बंगाल में भाजपा मजबूत हुई बताने में कई दिनों से लगे लोगों ने आज नहीं बताया है कि तमिलनाडु में मुख्यमंत्री ने शपथ लेने के बाद कहा – वास्तविक, धर्मनिरपेक्ष न्याय के एक नए युग की शुरुआत हुई है।
संजय कुमार सिंह
बंगाल जीतने या तृणमूल कांग्रेस को हराने के बाद उत्तर प्रदेश में सत्ता पर भाजपा की पकड़ बनाए रखने के उद्देश्य से मंत्रिमंडल विस्तार किया गया है। हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार, योगी ने अगले साल के अहम चुनावों से पहले अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार यह सभी जातियों की टीम है। आप जानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी और उसकी ईडी-सीबीआई शाखाओं ने पंजाब में कार्रवाई शुरू कर चुकी है। प्रधान सेवक का चुनाव प्रचार जारी है। सरकारी खर्चे पर भाजपा का चुनाव प्रचार करते हुए प्रधानमंत्री ने कांग्रेस को परजीवी कहा है और हिन्दुस्तान टाइम्स ने पहले पन्ने पर चार कॉलम में छापा है। अमर उजाला की सिंगल कॉलम की खबर का शीर्षक है, प्रधानमंत्री ने रेवंत से कहा – बेहतर होगा कि आप मेरे साथ ही आ आएं। इस तरह तेलंगाना में इसी परजीवी पार्टी के मुख्यमंत्री, रेवंत रेड्डी को प्रधानमंत्री ने खुलेआम दल बदलने की पेशकश की। खबर के अनुसार, तेलंगाना में 9,400 करोड़ की परियोजनाओं के लोकार्पण व शिलान्यास कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुखातिब मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने जब तेलंगाना के लिए केंद्र से समर्थन मांगा, तो पीएम ने मजाकिया अंदाज में तंज कसा कि जैसे मनमोहन सिंह ने गुजरात के लिए किया था? पीएम मोदी ने कहा, मैं रेवंत रेड्डी से कहना चाहता हूं कि सरकार 10 वर्षों में गुजरात को जो कुछ भी दिया, मैं आपको भी देने को तैयार हूं, लेकिन मुझे पता कि ऐसा करते ही आपको जो सहायता मिल रही है, वह आधी हो जाएगी। आप अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाएंगे। इसलिए बेहतर यही होगा कि आप मेरे साथ ही आ जाएं।
स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री राज्यों को केंद्र की सहायता देने में भेदभाव स्वीकार कर रहे थे। दलबदल और सरकार गिराने जैसे काम कर रहे हैं। सरकारी खर्चे पर मजाक करने का अधिकार उन्हें कब कैसे मिला, मैं नहीं जानता। जो कहा वह खुलेआम कहा। इसका वीडियो कल शाम से ही वायरल है लेकिन खबर मुझे वैसे नहीं दिखी जैसा मामला है। भ्रष्टाचार के आरोपी और आयातित शुभेन्दु अधिकारी को पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री बनाने के बाद भाजपा ने पहले के आयातित और भ्रष्टाचार के आरोपी हिमंत बिस्व सरमा को ही मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया है। देशबन्धु, नवोदय टाइम्स के साथ यह खबर द हिन्दू में पहले पन्ने पर है। संयोग हो या प्रयोग, प्रधानमंत्री ने यह सब उसी दिन किया जब देशवासियों से यह अपील करनी पड़ी कि पेट्रोल डीजल संयम से उपयोग करें… एक साल तक सोने की गैर जरूरी खरीद से बचें। यह देश में भाजपा और कई राज्यों में डबल इंजन सरकार होने के अच्छे दिन का उदाहरण है। यह तो हुई पहले पन्ने की खास खबरों की बात।
आप जानते हैं कि, चार मई को पांच राज्यों में चुनाव के नतीजों के बाद बंगाल में भाजपा की जीत का प्रचार चलता रहा। आज, अखबारों ने यह नहीं बताया है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने शपथ लेने के बाद कहा है कि, वास्तविक, धर्मनिरपेक्ष न्याय के एक नए युग की शुरुआत हुई है। इंडियन एक्सप्रेस की लीड का शीर्षक आज यही है जो मेरे किसी और अखबार में नहीं है। तमिलनाडु में सी जोसेफ विजय के शपथ लेने की खबर लीड या सेकेंड लीड है। लेकिन द टेलीग्राफ की सेकेंड लीड हिन्दुस्तान टाइम्स में चार कॉलम में छपी है। हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर सरकार के प्रचार की तरह छपी है इसलिए चार कॉलम में है। द टेलीग्राफ की सेकेंड लीड दो कॉलम की है और सरकार या प्रधानमंत्री के कहे का प्रचार नहीं है इसलिए लीड है, भले दो ही कॉलम में है। इसे रेखांकित करना जरूरी है क्योंकि पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत के बाद से भाई लोगों ने यह एलान कर दिया था कि द टेलीग्राफ भगवा हो गया। मुझे लगता है जीत की खबर देना भगवा होना नहीं है। खबर लिखने की शैली भी कारण रही होगी। इसलिए आज शैली की ही बात करूंगा। टेलीग्राफ की खबर का शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होगा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने द्रमुक की पीठ में छुरा घोंपा। नई दिल्ली डेटलाइन से विशेष संवाददाता की खबर इस प्रकार है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को “सत्ता की भूखी” कांग्रेस पर अपने लंबे समय के सहयोगी द्रमुक की “पीठ में छुरा घोंपने” का आरोप लगाया और इंडिया गठबंधन के भीतर की दरार को गहरा करने की कोशिश की। कांग्रेस ने तमिलनाडु चुनाव द्रमुक के साथ मिलकर लड़ा था, लेकिन नतीजों के बाद उसे छोड़ दिया और अभिनेता से राजनेता बने जोसेफ विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ को समर्थन देने का एलान किया। इससे उसे सरकार बनाने में मदद मिली। नरेन्द्र मोदी की यह टिप्पणी उस दिन आई जब विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और राहुल गांधी भी वहां मौजूद थे। इस घटनाक्रम ने राहुल और विजय के बीच बढ़ती नजदीकी को उजागर किया। वैसे, नौ सदस्यों वाले मंत्रिमंडल में कांग्रेस के किसी भी विधायक को शामिल नहीं किया गया है।
बेंगलुरु में भाजपा की एक रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, “कांग्रेस को जब भी पहला मौका मिलता है, वह अपने ही सहयोगियों को धोखा देती है। तमिलनाडु की स्थिति ही देख लीजिए।” उन्होंने आगे कहा, “पिछले 25-30 सालों से कांग्रेस और द्रमुक के बीच घनिष्ठ संबंध रहे हैं। एक सहयोगी के तौर पर, द्रमुक ने कांग्रेस को कई बार संकटों से बाहर निकाला है… लेकिन जैसे ही सत्ता का खेल बदला, सत्ता की भूखी कांग्रेस ने पहला मौका मिलते ही द्रमुक की पीठ में छुरा घोंप दिया।” कांग्रेस को एक “परजीवी ताकत” बताते हुए मोदी ने कहा: “अब, कांग्रेस को राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बने रहने के लिए एक और पार्टी की जरूरत है, एक ऐसी पार्टी जिसकी पीठ पर सवार होकर वह आगे बढ़ सके।” रवि शंकर के ‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’ की 45वीं वर्षगांठ समारोह के सिलसिले में बेंगलुरु दौरे के दौरान, कर्नाटक की सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस पर मोदी का यह हमला — 2028 के विधानसभा चुनावों के लिए एक शुरुआती चुनावी बिगुल जैसा प्रतीत हुआ। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब द्रमुक लोकसभा में कांग्रेस से अलग बैठने की व्यवस्था की मांग कर रही है। द्रमुक ने कांग्रेस पर “धोखाधड़ी” और “पीठ में छुरा घोंपने” का आरोप लगाया है, और कहा है कि कांग्रेस तमिलनाडु में वही कर रही है “जो भाजपा अन्य राज्यों में करती है।” खबर का यह वाक्य गौर करने लायक है। वैसे तो प्रधानमंत्री को द्रमुक की ओर से कांग्रेस के खिलाफ कुछ बोलने की जरूरत ही नहीं थी और बोला तो द्रमुक ने जो कहा उसका भी ख्याल रखते। द्रमुक ने कहा है तो यूं ही नहीं कहा होगा और ऐसे तमाम उदाहरण हैं जब इंडिया गठबंधन में मतभेद रहे और इसका फायदा भाजपा को हुआ।
हाल के चुनाव में भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस को भले चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट की मदद से हराया हो पर आंकड़े गवाह हैं कि कांग्रेस और वामपंथी चुनाव मैदान में नहीं होते तो तृणमूल और भाजपा के चुनावी नतीजे कुछ औऱ हो सकते थे। ऐसे में प्रधानमंत्री को चाहिए कि वे बंगाल में कांग्रेस पर तृणमूल को ‘धोखा’ देने का भी आरोप लगाएं लेकिन कांग्रेस के इस कथित धोखे से भाजपा को फायदा हुआ है। शायद इसलिए वे इसपर नहीं बोल रहे हैं। इसके अलावा यह उनकी राजनीति हो सकती है। इसलिए सब समझते हैं। हालांकि प्रधानमंत्री ने कहा है तो खबर है ही। इसीलिए यह खबर हिन्दुस्तान टाइम्स में चार कॉलम में छपी है। मोटा-मोटी खबर यही है लेकिन प्रधानमंत्री विपक्षी दल को परजीवी कहें और खुद कांग्रेस विरोध पर ही टिके हुए हैं। वरना 2014 का चुनाव जीतने के बाद अपने काम के दम पर उन्होंने शायद ही कभी कहीं किसी से वोट मांगा हो। वोट कैसे मिलता है वह अलग बात है और अगर द्रमुक की चिन्ता कर रहे हैं तो द्रमुक ने भी उनके बारे में कुछ कहा है जो संपादकों को तो मालूम होगा ही मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री का बिलावजह प्रचार करने और उनके झूठ या कुतर्कों को प्रचार देने से पहले सोचने का समय आ गया है। टेलीग्राफ ने प्रधानमंत्री की तारीफ नहीं की है। उसने तथ्य बताया है लेकिन हिन्दुस्तान टाइम्स का शीर्षक तो प्रधानमंत्री के कहे का प्रचार है। द टेलीग्राफ की लीड विजय के शपथग्रहण की खबर है। इसमें बताया गया है कि समारोह में वंदे मातरम गीत पूरा गाया गया।
आज की एक खबर सोना नहीं खरीदने और तेल बचाने की मोदी की अपील भी है। अमर उजाला और नवोदय टाइम्स में यह लीड है। देशबन्धु की एक खबर यह है कि केरल में मुख्यमंत्री कौन होगा – का फैसला नहीं हुआ है और अभी भी मुख्यमंत्री के नाम को लेकर संशय बरकार है। जाहिर है, यह भी खबर है। लेकिन कई अखबार ऐसी खबर नहीं देते रहे हैं तो कांग्रेस को नाम तय करने में देरी हो रही हो तो वह भी खबर नहीं है जबकि जरूर होना चाहिए था। नवोदय टाइम्स की लीड, सोना नहीं खरीदने और ईंधन का उपयोग कम करने की प्रधानमंत्री की अपील है लेकिन विजय के शपथग्रहण की खबर साथ में लगभग बराबर में है। शीर्षक के अनुसार, तमिलनाडु के मुख्य मंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद विजय ने कहा, सत्ता का एकमात्र केंद्र मैं रहूंगा। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ही होंगे यह खबर द हिन्दू में है जो टाइम्स ऑफ इंडिया और हिन्दुस्तान टाइम्स में इतनी प्रमुखता से नहीं है। इसकी जगह यहां उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल विस्तार की खबर है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर का शीर्षक है, हर जाति की टीम योगी ने 3 ओबीसी, 2 दलित, 1 ब्राह्मण को यूपी के मंत्री के रूप में शामिल किया। कहने की जरूरत नहीं है कि कई अखबारों की राजनीति प्रधानमंत्री का समर्थन करने से ही चलती है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल–चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।



