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एक नामचीन अखबार के मालिक ने एक महिला को शादी का झांसा देकर दैहिक शोषण किया, फिर निकाल बाहर किया

Sumant Bhattacharya : चौबीस साल की पत्रकारिता में यही पाया कि सत्ता में बैठे ज्यादातर मर्दों के लिए अपनी ताकत और ओहदे का आखिरी मकसद सिर्फ औरत का जिस्म हथियाना ही है।सत्ता के ताकत का अंतिम लक्ष्य। यदि कोई आकर्षक महिला नज़र में उतर गई तो यकीन मानिए, बहुतेरे अधिकारी, मंत्री, सांसद, विधायक, संपादक, प्रोफेसर और सीइओ अपनी पूरी मेघा और समूचे कायनात की ताकत उस महिला को जिस्मानी तौर पर हासिल करने में लगा देगा। यहां रेखांकित कर दूं कि तमाम अच्छे इंसान भी इनमें। लेकिन वो नैतिक तौर पर पस्त समाज के सामने खामोश ही बने रहते हैं।

सुमंत भट्टाचार्य

Sumant Bhattacharya : चौबीस साल की पत्रकारिता में यही पाया कि सत्ता में बैठे ज्यादातर मर्दों के लिए अपनी ताकत और ओहदे का आखिरी मकसद सिर्फ औरत का जिस्म हथियाना ही है।सत्ता के ताकत का अंतिम लक्ष्य। यदि कोई आकर्षक महिला नज़र में उतर गई तो यकीन मानिए, बहुतेरे अधिकारी, मंत्री, सांसद, विधायक, संपादक, प्रोफेसर और सीइओ अपनी पूरी मेघा और समूचे कायनात की ताकत उस महिला को जिस्मानी तौर पर हासिल करने में लगा देगा। यहां रेखांकित कर दूं कि तमाम अच्छे इंसान भी इनमें। लेकिन वो नैतिक तौर पर पस्त समाज के सामने खामोश ही बने रहते हैं।

सुमंत भट्टाचार्य

ना जाने कितने ही वाकयात मैं बेहद करीब से जानता हूं, कितने ही मामलों में ऐसी औरतें सामने भी आईँ, लेकिन समाज और मीडिया उनके साथ खड़ा होना तो दूर, हमदर्दी के दो शब्द बोलने को राजी ना हुआ। यदि मीडिया नपुंसक है तो यह समाज उससे कम नपुंसक नहीं है। दरअसल, देर रात को मित्र Yashwant Singh का न्यूज़पोर्टल Bhadas4media.com पढ़ रहा थ। एक नामचीन अखबार के मालिक ने एक महिला को शादी का झांसा देकर दैहिक शोषण किया., फिर निकाल बाहर किया। और हद तो तब हो गई जब जयपुर में उस महिला ने अपने वकील के साथ प्रेस कांफ्रेंस की तो सारे मीडिया जगत को सांप सूंघ गया। चौतरफा सन्नाटा।

नपुंसक मीडिया का एक नमूना कल आप मेरी इस पोस्ट पर भी देखेंगे, मेरे सारे पत्रकार मित्र इस पोस्ट से कुछ यूं बचकर निकलेंगे, कहीं उनके साफ-सुधरे पांव कीचड़ में ना पड़ जाए। मीडिया पर सवर्णों के कब्जे का नारा उछालने वाले भी कल नपुंसकों की भीड़ में शामिल होंगे..सच नारी के बारे में आखिरी सच द्रोपदी की वही पंक्ति है, “जो सबका होता है, उसका कोई नहीं होता।” लेकिन नारी ही असल कसौटी है..इस सियासत और मर्दों की औकात को जांचने की। बस आप में कूवत होनी चाहिए, और मुझे शक है कि यह कूवत आप में होगी।

वरिष्ठ पत्रकार सुमंत भट्टाचार्य के फेसबुक वॉल से.

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2 Comments

2 Comments

  1. Ping

    November 3, 2014 at 3:14 pm

    Sir jab majithia ke liye hi PATRKAAR ek jut nai ho rahe hain jabki PATRKAAR Bhai Jante hain ki ye majithia unke liye hi hai aur usse inke Ghar pariwaar ki financial stithee behtar ho Sakti hai tobhi PATRKAAR log ek jut nahin ho rahe to ye kya khaak kisi mahila ke shoshan ki awaaz uthayenge. Maafi Chahunga lekin Napunsak shabd ka istemaal karna Bhi hamare PATRKAAR bhaiyon ke liye napunsak shabd ki bezzati..! Lag rahi hai is se Bhi neeche ka shabd istemaal karna hoga!!
    Sale Sab ke Sab fattu hain fattu!! Supreme Court maukaa de raha hai aur Sab haanth pe haanth dhar k baithte hain!

  2. rajkumar

    October 28, 2014 at 1:10 pm

    MEDIA NAPUSANK H TOGARIA PAR HAY HALA MACHANE WALE SECULAR VAMPANTHI OVESI PAR CHUP KYON?

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