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वरिष्ठ पत्रकार राजेश अवस्थी ने सुसाइड से पहले पत्र में लिखा- “मेरा परिवार अच्छा है लेकिन मैं उनके लिए कुछ नहीं कर पाया!”

Hindi news clipping about a local man receiving an award, with a photo of the man and Devanagari text visible.

राजेंद्र त्रिपाठी-

आज सुबह अमर उजाला देखा तो दिल धक्क रह गया…नि:शब्द। सही कहूं तो अखबार से ही पता चला कि राजेश अवस्थी मुझसे दो साल बड़े हैं। वे हमेशा मुझे भाई साहब ही कह कर संबोधित करते रहे। जहां तक मुझे याद है कि अमर उजाला से पहले वे जागरण में कार्य कर रहे थे। अमर उजाला सिटी टीम का हिस्सा रहे जिसकी कमांड एक अर्से तक मेरे हाथ में रही।

90 के दशक में ही मैने समझ लिया था किबेहद मिलनसार…ठहाके लगा कर हंसने वाले राजेश को कुछ खाए जा रहा है। धीरे धीरे अंतर्मुखी होते जा रहे थे। वक्त के साथ उनके साथ क्या गुजरी इसकी जानकारी मुझे नहीं रही, वजह कि 2000 से मुझे संपादक की जिम्मेदारी मिली तो मेरठ छोड़ना पड़ा। कालांतर में राजेश ने भी अमर उजाला छोड़ दिया।

राजेश यारों के यार थे…एकदम संवेदनशील प्राणी। कोई 2023 की बात है। मेरे पास फोन आया। राजेश बोले मुझे मिलना है। मैने कहा कोई काम है? बोले काम तो है, इसी बहाने मुलाकात भी हो जाएगी, काफी समय से मिले नहीं है। मुलाकात हुई…गुजरे वक्त के बारे में बतकही हुई। चलते चलते बोले-अमर उजाला में मेरे एक साथी है…अपने गृह जनपद में जाना चाहते हैं। अगर प्रबंधन से आप कह सकें तो साथी का भला हो जाएगा। इस बाबत वे काफी समय तक फालोअप करते रहे।

ऐसा कदम उठाओगे….ऐसे चले जाओगे,सोचा न था। मुझे पता है कि तुम गुमनामी में चले गए थे…ऐसे में कौन किसको याद करता है। मुझे तुम्हारा यारों के साथ याराना वाला व्यवहार याद है। विनम्र श्रद्धांजलि विरादर…!!!

अमर उजाला में छपी खबर के मुताबिक राजेश अवस्थी ने सुसाइड से पहले पत्र में लिखा- मेरा परिवार अच्छा है लेकिन मैं उनके लिए कुछ नहीं कर पा रहा हूँ! उन्होंने अपनी मौत के लिए ख़ुद को ज़िम्मेदार ठहराया।

राजेश के शव के पास ही उनका सुसाइड नोट मिला।

मूल खबर-

दैनिक जागरण मेरठ में कार्यरत रहे पत्रकार राजेश अवस्थी ने की आत्महत्या, छँटनी के बाद आर्थिक तंगी झेल रहे थे! https://www.bhadas4media.com/meerut-journalist-rajesh-awasthi-suicide/

आदरणीय अवस्थी जी मेरे ट्रेनरों में रहे। ज्ञानी और परिश्रमशील। भाषा के प्रति बेहद संजीदा। उनके साथ काम करने का सौभाग्य मेरठ दैनिक जागरण में मिला। तब तक वह पत्रकारिता की कई जिम्मेदारियां संभाल चुके थे। माधवपुरम में उनका पड़ोसी भी बना। कई बार उनके घर सपत्नीक चाय पी। बिटिया की शादी का निमंत्रण भेजा था, जा नहीं पाया। उन्होंने बिलकुल बुरा नहीं माना। वह काफी लंबे थे लेकिन उनकी लंबाई से बड़ा उनका व्यक्तित्व था। निष्कपट, मददगार। छोटा भाई मानते थे। कई बार हक से डांट देते थे। फोन पर बात कर लिया करते थे। इधर काफी दिनों से उनकी सूचना नहीं मिली थी। सोच रहा था सब ठीक ही होगा। और सूचना मिली भी तो ऐसे। भगवान अवस्थी सर की आत्मा को शांति दें… ॐ शांति…

-कुणाल देव

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