
राज ठाकरे ने 2014 से 2025 के बीच अडानी समूह के असाधारण विस्तार को भारत, महाराष्ट्र और खासतौर पर मुंबई–एमएमआर क्षेत्र के संदर्भ में सामने रखकर इसे एक “मास्टर स्ट्रोक” बताया है। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें व्यवसायियों के आगे बढ़ने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जिस तरह का रेड कार्पेट और कथित भ्रष्टाचार उन्होंने इस दौर में देखा है, वैसा उन्होंने अपने जीवन में पहले कभी नहीं देखा।
राज ठाकरे के अनुसार, मुंबई में अडानी समूह का प्रवेश रिलायंस इंफ्रा के अधिग्रहण के बाद हुआ और इसके बाद समूह ने शहर में तेज़ी से अपना कारोबार फैलाया। आज अडानी समूह मुंबई और एमएमआर क्षेत्र में 30 से अधिक बड़े प्रोजेक्ट्स संचालित कर रहा है।
इनमें प्रमुख रूप से—
- मुंबई एयरपोर्ट
- नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट
- वधावन पोर्ट
- रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स
- डेटा सेंटर
- सेमीकंडक्टर सेक्टर जैसे बड़े और रणनीतिक प्रोजेक्ट शामिल हैं।
राज ठाकरे ने यह भी रेखांकित किया कि सवाल किसी उद्योगपति के विकास का नहीं, बल्कि सरकारी संरक्षण, विशेष सुविधाओं और पारदर्शिता का है। उन्होंने संकेत दिया कि 2014 के बाद जिस तरह से अडानी समूह का विस्तार हुआ, उसने नीतियों और सत्ता–कारोबार के रिश्तों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
MNS प्रमुख राज ठाकरे ने BMC चुनाव की सभा में वीडियो दिखाया कि 2014 में अदाणी का कारोबार कितना था और अब कितना फैल गया है?- मिलिंद खांडेकर, वरिष्ठ पत्रकार
एमएनएस न्यूज लाइव का ट्वीट-
मुंबई के शिवाजी पार्क में आयोजित रैली में मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने उद्योगपति गौतम अडानी और केंद्र की मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला। राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि अडानी समूह धीरे-धीरे देश की महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कब्जा करता जा रहा है—चाहे वह हवाई अड्डे हों, बंदरगाह हों या बुनियादी ढांचा।
राज ठाकरे ने कहा कि अडानी देश की क्रिटिकल एसेट्स को अपने नियंत्रण में ले रहे हैं और मोदी सरकार इस एकाधिकार को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि मोनोपॉली बेहद खतरनाक होती है, क्योंकि इससे प्रतिस्पर्धा खत्म होती है, कीमतें प्रभावित होती हैं और देश के राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचता है।
मनसे प्रमुख ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को अडानी के हवाले कर रहे हैं। उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि बहुत देर होने से पहले देश को जागना होगा, क्योंकि यह मुद्दा केवल किसी एक कारोबारी का नहीं, बल्कि देश के भविष्य और उसकी आर्थिक स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है।
राज ठाकरे के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और एक बार फिर सरकार–कारोबार गठजोड़ को लेकर बहस छिड़ गई है।



