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सियासत

सरकार क्यों नहीं चाहती कि पूर्व सेना प्रमुख MM नरवणे की किताब छपकर लोगों के सामने आए!

अमिताभ श्रीवास्तव-

सरकार क्यों नहीं चाहती कि पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब ‘Four Stars Of Destiny (फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी)’ छपकर लोगों के सामने आये? जनरल नरवणे कह चुके हैं कि सरकार से मंज़ूरी न मिलने की वजह से पेंग्विन से छपने वाली उनकी किताब अटकी पड़ी है।

यह सवाल अचानक इसलिए अहम हो गया है क्योंकि सोमवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को इस किताब के कुछ हिस्सों का ज़िक्र करने से रोक दिया गया। जनरल नरवणे भारतीय सेना के प्रमुख रहे हैं। सवाल लाज़िमी है कि उनकी अब तक अप्रकाशित इस किताब में ऐसा क्या है जिसके सिर्फ ज़िक्र से लोकसभा में गृहमंत्री और रक्षा मंत्री समेत बीजेपी के तमाम सांसद राहुल गांधी पर पिल पड़े?

जनरल नरवणे देश के बहुत सम्मानित वरिष्ठतम सैनिक अधिकारियों में शामिल हैं, उनकी कोई टिप्पणी देश के खिलाफ तो होने की कल्पना भी नहीं की जा सकती। फिर सरकार एकदम से बौखला क्यों गई?

दरअसल, अंग्रेज़ी और हिंदी में प्रकाशित होने वाली चर्चित पत्रिका ‘Caravan’ के ताज़ा अंक की कवर स्टोरी का शीर्षक है ‘Narvane’s Moment Of Truth’ जिसे सुशांत सिंह ने लिखा है। इस कवर स्टोरी में नरवणे की किताब के हवाले से 2020 में पूर्वी लद्दाख में रेचिन ला की तलफ बढ़ती चीनी सेना की वजह से भारत-चीन सीमा संघर्ष के नाज़ुक हालात में जवाबी कार्रवाई के लिए सरकार की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश न मिलने का ज़िक्र किया गया है। राहुल गांधी पत्रिका में छपे लेख का उल्लेख कर रहे थे जिस पर इतना हंगामा मच गया।

ज़ाहिर है कि उग्र सैनिक राष्ट्रवाद और अपनी बहादुरी का ढोल पीटने वाली सरकार के चीन के साथ एक बहुत महत्वपूर्ण सीमावर्ती विषय पर ढुलमुल रवैये की तस्वीर उजागर होने से असहज स्थिति हो सकती है।

राहुल गांधी ने जाने-अनजाने यह विषय एक बार फिर पब्लिक डोमेन में ला दिया है।

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