पुलिस बल के दम पर दमन के साथ इन दोनों कोल ब्लॉक की पेड़ो की कटाई प्रत्येक 6 महीने के अंदर की जा रही है। शासन प्रशासन किसके साथ है आप स्वयं तय कर लीजिए…

आलोक शुक्ला-
केंद्र और राज्य सरकार ने अदानी कंपनी के MDO वाले 3 कोल ब्लॉक को लेमरू हाथी रिजर्व के बाहर रखा है जबकि संचालित PEKB खदान को छोड़कर हसदेव से सभी 21 कोल ब्लॉक को लेमरू रिजर्व के अंदर रखने का निर्णय हुआ था।
दरअसल लोगों के लंबे संघर्ष के कारण 2021 में राज्य सरकार को हसदेव अरण्य के 1995 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को लेमरू हाथी रिजर्व अधिसूचित करना पड़ा था।
वर्ष 2011 में सम्पूर्ण इसी हसदेव अरण्य कोल फील्ड को समृद्ध जैव विविधता और विशेष पारिस्थितिकीय तंत्र के कारण खनन से मुक्त रखते हुए नो हो क्षेत्र घोषित किया गया था।
अभी जिस खदान PEKB (द्वितीय चरण) के पेड़ो की कटाई हो रही है उसकी वन स्वीकृति को वर्ष 2014 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने निरस्त कर दी थी। उस ऐतिहासिक फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्थगन आदेश दिया और वर्ष 2023 तक लगभग 9 वर्ष तक यह खदान इसी स्थगन आदेश पर चलती रही। (हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने 400 पेड़ो की कटाई को हत्या बताया) इस स्थगन आदेश के वाबजूद इस खदान की क्षमता के विस्तार 10 से 21 MTPA भी हो गया।
सुप्रीम कोर्ट के स्थगन आदेश के कारण निचली अदालतों में खदान से संबंधित अन्य मामलों की सुनवाई भी मुश्किल हो गई। अभी भी सुप्रीम कोर्ट, NGT और उच्च न्यायालय में प्रभावित समुदाय की याचिकाएं लंबित है, इन तीनों कोल ब्लॉक के संबंध में। (हालांकि न्याय की उम्मीद बाकी है)
भारतीय वन्य जीव संस्थान ने वर्ष 2021 में NGT के आदेश के तारतम्य में हसदेव की जैवविविधता अध्ययन रिपोर्ट तैयार की। इसमें सिफारिश की गई कि “सम्पूर्ण हसदेव अरण्य को पुनः नो हो क्षेत्र घोषित किया जाए” यदि किसी भी कोल ब्लॉक में खनन की इजाजत दी गई तो छत्तीसगढ़ में मानव हाथी संघर्ष इतना विकराल हो जायेगा कि फिर कभी इसे संभाला नहीं जा सकता। जीवन दायिनी हसदेव नदी और बागों बांध का अस्तित्व संकट में आ जायेगा।
इस रिपोर्ट के वाबजूद (PEKB, परसा और कैंट एक्सटेंशन) कोल ब्लॉक को रिजर्व से बाहर रखा गया और वर्ष 2022 में केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर pekb दूसरे चरण और परसा कोल ब्लॉक की अंतिम वन स्वीकृति जारी कर दी है वहीं भी पेसा क्षेत्र की ग्रामसभाओं के विरोध के वाबजूद।
राज्यपाल ने भी फर्जी ग्रामसभाओं की जांच का आदेश राज्य सरकार को दिया था जिसका कभी पालन नहीं हुआ।
वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ विधानसभा सर्व सम्मति से संकल्प पास करती है कि “हसदेव अरण्य के सभी कोल ब्लॉक निरस्त किए जाएं” इस संकल्प के वाबजूद pekb दूसरे चरण और परसा कोल ब्लॉक को जारी की गईं अनुमतियां निरस्त नहीं की हैं।
वर्ष 2025 में छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जन जाति आयोग लंबी जांच प्रक्रिया के बाद अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपता है कि परसा कोल ब्लॉक की वन स्वीकृति हेतु ग्रामसभाओं के फर्जी और कूट रचित दस्तावेज बनाए गए थे । इस रिपोर्ट को भी राज्य सरकार कचरे के डिब्बे में डाल देती है।
पुलिस बल के दम पर दमन के साथ इन दोनों कोल ब्लॉक की पेड़ो की कटाई प्रत्येक 6 महीने के अंदर की जा रही है। शासन प्रशासन किसके साथ है आप स्वयं तय कर लीजिए।


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