आज मंगलवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI) में छत्तीसगढ़ के मृतक पत्रकार मुकेश चंद्राकर को लेकर प्रेस कॉंफ्रेंस का आयोजन किया गया था. जैसा की मुकेश के भाई युकेश ने एक्स के माध्यम से इसके लिए एक अपील भी की थी.
सोशल मीडिया पर इस पीसी की कुछ तस्वीरों को शेयर करते हुए किसने क्या कुछ कहा लिखा है- पढ़ें
श्याम मीरा सिंह-
आज प्रेस क्लब में पत्रकार मुकेश के लिए श्रद्धांजलि सभा हुई। लेकिन ऐसे महसूस हो रहा है कि मुकेश को न्याय दिलाने के लिए हमें कुछ और भी करने की ज़रूरत है। कुछ ना भी हो तब भी एक छोटा सा प्रतिरोध दर्ज होना चाहिए। क्या कोई संगठन जंतर मंतर पर एक People Protest ऑर्गनाइज़ कर सकता है? कुछ नहीं कर पा रहे इसलिए एक अजीब सा गिल्ट आ रहा है मुकेश के लिए।
कुछ न होगा तो कम से कम अपना गिल्ट ही कम होगा। मगर एक पत्रकार की ऐसी जघन्य हत्या हो गई और हम एक सिंबोलिक प्रोटेस्ट भी नहीं कर पाए। ये ख़्याल और बुरा लग रहा है। कुछ ना हो मगर एक तख़्ती लेकर तो खड़े हो ही सकते हैं। मैं ख़ुद भी प्रोटेस्ट कॉल कर सकता हूँ। मगर बहुत लोग तरह तरह की बातें करते हैं। वे करते कुछ नहीं मगर हम कुछ करें तो बातें करते हैं।
इसलिए मैं इसके केंद्र में नहीं रहना चाहता। मगर कोई संगठन, वरिष्ठ व्यक्ति, या कोई तो हो जो प्रोटेस्ट कॉल करे और हम उसमें खड़े लेकर अपना अपराध कम कर सकें। अपनी ग्लानि कुछ हल्की कर सकें। प्लीज़ कोई इसमें सलाह, निर्देश, मदद करिए। प्लीज़ कोई प्रोटेस्ट ऑर्गनाइज़ करिए।
सचिन झा शेखर-
हम सभी पत्रकार, पत्रकार के लिए आवाज उठाने प्रेस क्लब पहुंचे थे। हम लड़ते रहेंगे जरूरत होने पर मुकेश की तरह मरते भी रहेंगे।


रवीश शुक्ला-
छोटे शहरों और ग्रामीण इलाक़ों में पत्रकारिता करना कितना जोखिम भरा है इसका सबूत मुकेश चंद्राकार की मौत है..बस्तर जैसे इलाक़े में एक तरफ़ नक्सली दूसरी तरफ़ आलोचनात्मक रिपोर्टिंग पर प्रशासन की सख्ती यहां काम करना तलवार की धार पर चलना है..मुकेश ने सड़क बनाने में भ्रष्टाचार की रिपोर्ट NDTV के लिए की थी..आज प्रेस क्लब आफ़ इंडिया @PCITweets में इक्ट्ठा होकर पत्रकारों ने मुकेश चंद्राकार को श्रद्धांजलि दी…मुकेश जैसे पत्रकार हमारे आदर्श हैं…



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