संजय वर्मा-
इंडियन एक्सप्रेस में लहर काला के एक लेख के जरिए मुझे पता चला कि दुनिया की सबसे अच्छी व्हिस्की का अवार्ड जीतने वाली ‘इंद्री व्हिस्की’ का मालिक वह मनु शर्मा है जिसने जेसिका लाल की हत्या की फिर 16 बरस जेल काटी। लेखिका की मित्र ने इस व्हिस्की को पीने से इनकार किया कि इसका मालिक एक हत्यारा है। लेखिका ने सवाल उठाया है क्या उनकी मित्र का स्टैंड सही है?
लेख पढ़ कर मुझे बहुत सारी बातें याद आई। सबसे पहले तो मुझे बदलापुर फिल्म में हुमा कुरैशी का डायलॉग याद आया – “…सब को नहीं मिलता जिंदगी में दूसरा चांस .., लायक को नहीं मिला, मुझे नहीं मिला..! तुझे मिला है इसको वेस्ट मत कर ..!
मनु शर्मा ने दूसरा चांस वेस्ट नहीं किया! उसने दुनिया की सबसे अच्छी व्हिस्की बनाई।

फिर एक ख्याल आया कि मनु शर्मा को जेल के इन 16 वर्षों ने कैसे बदला होगा। क्या इस अनुभव ने उसे कोई ऐसी बात सिखाई जिसने उसे एंटरप्रेन्योर होने में मदद की। जेल यात्रा लोगों को किस तरह बदलती होगी हम इस बारे में ज्यादा नहीं जानते। ये सफर इंसान के दिल दिमाग जीवन विश्वास, समझ को कैसे बदलता है हम नहीं जानते। मेरे एक मित्र सिर्फ 12 दिन जेल में रहे थे, लौट कर आए तो उनमें अजीब बदलाव हो गया। रात को तीन बजे डिनर करते, कभी सुबह आठ बजे लंच करने की जिद करते, सोने खाने नहाने के हर नियम अनुशासन से उन्हें नफरत हो गई थी।
हमारे पास जेल से निकले लोगों की बहुत कम कहानियां हैं। मैं एक अपराध कथा लिखने वाले लेखक से मिला था उसका कहना था जेल की असली कहानियां हमें इसलिए पढ़ने नहीं मिलती क्योंकि उन कहानियों के भीतर उतरने वाले लोग पागल हो जाते हैं और कभी कुछ नहीं लिख पाते।
इसलिए हम नहीं जानते इन लोगों को कौन रोजगार देता है, इनके बच्चों के साथ रिश्ते करता या नहीं करता है..! जेल से निकलने के बाद उनके दोस्त रिश्तेदार उनके पड़ोसी उन्हें कैसे बरतते हैं। क्या समाज उन्हें दूसरा चांस देता है?
कहते हैं कई बूढ़े कैदी तो जेल से छूटना ही नहीं चाहते। वे जानते हैं कि बाहर की दुनिया उनके लिए खत्म हो चुकी है उनके लिए कोई दूसरा चांस नहीं है।
इंसान गलती करता है, जेल उस गलती की सजा है। हिसाब बराबर हो जाना चाहिए। फिर कोई इंद्री व्हिस्की पीने से क्यों मना करे। सबको दूसरा चांस मिलना चाहिए…
इस पोस्ट पर आए कुछ कमेंट्स भी पढ़िए….
ओम थानवी-
कंटेंट में एक विचार है। पर ब्रांड का फ़ोटो लगा दिया वह प्रचार है। बाक़ी कोई तिरस्कार करे तो उसका हक़ है। महम हिंसा के बाद मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने घर बुलाया खाने पर, मैंने जाने से इनकार कर दिया था। मेरी मरज़ी।
चंद्र प्रकाश मित्तल-
सर जी पोस्ट बड़ी शानदार और विचारोत्तेजक है। परन्तु जैसे रामायण पढ़ने से हर कोई राम नहीं हो जाता बल्कि वह क्या बनेगा यह उसके विचारों और अंततः उसके ग्रास्पिंग एलिमेंट्स पर डिपेंड करता है ठीक इसी तरह जेल का भी फंडा है। जेल का कंसेप्ट मूलतः व्यक्ति के आत्मचिंतन तदनुसार सुधार का ही है परन्तु सरकार तो सरकार है उसने जेलों को यातनागृह में तब्दील कर दिया है। जिससे समाज में जेल अपमान के द्योतक हो गए हैं।
प्रोफेशनल लोगों को जेल फेल से कोई फर्क नहीं पड़ता। सबसे ज्यादा वह प्रभावित होता है जिससे अनजाने में, उत्तेजना में या गुमराह होने के कारण गलती की है। ऐसे लोगों की सजा के फैसलों में यदि स्पष्टत उल्लेख कर दिया जाए कि यह सिर्फ आत्मचिंतन और आत्मानुशान की मंशा से निरुद्ध किए गए हैं, न कि सामाजिकरूप से अपमानित करने की मंशा से तो ऐसे लोगों का एक्सेप्टेंस समाज में बढ़ सकता है।
प्रोफेशनल अपराधियों के लिए भी जो बालपन से अपराध की दुनिया में आ गए हैं उनके लिए तो और भी परिष्कृतता की जरूरत है। हालांकि उनके लिए बाल संप्रेक्षण गृह हैं परन्तु वे भी औपचारिकताएं पूर्ण करने भर के लिए हैं। सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि जेल यातनागृह कतई नहीं हैं, ये सुधारगृह या पुनर्वासकेंद्र हैं।
आशीष तेलंग-
सहमत हूं। मनु शर्मा ने अपने अपराध की सज़ा भोगी, 14 साल के लगभग। तीन साल और बचे थे पर कोर्ट ने अच्छे व्यवहार के आधार पर उसे तीन साल पहले रिहा कर दिया। जेसिका की बहन ने भी उसे रिहा करने पर कोई आपत्ति ना होने बाबत जेल को चिट्ठी लिखी थी।
अपराध किया, कोर्ट के हिसाब से जायज़ सज़ा भोगी, फिर हिसाब बराबर क्यों नहीं होना चाहिए? और रही बात इंद्री व्हिस्की के मालिक होने की तो ये हमारी सामंतवादी मानसिकता है। कंपनी का प्रोडक्ट उसके मालिक की संपत्ति ना होकर सारे स्टेकहोल्डर्स की होती है। उस कंपनी के उत्पादों में उसके सारे इंप्लाईज का योगदान है। तो फिर मनु शर्मा के अपराध, की सज़ा फिर से क्यों दी जाए, और अगर दी भी जाए तो उसकी कंपनी और उसके एम्प्लाइज को क्यों?
राजेंद्र शर्मा-
मनु शर्मा ने जेसिका लाल से बार बंद होने के बाद व्हिस्की मांगी थी । मना करने पर गोली मार दी। सजा हुई, जेल गया। बड़े बाप का बेटा था तो इस उस वजह से बार-बार पेरोल पर अपने परिवार के साथ ही रहा। बाप के धंधे में शिरकत सहयोग करता था। धंधा करते-करते ही व्हिस्की का नया ब्रांड बनाया। विजय माल्या का भी यही धंधा रहा। शराब के धंधे के साथ माफिया का चोली दामन जैसा रिश्ता हमेशा रहा। पीने वाले फिर भी बिना किसी नैतिक बाधा के पीते हैं। लेकिन किसी ने कभी कोई जाम किसी से घृणा के चलते ठुकराया तो यह उसका जायज अधिकार है। इस पर कोई सवाल नहीं होना चाहिए।
के अर्जव-
इस ब्रांड के मालिक के पीछे बहुत स्ट्रांग बैकअप है। इसे ब्रांड बनाने में भी बहुत ऊपर के कुछ मामले थे। किसी ने कहीं किसी को कुछ साल पहले यह व्हिस्की गिफ़्ट की। उसके बाद सब बदल गया। है बढ़िया वैसे।
अशोक डूगर-
मनु शर्मा (असली नाम सिद्धार्थ वशिष्ट, जिसे रिलीज के बाद सिद्धार्थ शर्मा के रूप में भी जाना जाता है) को 1999 में मॉडल जेसिका लाल की दिल्ली में हत्या में दोषी ठहराया गया था। उन्हें 2006 में आजीवन कारावास मिला (2010 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुमोदित) और तिहाड़ जेल में लगभग 17 साल की सेवा की (2018 से कुछ समय अच्छे व्यवहार के कारण खुली जेल में)।
उन्हें अच्छे व्यवहार के आधार पर 2 जून, 2020 को दिल्ली के सजा समीक्षा बोर्ड की सिफारिशों और उपराज्यपाल द्वारा अनुमोदन के बाद समय से पहले रिहा कर दिया गया था। कारणों में जेल में उसकी सुधारकारी गतिविधियां शामिल थीं (जैसे तिहाड़ जेल के कारखाने के कारोबार में सुधार और अपने चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से कैदियों के बच्चों के लिए शिक्षा के वित्त पोषण)
रिलीज के बाद जीवन और गतिविधियाँ (2020 आगे)
2020 में अपनी रिहाई के बाद, मनु शर्मा ने साक्षात्कार में हत्या के लिए सार्वजनिक खेद व्यक्त किया (जैसे, द टाइम्स ऑफ इंडिया को, यह कहते हुए कि उन्हें हर दिन इस घटना का “गहरा अफसोस” है)। उन्होंने कम व्यक्तिगत प्रोफ़ाइल बनाए रखी है, लेकिन शराब और आसवनी क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करते हुए, अपने परिवार के व्यापारिक साम्राज्य में फिर से प्रवेश किया। वह अब व्यापार के संदर्भ में सिद्धार्थ शर्मा द्वारा जाते हैं।
प्रमुख व्यापार वेंचर्स
- पिकैडिली डिस्टिलरीज (पिकैडिली एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड का हिस्सा, चीनी मिलों और कृषि उद्योगों में जड़ों के साथ एक परिवार के स्वामित्व वाला समूह): सिद्धार्थ शर्मा को संस्थापक और एक प्रमुख शेयरधारक / प्रमोटर के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। कंपनी भारत की सबसे बड़ी स्वतंत्र माल्ट स्पिरिट निर्माता है।
- इंद्री व्हिस्की (पिकाडिली डिस्टिलरीज के तहत 2021 में लॉन्च किया गया): यह प्रीमियम भारतीय एकल माल्ट (इंद्री-त्रिनी, पूर्व-बोरबन, फ्रेंच वाइन, और पीएक्स शेरी कास्क में परिपक्व) अत्यधिक सफल हो गया है और इसे वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ते व्हिस्की ब्रांडों में से एक कहा जाता है। इसने अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीते हैं और कंपनी को प्रीमियम स्पिरिट बाजार में प्रमुख रूप से तैनात किया है।
- अंतर्राष्ट्रीय विस्तार: परिवार के व्यवसाय (पिकैडिली एग्रो के माध्यम से) ने पोर्टवाडी, स्कॉटलैंड में एक नई स्कॉच व्हिस्की डिस्टिलरी परियोजना में काफी निवेश किया है (सूचना के अनुसार ~ £ 15 मिलियन) शर्मा की पिछली सजा के कारण यूके में इसे जांच और नियामक सवालों का सामना करना पड़ा है, लेकिन उद्यम कंपनी के ढांचे के तहत आगे बढ़ता है।
रिलीज के बाद रेस्तरां, होटल या अन्य गैर-शराब उद्यम में शामिल होने का संकेत नहीं देता है; उनका ध्यान हरियाणा / पंजाब में परिवार के औद्योगिक आधार का लाभ उठाते हुए आसवनी और व्हिस्की ब्रांड के निर्माण पर है।
जेल के बाद का उनका जीवन विवादास्पद रहा है – कुछ लोग इसे सफल पुनर्वास और उद्यमशीलता के रूप में देखते हैं, जबकि आलोचकों ने शराब से इनकार करने से जुड़ी एक हत्या की विडंबना पर प्रकाश डाला है, जो अब व्हिस्की बिक्री से मुनाफा कमा रहा है, और उसकी प्रारंभिक रिहाई और व्यावसायिक पुनरुद्धार में प्रश्न विशेषाधिकार 2025 तक, वह भारत (मुख्य रूप से हरियाणा / दिल्ली क्षेत्रों) से व्यवसाय में सक्रिय रहता है।




Dinesh Kumar
November 22, 2025 at 6:34 am
इंद्री व्हिस्की का विरोध करना विरोध करने वाले की कुंठा को दर्शाता है अनजाने में गलती हो गई थी तो उसकी सजा भी भुगत चुके हैं अब बाहर आकर जीवन यापन के लिए कुछ ना कुछ तो करना होगा क्या उनका विरोध करके द्वारा उनको एक क्रिमिनल बनाना अच्छा रहेगा इस तरह के कुंठा ग्रस्त लोग दूसरों पर जिंदगी भर कटाक्ष ही करते हैं खुद जिंदगी में कुछ नहीं करते इसके लिए एक गाना याद आ रहा है कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना छोड़ो बेकार की बातों में कहीं भी तो न जाए रैना
Deepak Gupta
November 22, 2025 at 10:33 am
गलती बढ़ी की थी, उसकी सजा भी पूरी की है, उसके बाद बहिष्कार के कोई मायने नहीं, बाकि सबकी सोच अपनी अपनी है
Kumar
November 22, 2025 at 1:48 pm
Why people write like this !! They don’t know anything and just want to write. I think we should boycott such writers
Manoj Kumar Srivastava
November 22, 2025 at 7:21 pm
कोई भी जानते हुए गलती नहीं करना चाहता है और यदि गलती हो गई और उसकी सजा उसने पूरी कर ली है तो उसे अपना जीवन फिर से सम्मान पूर्वक जीने का अवसर मिलना ही चाहिए ।