शिकायत सही है। इसके बाद एसपी साहब ने एक आदेश जारी कर दिया, जिससे शिकायत को कानूनी रूप दे दिया गया।
मेरी शिकायत यह थी कि जबलपुर एयरपोर्ट से मेरे घर तक टैक्सी वाले 15-16 किलोमीटर की दूरी का 1250 किराया रुपये मांगते हैं. जो बहुत अधिक है। इसके जवाब में एसपी साहब 60 रुपये प्रति किलोमीटर का किराया पक्का कर दिया गया। मतलब एक किलोमीटर से दस किलोमीटर का 600 जो न्यूनतम है। यानी हर मुसाफिर को कम से कम छह सौ देना ही होगा।
सर जी, क्या एसपी साहब किराया तय करा सकते हैं? पुलिस का काम किराया तय कराना है?
सर, मैं राहत की उम्मीद लेकर गया था, लेकिन स्थायी रूप से आहत होकर लौटा। मेरी मांग थी कि बाकी टैक्सी वालों को भी यात्री वहां से लाने दें, उन्हें वहां जाने की अनुमति दिलाने की मेरी मांग थी। ओला, उबर, रैपिडो को आने की अनुमति देने की मांग थी।
अब आप पूछेंगे कि मैं सीधे आपसे शिकायत क्यों कर रहा हूं? मैं जानता हूं कि प्रधानमंत्री को पूरे देश की चिंता होती है। किसी एक शहर की छोटी सी समस्या से उन्हें क्या लेना देना?
सर, बात यह है कि पिछले दिनों जब जबलपुर में पार्षद का चुनाव भी हुआ तो भाजपा के उम्मीदवारों ने आपके नाम पर वोट मांगे। सभी ने कहा कि मोदी जी के नाम पर मुहर लगाइए। किसी ने अपने नाम पर वोट मांगा ही नहीं।
सच्चाई यह है कि अब चुनाव में कोई अपने दम पर जीतने की हैसियत नहीं रखता। सभी को पता है कि चुनाव आपके नाम पर ही जीता जा सकता है। भाजपा के हर विधायक उम्मीदवार ने आपकी तस्वीर लगाकर ही प्रचार किया और यह कहकर वोट मांगे कि मोदी जी के हाथ मजबूत करने हैं, और यह भी सच्चाई है कि लोगों ने आपके नाम पर ही वोट दिए।
सांसद तो सीधे आपके नाम पर ही जीते। आप किसी को खड़ा कर देते वो जीत जाता। वोट आपको मिले हैं, शिकायत भी आपसे ही है।
प्रधानमंत्री जी, जब तक मैं आजतक न्यूज चैनल में पत्रकार रहा, मैंने कभी वोट नहीं डाला। सिर्फ इसलिए कि मैं निष्पक्ष पत्रकारिता कर सकूं और मेरे मन में किसी पार्टी के प्रति पक्षपात न हो। जब आप 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बने थे, तब मुझे बहुत खुशी हुई थी। लगा था कुछ नया होगा, कुछ बेहतर होगा।
खैर, मेरी शिकायत आज राजनीतिक नहीं है। यह व्यक्तिगत भी नहीं है, इसलिए मैं मूल मुद्दे से भटकना नहीं चाहता।
मैंने अपनी पीड़ा जबलपुर के चुने हुए भाजपा सांसद को भी बताई। उन्होंने आश्वासन दिया कि कुछ करेंगे, लेकिन कुछ हुआ नहीं। एसपी और कलेक्टर तक बात पहुंची और उसका नतीजा वही 60 रुपये प्रति किलोमीटर का फैसला निकला।
प्रधानमंत्री जी, 60 रुपये प्रति किलोमीटर किराया बहुत मंहगा है। इतना तो हवाई जहाज का किराया भी नहीं होता है। ऐसे में हम इतना किराया देकर टैक्सी में कैसे बैठेंगे? सर जी, आप ही समझ सकते हैं कि यह बहुत ज्यादा है। बाकी नेता, अधिकारी को ये किराया नहीं देना पड़ता है, ना ही उन्हें पार्किंग का भारी शुल्क लगता है। सारी मार हम नागरिकों पर ही है।
सर, क्या सांसद महोदय, विधायक, पार्षद, कलेक्टर साहब या एसपी साहब अपनी जेब से पैसे देकर इतनी महंगी टैक्सी में सफर करते हैं? सर जी, वे तो मुफ्त में आते जाते हैं। ये लोग हमारी मेहनत की कमाई से दिए गए टैक्स पर ही चलते हैं। क्या वो पार्किंग के पैसे देते हैं? सर, सोचिए न उन्हें हमारी पीड़ा का अहसास कैसे होगा?
सर, कोई कहता नहीं लेकिन आम आदमी के लिए जीना मुश्किल हो गया है। एयरपोर्ट से मेरा घर दूर है। अगर पैदल आना जाना संभव होता तो मैं कभी शिकायत नहीं करता।
प्रधानमंत्री जी, पहले मैं वोटर नहीं था। अब मैं वोटर हूं और जबलपुर का वोटर हूं। आप सांसद महोदय को यह भी बता दीजिए कि सांसद सिर्फ एक व्यक्ति नहीं होता। वह पूरे लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधि होता है और पूरे क्षेत्र के लोगों के छोटे छोटे हिस्सों को समेट कर, उनकी बात संसद तक पहुंचाने के लिए ही संसद पहुंचता है। मतलब वो हर नागरिक का प्रतिनिधी है।
खैर, सर जी, जब इन लोगों ने वोट आपके नाम पर लिए हैं, तो हमें यह अधिकार है कि हम शिकायत भी आपसे ही करें।
आपसे निवेदन है कि मेरा पत्र मिलते ही आप सांसद, मुख्यमंत्री, कलेक्टर और एसपी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं और तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि मैं बिना शोषण के जबलपुर आ जा सकूं। ध्यान रहे, मैं अब वोटर हूं और जबलपुर से वोटर हूं।
उम्मीद है मेरा पत्र आप तक पहुंचेगा। और उम्मीद यह भी है कि अगली बार जब मैं विमान से जबलपुर पहुंचूंगा, तो मुझे यह विकल्प मिलेगा कि कोई भी टैक्सी बिना रोक टोक एयरपोर्ट आ सके और एक सामान्य आदमी तीन चार सौ रुपये में अपने घर पहुंच सके।
नोट-
- मैंने जो लिखा है वो मेरा हक है, सिर्फ आग्रह नहीं।
- रिपीट में बता रहा हूं कि सारे स्थानीय नेता आपके नाम पर चुनाव जीतते हैं, तो शिकायत आपसे ही करूंगा और किसी से करने का लाभ होता दिख नहीं रहा।
सादर,



