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उत्तराखंड

कैलाश यात्रा के पौनी और पोटर्स ने मांगी 20 प्रतिशत ज्यादा मजदूरी

पिथौरागढ़ : उत्तराखण्ड पौनी एवं पोटर्स यूनियन ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर कैलाश मानसरोवर यात्रा में मजदूरी करने वाले पौनी एवं पोटर्स की मजदूरी में 20 प्रतिशत वृद्धि करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में पोटर्स तथा घोड़ों के लिए सामान ढोने का वजन भी कम करने की आवश्यकता है। यूनियन ने चेतावनी दी है की अगर मजदूरी में वृद्धि तथा वजन कम करने के मामले में तत्काल कदम नहीं उठाया गया तो कैलाश यात्रा के पहले दल को धारचूला में रोका जायेगा। 

पिथौरागढ़ : उत्तराखण्ड पौनी एवं पोटर्स यूनियन ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर कैलाश मानसरोवर यात्रा में मजदूरी करने वाले पौनी एवं पोटर्स की मजदूरी में 20 प्रतिशत वृद्धि करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में पोटर्स तथा घोड़ों के लिए सामान ढोने का वजन भी कम करने की आवश्यकता है। यूनियन ने चेतावनी दी है की अगर मजदूरी में वृद्धि तथा वजन कम करने के मामले में तत्काल कदम नहीं उठाया गया तो कैलाश यात्रा के पहले दल को धारचूला में रोका जायेगा। 

यूनियन के केन्द्रीय संयोजक जगत मर्तोलिया ने जिलाधिकारी सुशील कुमार को इस आशय का ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा में यात्रियों का सामान ले जाने और गाइड के रूप में कार्य करने वाले पौनी एवं पोटर्स को अभी भी सम्मानजनक मजदूरी नहीं मिल पा रही है। इस वर्ष मजदूरी में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाय। इसके लिए जिलाधिकारी से तत्काल कार्यवाही की मांग की गयी। मर्तोलिया ने कहा कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में वर्तमान समय में पोटर्स के लिए 24 किलो तथा घोड़ों के लिए 60 किलों वजन ढोने की व्यवस्था का नियम है। उच्च हिमालयी क्षेत्र में ऑक्सीजन की कमी होने के कारण अत्यधिक वजन का नियम के चलते मजदूरों तथा घोड़ो को सांस लेने में दिक्कत होती है। इस कारण प्रतिवर्ष कई मजदूरों तथा घोड़ो की अकाल मौत हो जाती है। 

यूनियन की ओर से डीएम के सम्मुख यह मांग रखी गयी कि उच्च हिमालयी क्षेत्र के लिए पोटर्स के लिए 15 किलो तथा घोड़ो के लिए 50 किलो वजन ढोने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाय ताकि वजन  ढोने में मजदूरों और घोड़ो को अपनी जान न देनी पड़े। मर्तोलिया ने कहा कि मंहगाई और आपदा के बाद उच्च हिमालयी क्षेत्र में एक बार के सादे खाने की खुराक का मूल्य 200 रूपये हो गया है। कैलाश यात्रा में जाने वाले मजदूरों को अभी तक जो मजदूरी मिल रही है, उससे उनका आर्थिक शोषण हो रहा है। कैलाश यात्री जिलाधिकारी द्वारा तय की गयी मजदूरी का ही भुगतान करते हैं। 

कैलाश यात्रियों ने भी कई बार मजदूरी में वृद्धि करने का सुझाव कुमांयू मण्डल विकास निगम को दिया। मर्तोलिया ने कहा कि अगर जिलाधिकारी ने मजदूरी में वृद्धि करने तथा उच्च हिमालयी क्षेत्र के लिए वजन कम करने का फैसला तत्काल नहीं लिया तो धारचूला क्षेत्र के सैकड़ों पौनी और पोटर्स यात्रा के पहले दल को आधार शिविर धारचूला में ही रोक देंगे। इसकी सूचना प्रदेश के मुख्यमन्त्री और राज्यपाल को भी दे दी गयी है। 

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