Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

उत्तर प्रदेश

महाकुंभ के सफल आयोजन से योगी के कद पर कितना असर पड़ा? पढ़ें

कृष्ण पाल सिंह-

प्रयागराज में आयोजित इस बार के महाकुंभ की भव्यता और विशालता चर्चा का विषय बनी हुई है। योगी सरकार में इसके प्रबंधन में पूरी ऊर्जा झोंक डाली जिससे इस कुंभ की आयोजना अभूतपूर्व हो गई।

हालांकि इस बीच में एक अपशकुन के कारण उनके प्रबंधन की जगमग में दाग भी लगा। यह अपशकुन हुआ कुंभ क्षेत्र में लगे शिविरों में खाना बनाने के लिए रखे सिलेंडरों के फट जाने से जिससे विकराल आग लग गई। 33 टेंट इस आग की भेंट चढ़ गये। गनीमत यह रही कि इसमें कोई जनहानि नही हुई और अधिकारियों ने बहुत जल्द आग पर काबू पा लिया।

अग्निकांड की सूचना मिलते ही स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आनन-फानन प्रभावित क्षेत्र में पहुंच गये और खुद उन्होंने बचाव कार्य का निरीक्षण किया। उनकी इस तत्परता से श्रद्धालु और साधु संत संतुष्ट हुए जिससे आलोचकों को उन्हें भड़काने का अवसर नहीं मिल पाया।

महाकुंभ आध्यात्मिक चेतना के जागरण की आयोजना है लेकिन सरकार के कर्ताधर्ताओं की राजनैतिक मंशाओं ने कुंभ के इस मूल उद्देश्य को जैसे ढांप लिया। योगी आदित्यनाथ इतिहास में हिंदू हृदय सम्राट घोषित राजा महाराजाओं की पंक्ति में अपना नाम दर्ज कराने के लिए बेताब रहते हैं। इस जोश में कई बार विवादित बयानबाजी करने और फैसला लेने में भी वे गुरेज नहीं बरतते पर उन्हें इसकी कोई परवाह नहीं है।

2017 में जब उन्हें भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश का भाग्य विधाता बनाने का फैसला किया था उस समय यह घोषणा नितांत अप्रत्याशित थी। विधानसभा चुनाव के उस समय के अभियान में योगी की गणना भी पहली पंक्ति के नेताओं में नहीं रही थी। सच तो यह है कि 2017 के विधानसभा चुनाव की विजय के पहले दिन इसके हीरो तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य माने जा रहे थे जो अब योगी के मंत्रिमंडल में दूसरी बार उपमुख्यमंत्री हैं। इस समय तक वह काफी कटसाइज हो चुके हैं।

यहां तक कि 2022 के विधानसभा चुनाव में अपनी सीट सिराथू से हार जाने के कारण उनकी चमक को काफी हद तक ग्रहण लग चुका है। फिर भी योगी के लिए उत्तर प्रदेश में रास्ता अभी तक पूरी तरह निरापद नहीं हुआ है। केंद्र में गृहमंत्री अमित शाह उनको अर्दब में रखने के लिए प्रदेश के किसी न किसी बागी नेता को पर्दे के पीछे से शह देते रहते हैं जिससे यह जाहिर होता रहे कि इतना मौका दिये जाने के बावजूद योगी अभी तक पार्टी में अपनी निर्विवाद स्वीकार्यता नहीं बना सके हैं।

महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में योगी का बंटोगे तो कटोगे का नारा खूब इस्तेमाल हुआ। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जो अपने स्लोगन पर पार्टी को हांकने के आदी हैं योगी आदित्यनाथ के इस नारे का असर स्वीकार करना पड़ा। उन्होंने इसमें हलका सुधार जरूर किया जिसमें एक रहोगे तो नेक रहोगे के नारे की पहली कड़ी एक रहोगे तो सेफ रहोगे बना दी जिससे चुनावी कौशल में उनकी छाप योगी की धाक में विलीन होकर न रह जाये। पर माना यह गया कि मोदी को भी योगी के नारे का अनुसरण करने में ही फायदा दिखा। जाहिर है कि इसके बाद योगी का कद राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों को छू गया था।

महाकुंभ की आयोजना को अलौकिक स्वरूप देकर उन्होंने अपने छवि संवर्दन के इस अभियान को राकेट गति प्रदान करने की ठानी। लेकिन महाकुंभ का उद्देश्य क्या है इसको समझने की जरूरत है तांकि उसके एश्वर्य को न भूतो न भविष्यतो का रूप देने की उमंग दिखाने के पहले सतर्कता बरतने की जरूरत के प्रति कर्ताधर्ता सचेत हो सकें। आध्यात्मिक चेतना के स्फुरण का उद्देश्य विफल हो सकता है अगर इसके लिए किया गया कोई आयोजन विलासिता का उद्दीपक बन जाये।

आध्यात्मिक चेतना के लिए तपस्या को तत्पर मनोभूमि पहली शर्त है। तपस्या मानें तपाना यानी साधक अपने शरीर को तपाकर आध्यात्मिक उन्नति के लिए अग्रसरता प्रदर्शित करे। सामान्य श्रद्धालु कड़ाके की ठंड में संगम में स्नान करके इस जरूरत का निर्वाह करते हैं तो साधक कल्पवास के दौरान कम से कम कपड़ों में रहकर और तड़के तीन बार स्नान करके व ऐसी ही अन्य हठ साधनाओं के जरिये अध्यात्म में पूरी तरह डूबने के लिए अपने को तैयार करते हैं। श्रद्धालुओं में उनकी कठिन तपस्या से अपने अंदर स्थायी अध्यात्म को साधने की प्रेरणा जाग्रत होती है तभी कुंभ का उद्देश्य फलीभूत होने की कल्पना की जाती है।

लेकिन कुंभ में आने वाले ग्लैमर की दुनिया के सितारों और विदेशियों के स्नान के नजारों को बहुत महत्व देने और प्रचारित करने से अर्थ का अनर्थ हो सकता है। ग्लैमर की दुनियां के सितारे एनज्वाय के लिए नये किस्म की हर आयोजना में भागीदार बनने को उत्सुक रहते हैं और विदेशियों के संस्कार में है एडवेंचर का आनंद लेना। इसलिए कुंभ के संदर्भ में उनको महिमामंडित करना कदापि हितकर नहीं हो सकता।

इसी तरह उक्त लोगों जैसे प्रजाति के हमारे यहां के खाये-अघाये लोगों के लिए वातानुकूलित और अन्य सुख-सुविधाओं से परिपूर्ण व्यवस्थाओं की उपलब्धता भी औचित्यपूर्ण नही है भले ही उसकी भरपूर कीमत वसूल की जा रही हो। कुंभ व्यापार नहीं है और न ही मौज-मस्ती का उपक्रम। 2013 में जब केदारनाथ के जल प्रलय में हजारों जाने चली गई थीं उस समय यह चेतावनी दी गई थी कि तीर्थ स्थल को हनीमून जैसी मौज-मस्ती का स्थान बनाकर जो पाप किया गया है उसके कारण कुपित ईश्वर ने दण्ड स्वरूप उक्त त्रासदी को भेजा था। इसके मद्देनजर आइंदा तीर्थस्थलों पर मात्र साधना हो कोई मौज-मस्ती नहीं इसका ध्यान रखा जाये। कुंभ के लिए भी यह चेतावनी प्रासंगिक है।

कुंभ मेला ईश्वर और सृष्टि के रहस्यों पर चर्चा का भी अवसर है न कि राजनैतिक चर्चा का। लेकिन वर्तमान में इसे राजनैतिक निहितार्थ पर आधारित विमर्श की स्थली के रूप में बदल दिया गया है। आदिगुरु शंकराचार्य ने सारे जगत और व्यक्तियों को ब्रह्ममय बताया है जिसमें मुसलमान, इसाई आदि भी शामिल हैं। जाहिर है कि सनातन धर्म अलग-अलग पंथों और उनके अनुयायियों के बीच भेद नहीं रखता। सनातन की इस मर्यादा को बनाये रखने के लिए वक्फबोर्ड आदि की चर्चा कुंभ में होनी नहीं चाहिए।

सनातन धर्म की महानता के अनुरूप अपने विचारों और आचरण को रखने की जिम्मेदारी इसके ध्वजावाहकों की है। इस दृष्टि से विश्वहिंदू परिषद द्वारा कुंभ को राजनैतिक चर्चाओं का निमित्त बनाने की परंपरा दूषित है क्योंकि सब जानते है कि विश्वहिंदू परिषद पार्टी विशेष के लिए कार्य करती है। मुख्यमंत्री योगी जी भी महान संत हैं पर उन्हें भी कुंभ को अपनी राजनैतिक परियोजनाओं को पूरा करने का साधन बनाने का अधिकार नहीं है। वैदिक संस्कृति में प्रकृति की जीवनोपयोगी शक्तियों को देवताओं के रूप में मान्यता दी गई है।

इसलिए प्रकृति के साथ साहचर्य से न बचने और अपनी मौलिक जरूरतें पूरी करने मात्र के लिए प्रकृति की शक्तियों का उपयोग यह अध्यात्म के मूल सिद्धांतों में है। इनका निर्वाह करने के साथ-साथ कोलाहल से दूर शांति के वातावरण में ध्यान साधकर चिंतन करना कुंभ आयोजना का अभीष्ट है जिसमें मनोरंजक मेले जैसा आयोजन विघ्नकारक है। महाकुंभ की सार्थकता का मूल्यांकन इन्हीं कसौटियों पर संभव है।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन