आज छपे अखबार सीधे-सीधे ‘बहुमत कहां है’ बताने की जगह गोल-गोल जलेबी छान दिए हैं!

Sanjaya Kumar Singh : खबर यह नहीं है कि अजित पवार के व्हिप का क्या होगा, खबर यह है कि 1. बहुमत साबित हो गया है 2. जबरदस्ती बनी सरकार ने भ्रष्टाचार की जांच के मामले रोक दिए 3. अजित पवार फडनविस के साथ बैठक में नहीं गए.

आज के अखबारों में दो बड़ी खबरें हैं – महाराष्ट्र में विपक्षी गठजोड़ का शक्ति प्रदर्शन और महाराष्ट्र विधानसभा में शक्ति परीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज आएगा। इसके अलावा तीसरी खबर है, आज संविधान दिवस है और संसद में लगे एक होर्डिंग के जरिए आज के कार्यक्रम की घोषणा की गई है। इसके अनुसार आज नेशनल यूथ पार्लियामेंट स्कीन के वेब पोर्टल की शुरुआत होगी। महाराष्ट्र विधानसभा में सरकार के समर्थन की जांच पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज आएगा – यह कितनी बड़ी खबर है, आप समझ सकते हैं।

इसलिए, आज की सबसे बड़ी खबर कल का शक्ति प्रदर्शन ही है। आधी रात की कार्रवाई में सत्ता का खेल पलट देना जिसकी लाठी उसक भैंस का मामला है। और इसमें संविधान के कायदे प्रावधानों के साथ नजीरों का कितना पालन हुआ है यह सब आप जानते हैं। विधानसभा में बहुमत साबित नहीं होना और बाहर साबित कर दिया जाना – मायने रखता है। इसे इसी ढंग से पेश किया जाना चाहिए था। पर आज के अखबार हमेशा की तरह दिलचस्प हैं। सीधे-सीधे यह बताने की बजाय कि बहुमत कहां हैं, बहुमत को अलग तरह से पेश किया जा रहा है।

नवोदय टाइम्स ने इसमें भाजपा की प्रतिक्रिया को भी को भी महत्व दिया गया है और परेड का भाजपा ने उड़ाया मजाक शीर्षक खबर प्रमुखता से छापी है जबकि यह मजाक उड़ाने का नहीं, शर्म करने का मामला है। नवोदय टाइम्स ने मुख्य खबर का शीर्षक लगाया है, ….. ये है शिव सेना। इसमें शिव का फौन्ट छोटा होने और इटैलिक्स में लिखे जाने के साथ सेना को लाल रंग से लिखने के भी मायने हैं पर मुझे लगता है कि यह श्वेत श्याम में तथ्य प्रस्तुत करने का मामला ज्यादा है। फ्लोर टेस्ट पर फैसला आज – को भी नवोदय टाइम्स ने कुछ ज्यादा ही महत्व दिया है और प्रस्तुति का आधार, “दोनों पक्षों का दावा” निराधार दिख रहा है।

288 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा को 105 सीटें मिली हैं और केंद्र में सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवार को परंपरा-रिवाज-कायदे-कानून तोड़कर सत्ता दिलाए जाने और फ्लोर टेस्ट नहीं होने के बावजूद अगर विपक्षी गठबंधन 162 सदस्यों के समर्थन का दावा कर रहा है तो उसका मतलब है। भाजपा के मजाक उड़ाने या बहुमत हम ही साबित करेंगे जैसे दावों का कोई मतलब नहीं है। दावा है तो निश्चित रूप से खबर है पर यह विधायकों की परेड कराने या उन्हें इकट्ठा कर दिखा देने के मुकाबले कुछ नहीं है। बिल्कुल, कुछ नहीं।

दैनिक जागरण ने इस खबर के मुकाबले दिल्ली में प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की खबर को ज्यादा महत्व दिया है और, “गैस चैम्बर में मारने के बजाय बम फोड़कर सबको मार दो” शीर्षक खबर छह कॉलम में छापी है। सेकेंड लीड शक्ति परीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज है जबकि मुंबई में शिवसेना गठबंधन ने कराई विधायकों की परेड लीड के समानांतर लगभग बराबर में पर लाइट शीर्षक में है। मुंबई डेटलाइन से ओमप्रकाश तिवारी की खबर विधायकों की परेड की बात करती है जबकि दूसरे अखबारों में ऐसा नहीं है। टेलीग्राफ ने तो लिखा भी है कि परेड नहीं था। विधायक एक-दो की संख्या में आए।

कहने की जरूरत नहीं है कि विधायकों को इस तरह इकट्ठा कर दिखाने का मकसद बहुमत साबित करना नहीं था और वैसे भी यह होटल में नहीं किया जा सकता है। इसके जरिए देश को यह बताया गया है कि तीन दलों का गठजोड़ लंबे समय से विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए तैयार है जबकि भाजपा समय मांग रही है। इसके जरिए मतदाताओं को यह भी दिखाया गया है कि फडनविस को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद भी उनके निर्वाचित प्रतिनिधि एक साथ हैं। इसके बावजूद भाजपा अगर बड़े पैमाने पर दलबदल कराती है या किसी तरह समर्थन जुटा लेती है तो यह इस बात का सबूत होगा कि यह सब शनिवार के बाद मिले समय में हो पाया है। और इसका प्रभावी उपयोग किया गया है। (द टेलीग्राफ की खबर के अंश का अनुवाद)।

आज की एक और बड़ी खबर यह है कि जैसे तैसे बनी और समर्थन साबित नहीं होने के बावजूद महाराष्ट्र सरकार ने सिंचाई परियोजनाओं में भ्रष्टाचार की जांच के नौ मामले बंद कर दिए। इसे यह कहकर हल्का करने की कोशिश की जा रही है कि इन मामलों का अजित पवार से कोई संबंध नहीं है। पर मुद्दा यह है ही नहीं कि अजित पवार से संबंध है कि नहीं और नहीं है तो किससे है। मुद्दा तो यह है कि इतनी जल्दबाजी क्यों? पर अखबार यह सवाल पूछने की बजाय सफाई देने में लगे हैं कि एक अस्थायी सरकर ने जिन मामलों की जांच बंद की है उसका संबंध सरकार बनाने में समर्थन करने वाले से नहीं है।

दैनिक हिन्दुस्तान का शीर्षक है, होटल में विपक्षी एकता की महाशपथ। इसके मुकाबले इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक है, (अनुवाद मेरा) हमलोग 162 हैं, विपक्षी गठजोड़ द्वारा मुंबई के एक होटल में शक्ति प्रदर्शन। लेकिन इंडियन एक्सप्रेस की खबर का इंट्रो है, उनके विधायक अजित के व्हिप से डरे हुए हैं, पवार ने कहा, एक भी विधायक अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा। इस संबंध में खबर टाइम्स ऑफ इंडिया में है। और अजित पवार के सरकार के समर्थन में होने तथा व्हिप जारी करने के विधायकों के अधिकार से संबंधित ये दो प्रमुख खबरें दूसरे अखबारों में इतनी प्रमुखता से नहीं हैं।

एक खबर कहती है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में फडनविस की पहली बैठक में अजित पवार शामिल नहीं हुए। दूसरी खबर के मुताबिक विधानसभा के रिकॉर्ड में अजित पवार एनसीपी विधायकदल के नेता नहीं हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया ने इन दोनों खबरों को साथ-साथ पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर छोटी-छोटी ही छापा है पर यह एक तकनीकी मुद्दा है और नजरअंदाज करने लायक तो बिल्कुल नहीं। एक तरफ कहा जा रहा है कि अजित पवार भाजपा से शरद पवार की डील के कारण ही उप मुख्यमंत्री हैं और पवार भले सफाई दे रहे हैं पर विधायकों और पाठकों को भ्रमित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। इस लिहाज से यह महत्वपूर्ण खबर है और पहले पन्ने पर ही होनी चाहिए। नभाटा ने इसे प्रमुखता दी है।

नभाटा का शीर्षक, मुंबई के फाइव स्टार होटल में ली एकता की शपथ लगभग पूरी बात कहता है। उपशीर्षक भी सीधा और स्पष्ट है, 162 विधायक दिखाकर शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस ने किया शक्ति प्रदर्शन। राजस्थान पत्रिका का शीर्षक है, गठबंधन ने दिखाया 162 विधायकों का दम। पत्रिका का शीर्षक भी बहुत स्पष्ट है, गठबंधन ने दिखाया 162 विधायकों का दम। इसके मुकाबले दैनिक भास्कर का शीर्षक, गुपचुप सरकार के खिलाफ 162 विधायकों की सौगंध, फोटो परेड में कहा – ये गोवा नहीं महाराष्ट्र है – उलझा हुआ है।

वरिष्ठ पत्रकार, अनुवादक और मीडिया विश्लेषक संजय कुमार सिंह की एफबी वॉल से.


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