AI के आने के बाद कंटेंट क्रिएटर्स चाहे वे पत्रकार हों, सोशल मीडिया से जुड़े हों, पीआर या किसी अन्य संबंधित क्षेत्र में कार्यरत हों उनके मन में कई तरह के सवाल और आशंकाएँ हैं। जैसे, AI कितनों की नौकरियाँ ले लेगा, पुराने पेशेवरों का क्या होगा, और नई पीढ़ी के साथ तालमेल कैसे बिठाया जाएगा आदि-आदि।
ऐसे समय में वरिष्ठ पत्रकार डॉ. हेमंत कुमार पांडेय और वरिष्ठ मीडिया शिक्षिका डॉ. प्रभात दीक्षित की पुस्तक Media डॉट AI- AI, Algorithms, and the Future of Media समय की एक बड़ी जरूरत बनकर सामने आती है। यह पुस्तक न केवल मीडिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का परिचय और उसके उपयोग की जानकारी देती है, बल्कि यह गंभीरता से यह समझाने का प्रयास भी करती है कि AI किस तरह मीडिया, न्यूज़रूम और कंटेंट निर्माण की पूरी सोच को जड़ से बदल रहा है।
पुस्तक में इस बात पर स्पष्ट फोकस है कि AI की मदद से पत्रकारिता को कैसे अधिक बेहतर, प्रभावशाली और जिम्मेदार बनाया जा सकता है, तथा पत्रकारों और कंटेंट क्रिएटर्स को भविष्य के लिए कैसे अधिक सक्षम किया जा सकता है। इस पुस्तक को पढ़कर मीडिया में AI की उपयोगिता को व्यावहारिक रूप से समझा जा सकता है। इसमें मीडिया और AI से जुड़े लगभग हर महत्वपूर्ण पहलू पर सरल और स्पष्ट भाषा में विस्तार से चर्चा की गई है।
Media डॉट AI पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता इसकी संतुलित दृष्टि है। लेखकों न तो AI को पत्रकारिता का शत्रु बताया है और न ही उसे किसी चमत्कारी समाधान के रूप में पेश करते हैं। पुस्तक साफ तौर पर यह रेखांकित करती है कि AI एक टूल है, जिसका इस्तेमाल समझदारी, नैतिकता और पेशेवर जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। इसमें विस्तार से बताया गया है कि कैसे एल्गोरिद्म अब खबरों के चयन, हेडलाइन तय करने, ऑडियंस टार्गेटिंग और यहां तक कि कंटेंट लेखन तक में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसमें PR और विज्ञापन से जुड़े लोगों के लिए भी विशेष जानकारी है.
किताब का एक मजबूत पक्ष यह है कि यह प्रिंट (रिपोर्टिंग, डेस्क और एडिटिंग), डिजिटल और ब्रॉडकास्ट मीडिया तीनों के संदर्भ में AI के प्रभाव को सरल और सहज भाषा में समझाती है। न्यूजरूम ऑटोमेशन, डेटा जर्नलिज्म, फैक्ट-चेकिंग टूल्स, डीपफेक और सिंथेटिक कंटेंट जैसे विषयों को व्यावहारिक उदाहरणों के साथ प्रस्तुत किया गया है। इससे यह पुस्तक केवल सैद्धांतिक चर्चा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि कामकाजी पत्रकारों और मीडिया छात्रों के लिए एक उपयोगी गाइड के रूप में सामने आती है।
लेखकों ने AI से जुड़ी नैतिक चुनौतियों पर भी खुलकर चर्चा की है। फेक न्यूज, एल्गोरिद्मिक बायस, मानवीय संवेदनाओं की कमी और संपादकीय स्वतंत्रता पर संभावित खतरे, इन सभी मुद्दों को गंभीरता से रखा गया है। पुस्तक यह सवाल भी उठाती है कि ‘क्या भविष्य में संपादक की जगह एल्गोरिद्म ले सकता है?’ और फिर पाठक को इस निष्कर्ष तक पहुंचने में मदद करती है कि मानवीय विवेक और संपादकीय समझ की भूमिका कभी खत्म नहीं हो सकती।
Media डॉट AI का लेखन प्रवाह सहज, स्पष्ट और संवादात्मक है। तकनीकी शब्दावली को भी इस तरह समझाया गया है कि गैर-तकनीकी पाठक को भी किसी प्रकार की कठिनाई न हो। यही कारण है कि यह पुस्तक सिर्फ पत्रकारों के लिए ही नहीं, बल्कि मीडिया स्टडीज के विद्यार्थियों, कंटेंट क्रिएटर्स, पॉलिसी मेकर्स और तकनीक में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए भी समान रूप से प्रासंगिक बन जाती है। कुल मिलाकर, Media डॉट AI एक ऐसी पुस्तक है जो भविष्य की पत्रकारिता की झलक ही नहीं दिखाती, बल्कि पाठक को उसके लिए मानसिक रूप से तैयार भी करती है।
यह किताब स्पष्ट संदेश देती है कि AI से डरने के बजाय उसे समझना और जिम्मेदारी के साथ अपनाना ही मीडिया की असली ताकत बनेगा। लंदन के ब्लूरोज पब्लिकेशन से प्रकाशित पुस्तक अमेज़ॉन, किंडल, फ्लिपकार्ट, गूगल बुक और ब्लूरोज के ऑफिसियल वेबसाइट से ख़रीदा जा सकता है।



