पुण्य प्रसून बाजपेई-
पहले सीबीआई…अब इनकम टैक्स… जब NDTV प्रणय राय के खिलाफ सारे आरोप फ़र्ज़ी.. तो ADANI को NDTV वापस प्रणय राय को कर देना चाहिए!
कृष्णकांत-
छापे, ईडी, सीबीआई, मुकदमा… खूब तमाशा हुआ। खूब आरोप लगे। खूब शिकंजे कसे गए। खूब दांव पेंच लगाए गए। आखिरकार NDTV अपने कर्ज के जाल में फंस गया और उसे अडानी ने खरीद लिया।
आज दिल्ली हाईकोर्ट ने NDTV के मालिक एवं प्रमोटर प्रणव रॉय और राधिका रॉय के खिलाफ आयकर नोटिस को रद्द कर दिया और आयकर विभाग पर 2 लाख का जुर्माना लगाया।
लेकिन एक सबसे अच्छे चैनल को बर्बाद करने का जो अपराध हुआ, उन अपराधियों का क्या? सच में कभी न्याय हो सकेगा?
इतिहास गवाह है। 2016 में अडानी की नज़र NDTV पर पड़ी। 2017 के बाद NDTV पर बार बार छापे पड़े। चैनल को आख़िरी साँस तक निचोड़ने की पूरी व्यवस्था की गई। धमकी। केस। दबाव। और अंत में सौदा। NDTV सवाल पूछता था, इसलिए कुचला गया। खरीदार, मोदी सरकार का चहेता अडानी। 7 साल बाद अदालत बोली, सबूत शून्य। IT विभाग पर ₹2 लाख जुर्माना। मतलब गुनाह पत्रकारिता थी। दलाली आते ही पाप धुल गया।- विजय सिंह, अधिवक्ता

तन्मय-
Regime’s Tax Terror on NDTV – Why No Jail for the Guilty Officers?
This Delhi HC verdict QUASHES bogus tax notices against Prannoy Roy & Radhika Roy, slaps ₹2L fine on IT Dept. But it’s TOO LATE—NDTV’s already in Adani’s Pocket!
THE DIRTY PLAYBOOK TO CRUSH FREE PRESS… Fabricate cases on Settled issues – Harass with Attachments & Endless Lawsuits – Bleed them dry for 6+ years – Force fire-sale to Crony billionaire – Courts rule “Unconstitutional” AFTER the Takeover
Institutional ASSASSINATION of Journalism! IT Dept Weaponized to Kill the Fourth Estate.
₹2L Penalty? That’s a JOKE—Prosecute these Officers for Betraying the Constitution!

रोशन राय-
घटनाक्रम कुछ यूँ रहा :
- वर्ष 2016 में अडानी समूह की नजर एनडीटीवी पर पड़ी।
- 2017 के बाद एनडीटीवी पर लगातार छापेमारी और जांच का सिलसिला शुरू हुआ।
- चैनल को हर तरह से आर्थिक और संस्थागत दबाव में लाने की कोशिश की गई, ताकि वह आख़िरी सांस तक सिमट जाए।
- एनडीटीवी के संस्थापक प्रणय रॉय ने दबाव के आगे झुकने से इनकार किया और चैनल बेचने से मना करते रहे।
- इसके बाद छापे और दबाव और भी तेज़ होते चले गए।
- अंततः 2022 में परिस्थितियों के आगे मजबूर होकर एनडीटीवी को बेचने पर सहमति देनी पड़ी।
- अडानी समूह ने चैनल का अधिग्रहण किया और एनडीटीवी को सवाल पूछने वाली पत्रकारिता से हटाकर एक तरह का “दलाली नेटवर्क” बना दिया गया।
- इसके बाद छापेमारी और जांच का सिलसिला थम गया।
- आज प्रणय रॉय और राधिका रॉय को अंततः सभी मामलों में क्लीन चिट मिल गई।
यह अविश्वसनीय है कि कैसे एक बड़े कारोबारी घराने, सरकार, अदालतों और पूरे सिस्टम ने मिलकर उस इकलौते मीडिया संस्थान को खत्म करने की पटकथा लिखी, जो सत्ता से सवाल पूछने की हिम्मत रखता था। इतिहास इसे जरूर याद रखेगा।
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