ज्ञानेंद्र शुक्ला-
घोर चिंताजनक!… कल रात तहजीब के शहर के दामन पर बदतमीजी की कालिख पोती गई। किसी फिल्मी दृश्य सरीखा मंजर दिखा जिसमें सरकारी गनरों से लैस एक दबंग रौब गांठता-धमकाता नजर आया!
सत्ता-तंत्र द्वारा पोषित-संरक्षित तत्व किस कदर आम नागरिक की सुरक्षा-प्रतिष्ठा के लिए खतरा बन सकते हैं इसकी बानगी भी नजर आई!
प्रदेश के बेहद कर्मठ-संजीदा पत्रकारों में शुमार साथी-भाई रवि श्रीवास्तव की बिटिया का जन्मदिन था, अपने बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी-बच्चों और भाई के परिवार के साथ लखनऊ के 1090 चौराहे स्थित चटोरी गली में खाना खाने गए थे, गलती से हुए आनलाइन पेमेंट वापसी की गुजारिश की, इस मामूली से विषय को लेकर दूर बैठा स्टाल संचालक भड़क उठा, बेहद संयत व शांत स्वभाव के रवि ने इन्हें समझाने की कोशिश की, पर संचालक के गुर्गे भड़क उठे, आसपास के दुकानदारों पर अपने रौब का इजहार करने की गरज से इन गुर्गों ने रवि के परिजनों के साथ मारपीट शुरू कर दी, महिलाओं से बदसलूकी की।
एकाएक हुई इस घटना से सभी हतप्रभ रह गए, कॉल पर पहुंची डायल 112 की टीम हमलावर उपद्रवियों को दबोच कर थाने ले गई, सूचना पाकर मैं भी गौतमपल्ली थाने पहुंचा, वहां का दृश्य विचलित करने वाला था।
सफेद ट्रैक सूट में पिस्टल लगाए एक शख्स पुलिसकर्मियों को हड़काता नजर आया, जिसने थाने के भीतर लाए गए हमलावरों को जबरन बाहर निकलवा लिया (थाने के सीसीटीवी से इसे तस्दीक किया जा सकता है), वहां पहुंचे एक चौकी इंचार्ज ने पीड़ित रवि पर ही कार्रवाई की चेतावनी दी।
तब तक गौतमपल्ली के थाना इंचार्ज व कई पत्रकार साथी भी मौके पर पहुंचे, पर सफेद ट्रैक सूट वाले शख्स का ऊंची आवाज में चिल्लाना और पत्रकार के परिवार पर ही मुकदमा लिखाने की धमकी देने का सिलसिला जारी रहा।
खुद को वाई श्रेणी का सुरक्षाधारी, दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री व बीजेपी का नेता मनोज सिंह बताने वाले इस शख्स के साथ दो सरकारी गनर भी मौजूद थे, मौके पर मौजूद पुलिस बल इसके आगे नतमस्तक था।
खैर उच्चाधिकारियो को सूचित करने के बाद खुद एसीपी हजरतगंज पहुंचे, जो कथित बीजेपी नेता के संग सख्त लहजे से पेश आए, जिसके बाद पीड़ित पत्रकार ने तहरीर दी और विधिक कार्यवाही शुरू हुई, पर जिस गौतमपल्ली थाने की परिधि में सीएम आवास से लेकर सपा सुप्रीमो का आवास आता है, वहां एक कथित सत्ताधारी नेता के आगे पुलिसिया तंत्र को नतमस्तक होते देखना हैरान करने वाला मंजर था।
सवाल उठता है कि आखिर किस आधार पर चटोरी गली में दहशत का साम्राज्य कायम कर चुके इस शख्स को गनर मुहैया करा दिये गए? क्या बीजेपी संगठन और सरकार वाकिफ नहीं है कि ऐसे तत्व न सिर्फ उनकी छवि धूमिल कर रहे हैं बल्कि समाज में अराजकता फैला कर आमजनों को दहशतजदा करने में जुटे हैं?
सवाल, ये भी उठता है कि रवि पत्रकार न भी होते तो भी क्या आम नागरिक अपने परिवार के सामने लफंगों से पिटने-बेइज्जत होने को अभिशप्त रहेगा? अगर राजधानी के बीचों बीच के इलाके में ये हालात है तब बाकी जगहों का क्या हाल होगा?


