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दिल्ली

केजरीवाल जनता को रोज अहसास करवाते रहते हैं कि आतिशी नहीं, असली मुख्यमंत्री मैं हूं!

विष्णु नागर-

अरविन्द केजरीवाल को लगता है कि कहीं आतिशी मुख्यमंत्री के रूप में इतनी न छा जाएं कि लोग उन्हें भूल जाएं, इसलिए वह हर जगह , हर दिन दिल्ली में छाये रहने का जुगाड़ जमाए रहते हैं और जनता को अहसास करवाते रहते हैं कि आतिशी नहीं, असली मुख्यमंत्री मैं हूं। उनसे सत्ता का मोह छूट नहीं रहा।

सड़कों की खराब स्थिति के बारे में वह पत्र लिखेंगे तो आतिशी से कहेंगे तुम यह पत्र पकड़कर फोटो खिंचवाओ। विधानसभा में भी वे छाये रहेंगे।

रोशनारा रोड का निरीक्षण करने जाएंगे तो वहां भी मुख्यमंत्री से अधिक महत्वपूर्ण खुद को दिखाएंगे। लोगों तक जाहिर करेंगे कि आतिशी तो मेरी कठपुतली है।

लगता है आतिशी को उन्हीं के इशारे पर बार बार कहना पड़ रहा है कि मैं तो बस मुख्यमंत्री चुनाव होने तक हूं। राजनीति ने एक पढ़ी-लिखी महिला का आत्माभिमान नष्ट कर दिया है।

मोदी की तरह वह भी असुरक्षित नेता हैं। आतिशी को मुख्यमंत्री बनाना उनकी कानूनी विवशता थी पर केजरीवाल इस तरह बड़े बन कर खुद को छोटा और छोटा करते जा रहे हैं। दिल्ली और देश के लिए वह बहुत खराब मिसाल पेश कर रहे हैं।

अपना सम्मान खो रहे हैं। भाजपा के लिए रास्ता आसान कर रहे हैं।

केजरीवाल मिजाज़ से जनतांत्रिक नेता नहीं है. वे असहमति के प्रति असहिष्णु हैं और असुरक्षाबोध से ग्रस्त हैं. वे हिंदुत्ववादियों से अधिक हिंदू और उन्मादी राष्ट्रवाद के मर्ज़ से पीड़ित हैं. इंडिया अलायंस में होने के बावजूद वे भरोसेमंद सहयोगी नहीं है. इसलिए उन पर कड़ी निगाह रखने की जरुरत है.

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1 Comment

1 Comment

  1. Manish vani

    September 29, 2024 at 8:50 pm

    विष्णु नागर जी क्या भारत के अंदर भारतीय जनता पार्टी के जितने मुख्यमंत्री है वह बार-बार मोदी का नाम क्यों लेते हैं यह राजनीति करने का फार्मूला है इसमें केजरीवाल जी को टारगेट न किया जाए

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