पटना। ट्रेनें लेट होने से परेशान यात्रियों की दुश्वारियों को दिखाने पहुंचे प्रभात खबर के दो पत्रकारों के साथ रविवार को पटना जंक्शन पर आरपीएफ जवानों द्वारा बदतमीजी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कवरेज के दौरान न सिर्फ पत्रकारों से बहस और धक्का-मुक्की की गई, बल्कि उनका मोबाइल फोन छीनकर रिकॉर्ड किए गए वीडियो सबूत मिटाने की भी कोशिश की गई।
कोहरे के कारण घंटों देरी से चल रही ट्रेनों में फंसे यात्रियों की परेशानी को दिखाने के लिए दोनों पत्रकार पटना जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर मौजूद थे। इसी दौरान दिल्ली-कामाख्या ब्रह्मपुत्र मेल स्टेशन पर पहुंची। ट्रेन से उतरे यात्रियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं रिकॉर्ड की जा रही थीं।
वीडियो बनाने से रोका, मोबाइल छीनने की कोशिश
इसी बीच कई आरपीएफ जवान मौके पर पहुंचे और पत्रकारों से उलझने लगे। बिना कोई ठोस कारण बताए वीडियो रिकॉर्डिंग रोकने की कोशिश की गई और मोबाइल फोन छीनने का प्रयास किया गया। पत्रकारों का कहना है कि वे केवल यात्रियों की परेशानी दिखा रहे थे, रेलवे के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं कर रहे थे।
मौके पर एक बुजुर्ग महिला स्लीपर कोच में चढ़ने के लिए मदद मांग रही थी, लेकिन जवानों ने उसकी सहायता करने के बजाय पत्रकारों से बहस जारी रखी। इसके बाद पत्रकारों को जबरन आरपीएफ थाना ले जाया गया, जहां उन्हें करीब 45 मिनट से एक घंटे तक बैठाकर रखा गया।
थाने में गाली-गलौज और धमकी का आरोप
पत्रकारों के मुताबिक, थाने में उनके साथ लगातार बदसलूकी की गई। उन्हें गाली-गलौज का सामना करना पड़ा और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। बार-बार पूछने के बावजूद यह नहीं बताया गया कि उनकी गलती क्या है। पहचान पत्र दिखाने के बाद भी जवान मजाक उड़ाते रहे और जेल भेजने की धमकी देते रहे।
आरोप है कि हाथ में खाने का टिफिन लिए एक आरपीएफ जवान ने कहा, “तुम्हारी कोई औकात नहीं है। मेरी औकात देखनी है तो वर्दी उतारने के बाद शाम चार बजे के बाद मिलो।” इस दौरान पत्रकार लगातार यह समझाने की कोशिश करते रहे कि वीडियो में रेलवे के खिलाफ कुछ भी नकारात्मक नहीं है, बल्कि यात्रियों की वास्तविक परेशानी ही दिखाई जा रही है।
प्रचार के समय बुलावा, सवाल उठाने पर आपत्ति क्यों?
पत्रकारों ने सवाल उठाया है कि जब रेलवे बोर्ड के निर्देश पर वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों के उद्घाटन व प्रचार के लिए मीडिया को बाकायदा आमंत्रण भेजे जाते हैं, स्टेशन पर कवरेज और रील-वीडियो बनाने की अनुमति दी जाती है, तो फिर यात्रियों की समस्याएं दिखाने पर इस तरह का व्यवहार क्यों? जिन पत्रकारों के साथ बदसलूकी हुई, वे पहले भी रेलवे की कई प्रमोशनल यात्राओं का हिस्सा रह चुके हैं।
आरपीएफ इंस्पेक्टर का बयान
पटना जंक्शन आरपीएफ इंस्पेक्टर अजय शंकर पटेल ने फोन पर बताया कि उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं है। हालांकि, उन्होंने कहा कि जानकारी मिलने के बाद मामले की जांच कराई जाएगी।



