विवेक शुक्ला-
संदीप दीक्षित से आम आदमी पार्टी (AAP) का खफा होना सही नहीं लगा। उन्होंने ठीक ही कहा कि वैसे तो अरविंद केजरीवाल फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे नहीं, बने तो उन्हें किसी सरकारी फाइल को देखने की इजाजत नहीं होगी। संदीप दीक्षित तो वही कह रहे हैं जिस आधार पर केजरीवाल को कोर्ट से जमानत मिली थी। कोर्ट ने उन्हें साफ तौर पर कहा था कि वे कोई सरकारी फाइल नहीं देख सकते। बस इतनी सी बात पर आप नेता तिलमिला गए।
अब आप वाले INDIA गठबंधन से कांग्रेस को निकालने की मांग कर रहे हैं। केजरीवाल और उनके चेलों के साथ यही दिक्कत है कि वे सिर्फ अपने को पाक साफ मानते हैं। वे यह भी मान चुके हैं कि सिर्फ उन्हें दूसरे पर झूठे- अधकचरे आरोप लगाने का अधिकार है।
केजरीवाल ने शीला दीक्षित पर करप्शन के तमाम आरोप लगाए थे। कहा था, शीला जी ने कॉमनवेल्थ खेलों के दौरान हजारों करोड़ रुपए का घपला किया।
हालांकि उनका एक भी आरोप साबित नहीं हुआ। आप की दिल्ली में दस साल से सरकार है, पर उसने शीला जी के कार्यकाल में हुए कथित करप्शन मामलों की छानबीन के लिए कोई जांच नहीं करवाई। शीला दीक्षित मुख्यमंत्री बनने से पहले और बाद में ईस्ट निजामुद्दीन में थ्री बेडरूम के घर में ही रहीं। अगर उन्होंने कुछ करप्शन की होती तो कभी तो कुछ पता चलता।
कांग्रेस को केजरीवाल को बताना चाहिए कि दिल्ली में बिजली संकट शीला दीक्षित के दौर में ही खत्म हो गया था। केजरीवाल बार-बार कहते हैं कि हमने दिल्ली में बिजली संकट खत्म किया। पर कांग्रेस के नेताओं के साथ दिक्कत है कि वे यह भी नहीं बताने को तैयार कि शीला दीक्षित के चीफ मिनिस्टर रहते हुए दिल्ली का कितना विकास हुआ। मेट्रो आई और उसका विस्तार हुआ।
पिछले पचास सालों में दिल्ली में दो बड़े काम शीला दीक्षित के समय ही हुए। पहला, बिजली सप्लाई 24 घंटे होने लगी। दूसरा, मेट्रो आई और उसने लाखों दिल्ली वालों की जिंदगी को सुकून भरा बना दिया। यमुनापार को बाकी दिल्ली जैसा बनाने का श्रेय भी शीला दीक्षित को जाता है। पर मजाल है कि कांग्रेसी कभी यह सब बोलें। बड़े भोले हैं बेचारे!



