मनीष दुबे-
हाथ में 62 रुपया लेकर कल एनडीटीवी (NDTV) के नए कंसल्टिंग एडिटर बने शुभांकर मिश्रा (Shubhankar Mishra) ने अपने पहले शो में खूब टीआरपी बटोरी। भाई ने कूद-कूदकर बताया कि उसने सबसे तेज और थोड़ा मध्यम तेज टाइप चैनलों को आगे पीछे खिसका दिया।
पंडित शुभांकर ने अपने देशी अंदाज में अच्छा कार्यक्रम किया। जाहिर है शो का जो कंटेंट था वो देखा ही जाना था। देश का हर तीसरा, पांचवां व्यक्ति आर्थिक असमानता से जूझ रहा है। लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह रही कि ये शो अडानी समूह के स्वामित्व वाले न्यूज़ चैनल पर प्रसारित हुआ।
वो अडानी जो समाज में बढ़ रही आर्थिक असमानता का कहीं न कहीं सबसे ज्यादा जिम्मेदार है। इसे लेकर सवाल उठा- जिम्मेदार भी वही और फिक्रमंद भी वही?
तो क्या ये एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है? कह भी सकते हैं। हालांकि, सोशल मीडिया पर लोगों ने इस कार्यक्रम को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। कई यूज़र्स ने कहा कि “जो लोग इस असमानता को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं, अब वही इसके ऊपर चर्चा कर TRP और मुनाफा बटोर रहे हैं।”
सौरभ यादव नाम के एक यूज़र ने एक्स पर लिखा, “अडानी जी पहले आर्थिक असमानता बढ़ाएंगे, फिर उसके बारे में अपने चैनल पर डिबेट कराएंगे, और फिर TRP से भी कमाएंगे… वाह!” इस बयान को सोशल मीडिया पर व्यापक समर्थन मिल रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में बीते कुछ वर्षों में अरबपतियों की संपत्ति में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जबकि मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों की क्रय शक्ति में गिरावट दर्ज की गई है। ऑक्सफैम जैसी संस्थाएं भी इस बढ़ती असमानता पर बार-बार रिपोर्ट्स के ज़रिए चेतावनी देती रही हैं।
मीडिया विशेषज्ञों का कहना है कि जब पूंजी और मीडिया का स्वामित्व एक ही हाथ में सिमटता है, तब पत्रकारिता की निष्पक्षता पर स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं।
अब बड़ा सवाल ये है कि क्या यह विमर्श वाकई असमानता को खत्म करने की ओर बढ़ेगा, या सिर्फ़ एक और माध्यम होगा जिससे मुनाफा कमाया जाएगा?
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