संजय शर्मा-
महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे बड़ा अनसुलझा सवाल!
यूपी से आया एक चेहरा… और मुंबई की सत्ता, जमीन, SRA और ठेकों की हर चर्चा में वही नाम!
सवाल ये कि पूरे महाराष्ट्र में “देवा भाऊ” के पोस्टर आखिर किसने लगवाए! और BJP सरकार बनने की तारीख पहले से किस भरोसे पर बताई गई?
क्यों कहा जाता है कि बड़े-बड़े SRA प्रोजेक्ट्स और विवादित जमीनों की चर्चा में एक ही नाम बार-बार सामने आता है!
वर्षा गायकवाड़ हों या गजा भाऊ, सवाल एक ही दिशा में क्यों जाते हैं!
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुंबई में कोई बड़ा जमीन का मामला हो, कोई बड़ा पुनर्विकास प्रोजेक्ट हो, कोई बड़ा ठेका हो, तो मोहित कंबोज का नाम जरूर सुनाई देता है.
लेकिन क्या यह सच है? या फिर सिर्फ सत्ता के आसपास घूमती अफवाहें हैं!
अगर अफवाहें हैं तो इतनी लगातार क्यों हैं! और अगर सच नहीं है तो इन सवालों का जवाब कौन देगा!
जनता जानना चाहती है कि आखिर एक कारोबारी का नाम सत्ता, जमीन और प्रोजेक्ट्स की हर बड़ी चर्चा में बार-बार क्यों आता है?
सवाल मोहित कंबोज से भी है.
सवाल देवेंद्र फडणवीस सरकार से भी है.
क्योंकि लोकतंत्र में ताकत से ज्यादा जरूरी जवाबदेही होती है.
सबसे बड़ा सवाल ये कि चर्चा है अमित शाह, कंबोज को पसंद नहीं करते तो फिर ये खेल क्या है!
प्रकरण पर 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क का एक्स हैंडल लिखता है-
राजनीति में वफादारी नहीं, मौके चलते हैं.. आज जो आपको कंधे पर घुमा रहा है, वही कल आपको जमीन पर घसीटने में सबसे आगे होगा.
लेकिन कहते हैं कि मोहित कंबोज उस नियम से ऊपर हैं. सीएम Devendra Fadnavis के गलियारों में फुसफुसाहट है , ये खिलाड़ी अलग है..
मुंबई की राजनीति का अनलिखा सच बन चुका है ये नाम.
यूपी से आया एक चेहरा, और यहां ऐसा दबदबा कि मंत्री भी लाइन में खड़े दिखते हैं.
बात सिर्फ रसूख की नहीं है, बात है कंट्रोलकी… किसे ठेका मिलेगा, कौन सी बिल्डिंग खड़ी होगी, किस जमीन पर किसका झंडा लगेगा ..
कहते हैं हर रास्ता एक ही दरवाज़े से होकर जाता है.
और तस्वीर देखिए .. एक जेब में सत्ता की चाबी, दूसरी में दौलत का नक्शा.
बीच में खड़ा एक खिलाड़ी, जो सिस्टम को खेल की तरह खेल रहा है. ये कहानी ताकत की नहीं, बेलगाम ताकत की है.
और इतिहास गवाह है ,बेलगाम ताकत की बाद की कहानी खराब होती है!



