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वैश्विक उथल-पुथल के बीच प्रेस फ्रीडम पर मंथन, IWPC में पैनल चर्चा

नई दिल्ली। भारतीय महिला प्रेस कोर (IWPC) द्वारा विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शनिवार को एक महत्वपूर्ण पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। “वैश्विक उथल-पुथल के बीच प्रेस स्वतंत्रता की सुरक्षा” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में देश-विदेश के वरिष्ठ पत्रकारों और मीडिया विशेषज्ञों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत IWPC की अध्यक्ष सुजाता राघवन ने स्वागत संबोधन के साथ की। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में प्रेस की स्वतंत्रता कई मोर्चों पर चुनौती झेल रही है। युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता, बढ़ती सेंसरशिप और डिजिटल हस्तक्षेप के कारण पत्रकारों का काम पहले से अधिक कठिन हो गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र के सुदृढ़ संचालन के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता अनिवार्य है। पैनल चर्चा में प्रेस एसोसिएशन के अध्यक्ष सी.के. नाइक, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के महासचिव राघवन श्रीनिवासन तथा साउथ एशिया के फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब के अध्यक्ष डॉ. वाइल अव्वाद मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए।

सी.के. नाइक ने विस्तार से कहा कि आज कई देशों में ऐसे नए कानून और नियामक ढांचे लागू किए जा रहे हैं, जिनके जरिए पत्रकारों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस प्रवृत्ति पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना होगा और संस्थागत स्तर पर भी उनके संरक्षण के लिए ठोस व्यवस्था बनानी होगी।

राघवन श्रीनिवासन ने मीडिया की विश्वसनीयता पर जोर देते हुए कहा कि आज के दौर में फेक न्यूज और भ्रामक सूचनाओं की बाढ़ ने पत्रकारिता की साख को चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि मीडिया संस्थानों को आत्मनियंत्रण, तथ्यपरकता और नैतिकता को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैल रही सूचनाओं के बीच सत्यापित खबरों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।

डॉ. वाइल अव्वाद ने संघर्ष और युद्ध क्षेत्रों में काम करने वाले पत्रकारों की स्थिति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे इलाकों में रिपोर्टिंग करना न केवल शारीरिक रूप से खतरनाक होता है, बल्कि मानसिक दबाव भी अत्यधिक होता है। इसके बावजूद पत्रकार सच्चाई को दुनिया के सामने लाने का काम करते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पत्रकारों की सुरक्षा के लिए मजबूत तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के दौरान एआई आधारित दुष्प्रचार, ऑनलाइन ट्रोलिंग और सोशल मीडिया के प्रभाव पर भी गहन चर्चा हुई। वक्ताओं ने चिंता जताई कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए फर्जी सामग्री तैयार कर उसे तेजी से फैलाया जा रहा है, जिससे समाज में भ्रम और अविश्वास की स्थिति बन रही है।

अंत में IWPC की महासचिव सरोज धूलिया ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि इस तरह के संवाद और विचार-विमर्श से प्रेस की स्वतंत्रता को मजबूत करने की दिशा में सार्थक पहल होती है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पत्रकारों और मीडिया से जुड़े लोगों ने भाग लेकर अपने विचार साझा किए।

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