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सुख-दुख

नमाज अदा करने से भी होता है पूर्ण व्यायाम!

मेरी राय में मेडिकल साइंस की नज़र से योग दिवस के लिये मुसलमानो का कोई विरोध नही, आपत्ति है तो सिर्फ सूर्य नमस्कार और उसमे पढे जाने वाले श्लोक पर…सूर्य नमस्कार में सूरज को पूजा जाता है और इस्लाम अल्लाह के सिवाए किसी को पूजने कि इजाज़त नहीं देता। इस्लाम धर्म के अनुसार सूरज, चाँद, तारे, धरती, समंदर, नदी, पर्वत, पेड़, पौधे, जानवर, जल, अग्नि, वायु एवं सभी प्राकृतिक चीज़ें एक ईश्वर की रचनाएं हैं जो मनुष्यों के उपयोग जरूरतों के लिये ईश्वर द्वारा निर्माण किये गये है। इसलिये मुसलमान इन चीजों का आदर करते है लेकिन इसे ईश्वर नही मानते।

इस संबंध में पूर्व में दिए गए अपने बयान में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी एवं योग गुरु बाबा राम देव ने भी कहा है कि ज़रूरी नही की योग करते वक़्त “ओम” शब्द का ही उच्चारण हो अपितु योग के दौरान आपकी जिस भी धर्म मान्यता है उसका पवित्र शब्द उपयोग कर सकते हैं। आइये तुलनात्मक अध्यन के माध्य्म से जानते हैं योग और नमाज़ के माध्य्म से कैसे अपने शरीर को चुस्त और तंदुरुस्त रखा जा सकता है।

वर्तमान में व्यस्त और भौतिक सुखों में उलझी जीवनशैली में व्यायाम कहीं गुम हो गया है। योग और नमाज़ को संपूर्ण एक्सरसाइज के साथ-साथ अपने-अपने धर्म की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इबादत भी कहा जाए तो बेहतर होगा। मसलन- योगासान और नमाज़ के दौरान होने वाली शारीरिक गतिविधि में भी फिजिकल फिटनेस शामिल है। अगर पूरा ध्यान दिया जाए सारी बात खुद ब खुद समझ आ जाती है। हां, अगर किसी को सीधे आसान लगवा दिया जाए तो कष्टकारी भी हो सकता है। इसलिए स्टेप बाई स्टेप ही आगे बढ़ने में फायदा है।

नमाज अदा करने के दौरान होने वाली मूवमेंट शरीर को कुछ इस तरह से चुस्त दुरुस्त रखती है!

1- नियत बांधने का वैज्ञानिक फायदा-जब दायां हाथ बांये हाथ पर रखते हैं, दायीं हथेली के अंगुठे व तर्जनी से बांये हाथ की कलाई के छोर पर दबाव बना कर नाभि के पास उसे रखने से पूरा नर्वस सिस्टम रिलेक्स होता है। प्रेम को बढ़ावा मिलता है और ध्यान लगता है। ये एक्सरसाइज रीढ की हड्डी को रिलेक्स करता है। मसल्स कोआर्डिनेशन को संतुलित करता है।

2- रुकू अर्थात झुकना या अर्द्धशीर्षासन-यह स्थिति कमर की मांसपेशियों को मजबूत करती है। हैमिस्ट्रिंग व काफ मसल्स को मज़बूती मिलती है और दर्द से राहत मिलती है। ये क्रिया घुटने के लुब्रिकेंट गूदे को मोबिलाइज कराती है।

3- खड़े होना दोबारा-इसमें नार्मल सांस ली जाती है यानि कि योगा की भाषा में क्रिया कहा जाता है। मस्तिष्क को आराम मिलता है।

4- सजदा पढ़ते वक्त आधा शीर्षासन। इसके जरिये दिमाग तेज होता है। ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है। आंख, नाक व कान की बीमारियों से बचाव, सिर में दर्द और चक्कर आने से राहत मिलती है। पाचन क्रिया दुरुस्त होने से जैसे शारीरिक फायदे।

5- बृजासान जैसी पोजीशन में बैठना- पाचन दुरुस्त करता है। आमतौर पर इसे खाना खाने के बाद किया जाता है, जिससे शरीर अम्लीय क्षार को सही तरीके से छोड़ता है। वायु और कब्ज के विकार को दूर करने में बेहद मददगार।

6- प्रथमा अंगुली को ऊपर उठाना-अंगुली उठाने से ब्लड प्रेशर संतुलित होता है। पूरे शरीर को बड़ी राहत मिलती है।

7- सलाम फेरना या गर्दन को बांयी से दांयी ओर घूमना- सरवाइकल के दर्द के लिये सबसे बेहतर एक्सरसाइज- गर्दन की मांसपेशियां मजबूत होती है तथा टिप्रीजियस मसल्स को मजबूत और सक्रिय करता है। जिससे कंधे की तमाम बीमारियों से मुक्ति मिलती है और उसकी मोबिलिटी को बढ़ाता है।

डॉ एस.ई. हुदा
डायरेक्टर, पेन मैनेजमेंट एंड स्पोर्ट्स इंज्यूरिस
क्लेरा स्वैन मिशन हॉस्पिटल बरेली।

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