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लिखकर दो मजीठिया वेज वोर्ड के अनुसार वेतन मिल रहा वरना अखबार बंद कर दूंगा!

महाराष्ट्र के सबसे बड़े समाचार पत्र समूह श्री अंबिका प्रिटर्स एंड पब्लिकेशन ने मजीठिया वेज बोर्ड के मामले में अपने लेटर हेड पर एक फार्मेट तैयार किया है और यशोभूमि के कर्मचारियों को 10 जनवरी को यह फार्मेट देकर धमकी देते हुये कहा है कि अगर इस फार्मेट पर हस्ताक्षर नहीं करोगे तो यशोभूमि समाचार पत्र के कार्यालय पर ताला मारकर अखबार का प्रकाशन बंद कर दिया जायेगा. श्री अंबिका प्रिंटर्स एंड पब्लिकेशन की तरफ से महाराष्ट्र के सबसे लोकप्रिय हिन्दी दैनिक यशोभूमि के साथ-साथ मराठी समाचार पत्र पुण्यनगरी, मुंबई चौफेर, वार्ताहर के साथ साथ कर्नाटक मल्ला समाचार पत्र का प्रकाशन किया जाता है.

महाराष्ट्र के सबसे बड़े समाचार पत्र समूह श्री अंबिका प्रिटर्स एंड पब्लिकेशन ने मजीठिया वेज बोर्ड के मामले में अपने लेटर हेड पर एक फार्मेट तैयार किया है और यशोभूमि के कर्मचारियों को 10 जनवरी को यह फार्मेट देकर धमकी देते हुये कहा है कि अगर इस फार्मेट पर हस्ताक्षर नहीं करोगे तो यशोभूमि समाचार पत्र के कार्यालय पर ताला मारकर अखबार का प्रकाशन बंद कर दिया जायेगा. श्री अंबिका प्रिंटर्स एंड पब्लिकेशन की तरफ से महाराष्ट्र के सबसे लोकप्रिय हिन्दी दैनिक यशोभूमि के साथ-साथ मराठी समाचार पत्र पुण्यनगरी, मुंबई चौफेर, वार्ताहर के साथ साथ कर्नाटक मल्ला समाचार पत्र का प्रकाशन किया जाता है.

इस समाचार पत्र के मालिकों ने यह कठोर फरमान इसलिये सुनाया कि कुछ कर्मचारियों ने श्रम आयुक्त के पास शिकायत किया था कि कंपनी हमें मजिठिया वेतन आयोग की सिफारिश नहीं दे रही है और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का खुलेआम उल्लंघन कर रही है. इसके बाद श्रम आयुक्त ने कंपनी प्रबंधन को नोटिस भेजा था. इस फार्मेट में साफ लिखा है कि श्री अंबिका प्रिटंर्स एंड पब्लीकेशन के कर्मचारियो की एक बैठक हुयी जिसमें इस बात पर सहमति बनी कि कंपनी कर्मचारियों को मजिठिया वेतनमान के अनुसार वेतन दे रही है और मार्च तक बकाया एरियर दिया जायेगा. फिलहाल कंपनी के कर्मचारियों ने इस फार्मेट पर हस्ताक्षर करने से मना करते हुये साफ कहा है कि कंपनी अपना तीन साल का टर्नओवर और अन्य जरूरी दस्तावेज दे.

प्रबंधन अब संपादक के जरिये भी कर्मचारियों पर दबाव बना रही है कि कर्मचारी मान जायें मगर कर्मचारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. आपको बता दें कि इस कम्पनी के कुछ कर्मचारियों ने इसके पहले कंपनी प्रबंधन से एक बैठक किया था जिसमें कंपनी ने मौखिक रूप से मजिठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन देने की स्वीकृति दी थी. इसके बाद कर्मचारियों से एक पत्र पर जबरदस्ती हस्ताक्षर कराया गया था और इस पत्र को श्रम आयुक्त को दे दिया था. मगर जबरदस्ती हस्ताक्षर कराने के बाद ही कंपनी प्रबंधन ने कर्मचारियों का नाम मात्र वेतन बढ़ाया और आज तक एरियर नहीं दिया जिसके बाद कर्मचारियों ने श्रम आयुक्त से लिखित शिकायत की. अब देखना है कि कंपनी प्रबंधन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन करता है कि नहीं.

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