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आज के अखबार नहीं बताते कि निर्वासितों को इस बार बेड़ियां थीं या नहीं, स्टेशन पर मरने वालों को मोक्ष…

संजय कुमार सिंह

कुम्भ स्नान से मोक्ष मिलने और पाप धुलने जैसी आस्था और उसके प्रचार के साथ प्रयागराज आने के निमंत्रण के कारण देश के कई रेलवे स्टेशनों पर भारी भीड़ उमड़ने की खबरें सोशल मीडिया पर कई दिनों से थीं। केंद्र सरकार और रेलवे ने दिल्ली में ही कोई व्यवस्था नहीं की थी, इसका पता कल नई दिल्ली स्टेशन पर हादसे से चलता है। शायद प्रभु की यही इच्छा थी और आज दिल्ली के अखबारों के पहले पन्ने पर न सिर्फ खबर है, फोटो भी हैं। यह संपादकीय मजबूरी है। इसपर क्या लिखना। आइये, आज उन खबरों को देखें जो छपी हैं हादसा नहीं होने पर ज्यादा प्रमुखता पातीं या जो सूचनाएं नहीं हैं। जो खबरें हादसे के बावजूद किसी न किसी अखबार में पहले पन्ने पर हैं या लीड है। ऐसी खबरों में सबसे दिलचस्प और जानी-पहचानी खबर, दि एशियन एज में लीड है। यह खबर आनी तो थी ही सरकार के गठन से पहले ही आ गई यह खास है। जो भी हो, खबर का मुख्य शीर्षक है, “सीवीसी ने केजरीवाल के ‘शीशमहल’ मामले में ‘विस्तृत जांच’ का आदेश दिया”। फ्लैग शीर्षक है, सभी घोटालों की जांच की जायेगी; किसी को बख्शा नहीं जायेगा : दिल्ली भाजपा के प्रमुख (जो अभी मुख्यमंत्री नहीं बने हैं और बनेंगे कि नहीं यह तय नहीं हो पा रहा है), आम आदमी पार्टी ने कहा, नकारात्मक राजनीति।

जो भी हो, मामला मुख्यमंत्री निवास का है और आरोप इसमें ज्यादा खर्च करने का है। लेकिन सरकारी पैसा अगर सरकारी घर में खर्च किया गया (बहुत ज्यादा भी हो तो) यह भ्रष्टाचार नहीं हो सकता है। दूसरे, सरकरी अनुमति से ही हुआ होगा और कहा जा सकता है कि सरकारी अनुमति मुख्यमंत्री के दबाव की वजह से मिली। अगर यह साबित भी हो जाये तो मुख्यमंत्री ने ऐसा निजी लाभ के लिए नहीं किया। निजी मकान में खर्च नहीं किया और जिस बंगले में खर्च करने का आरोप है उसे (वैसे ही) छोड़ दिया है और चुनाव हारने से पहले ही इस्तीफा दे दिया था इसलिए यह भी नहीं कहा जा सकता है कि वे उसमें रहने के लिए उतावले थे जैसे भाजपा के कई नेता भिन्न बंगलों में हारने के बाद रहते हैं और रह रहे हैं। यही नहीं, मुख्यमंत्री के घर में अगर ज्यादा खर्च किये जाने का आरोप है तो कैसे तय होगा कि खर्च की गई राशि ज्यादा है या उपलब्ध सुविधाएं ज्यादा है। जाहिर है, दूसरे सरकारी निवास से तुलना करनी पड़ेगी और इनमें प्रधानमंत्री निवास से लेकर भिन्न राज्यों में राजभवन शामिल हैं जहां रहने वाले केंद्र सरकार की सेवा करते रहते हैं। इनका खर्चा सार्वजनिक किये बगैर मुख्यमंत्री के शीश महल में ज्यादा पैसे खर्च किये जाने का आरोप बेमतलब है।

सरकार मीडिया और प्रचारकों के सहयोग से आप को बदनाम करने के लिए इसे मुद्दा बनाये हुए हैं और यह आज की इस लीड से भी स्पष्ट है। विस्तृत जांच में यह निकलकर आ सकता है कि घर में कोई काम ऐसा हुआ हो जिसके पैसे नहीं दिये गये या ठेकेदार ने मुफ्त में किया। अव्वल तो यह रिश्वत या उपहार नहीं होगा और जब प्रधानमंत्री नाम लिखा सूट उपहार लेकर निजी तौर पर धारण कर चुके हैं तो सुविधा लेकर, सरकारी घर में छोड़ देना सीएम केयर्स हो सकता है। यह न तो अपराध है और ना ही बदनाम करने लायक मुद्दा। ना ही इससे हिन्दुओं का कोई हित सधना है या आम आदमी पार्टी गैर हिन्दुओं की है। फिर भी लोग लगे हुए हैं। दि एशियन एज में इस खबर के साथ पहले पन्ने पर भगदड़ की खबर तीन कॉलम में फोटो के साथ छपी है लेकिन शीर्षक में किसी के मरने की खबर नहीं है। ज्यादातर अखबारों ने 15  या ज्यादा लोगों के मरने की खबर दी है। यहां 15 लोगों को अस्पताल ले जाये जाने की खबर है। हादसा इतना भयानक था कि इंडियन एक्सप्रेस में छपी तस्वीर में छह एम्बुलेंस खड़े दिख रहे हैं।

आज की दूसरी बड़ी खबर, 119 अवैध प्रवासियों के साथ अमेरिकी उड़ान फिर अमृतसर पहुंचा है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, पंजाब के मुख्यमंत्री ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि अमेरिका से आने वाले विमानों को अमृतसर में उतार कर पंजाब और पंजाबियों की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से कहा है कि पवित्र अमृतसर शहर को डिपोर्ट सेंटर न बनाया जाये। यह आरोप इंडियन एक्सप्रेस की खबर के साथ पहले पन्ने पर नहीं है। हिन्दू में यात्रियों की दूसरी खेप आने की खबर लीड है जबकि  हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर तीन कॉलम में है। अमर उजाला में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है और विज्ञापन के बाद जो जगह बची है उसमें स्टेशन पर हुए हादसे की खबर और तस्वीरें हैं। टेलीग्राफ में दिल्ली हादसे की खबर दो कॉलम में है जबकि फोटो तीन कॉलम की है। यहां लीड आज की तीसरी बड़ी खबर है, फडनविस ने योगी जैसा किया, लव जिहाद से संबंधित कानून पर नजर। आज की खबर अथवा फोटो से यह पता नहीं चल रहा है कि इस बार आये लोग बेड़ियों में थे या नहीं। पिछली बार पत्रकारों को हवाई अड्डे पर नहीं जाने दिया गया था। इस बार क्या हुआ पता नहीं चला। नवोदय टाइम्स ने बताया है कि निर्वासितों को लेने मुख्यमंत्री मान और केंद्रीय मंत्री बिट्टू अमृतसर पहुंचे। 

नवोदय टाइम्स में आशुतोष त्रिपाठी की बाईलाइन वाली एक खबर, “दिल्ली का सीएम कौन? रेस में इतने सारे नाम!” है। इस खबर के साथ हाइलाइट किया हुआ हिस्सा है, मुख्यमंत्री के लिए इतना मंथन किसी प्रदेश में पहले कभी नहीं हुआ, आठ दिन बीते, अब तक पार्टी ने नहीं किया किसी तरह का एलान और  विधायक दल की बैठक कल या परसों, अभी तारीख घोषित नहीं। इन सूचनाओं से आप समझ सकते हैं कि इसमें खबर क्या है और प्रचार है कि नहीं। इसमें सीएम पद की दौड़ में शामिल लोगों के नाम भी बताये गये हैं और ये 13 नाम हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि बहुत ज्यादा है। इस तरह, दिल्ली के मुख्यमंत्री के चयन, दौड़ में शामिल लोगों के नाम और शीश महल तथा गैर जरूरी मुद्दे तो आज अखबारों में हैं पर निर्वासितों से संबंधित आवश्यक विवरण नहीं है। दूसरी खेप को बेड़ियां लगी थीं या नहीं, स्टेशन पर मरने वालों को मोक्ष मिला या नहीं …जैसी सामान्य खभरें भी नहीं ।

हिन्दुस्तान टाइम्स में एक कार और बस की टक्कर में 10 कुम्भ श्रद्धालुओं के मारे जाने की खबर है। आप जानते हैं कि कुम्भ में मची भगदड़ में मरने वालों की सही संख्या अभी तक जारी नहीं की गई है। घायलों के नाम पते भी नहीं हैं। तमाम लोग प्रियजनों का पता लगाने से लेकर मृत्य प्रमाण पत्र तक के लिए भटक रहे हैं। ट्रेन में आरक्षण न मिले, यातायात जाम होने की खबरों आदि के कारण यात्रा  मुश्किल है। एक बाबा दावा कर रहे थे कि कुम्भ में मरे लोगों को मोक्ष मिला है। अब कुम्भ नहाने के प्रयास में जो लोग प्रयागराज नहीं पहुंच पाये, नई दिल्ली स्टेशन पर या रास्ते में कहीं सड़क दुर्घटना में कहीं मर गये उनका क्या हुआ, उन्हें मोक्ष मिला या नहीं अथवा मिलने के लिए क्या करना चाहिये। यह सब अखबारों में नहीं है। मुझे याद है, पहले, रेल हादसे होते थे तो कंट्रोल रूम बनाया जाता था उसके फोन नंबर सार्वजनिक  किये जाते थे। अब ऐसा कुछ नहीं होता है। आज भी नहीं है। हिन्दुओं के हितों का ख्याल रखने वाली सरकार इस तरह मोक्ष पाने या नहीं पाने वालों का हिसाब रख रही कि नहीं और नहीं रख रही है तो क्यों जैसे सवालों का जवाब नहीं है।

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