भारत की बड़ी निजी कंपनी Reliance Industries ने अमेरिका में एक तेल रिफाइनरी परियोजना से पहले अमेरिकी सरकार और नीति-निर्माताओं को प्रभावित करने के लिए भारी लॉबिंग खर्च किया। एक रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने करीब 14.9 लाख डॉलर (लगभग 13 करोड़ रुपये) लॉबिंग पर खर्च किए।
स्क्रॉल वेबसाइट के मुताबिक, यह जानकारी अमेरिकी सीनेट में जमा रिकॉर्ड से सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार यह खर्च ऊर्जा नीति, व्यापार नियमों, प्रतिबंधों और तेल पर लगने वाले टैरिफ जैसे मुद्दों को लेकर अमेरिकी प्रशासन से संपर्क बनाने के लिए किया गया था।
ट्रंप के ऐलान से पहले बढ़ी लॉबिंग
यह लॉबिंग उस समय की गई जब बाद में अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने टेक्सास में नई तेल रिफाइनरी परियोजना की घोषणा की।
11 मार्च को ट्रंप ने बताया कि टेक्सास के ब्राउन्सविल पोर्ट पर बनने वाली इस रिफाइनरी को रिलायंस समर्थन देगी। इसे पिछले 50 वर्षों में अमेरिका की पहली नई बड़ी रिफाइनरी परियोजनाओं में से एक बताया गया।
रिपोर्ट के अनुसार इस परियोजना को America First Refining नाम की कंपनी विकसित कर रही है। इस कंपनी ने कहा कि उसे एक वैश्विक ऊर्जा कंपनी से नौ अंकों (hundreds of millions) का निवेश मिला है और एक समझौते के तहत वह अमेरिकी शेल ऑयल से बने ऊर्जा उत्पादों की खरीद-प्रसंस्करण और वितरण करेगी।
2025 में बढ़ा खर्च
दस्तावेजों के मुताबिक 2025 में रिलायंस ने लॉबिंग पर बड़ा खर्च किया, जिसमें से 7.6 लाख डॉलर सिर्फ 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2025 के बीच खर्च किए गए।
इसके अलावा कंपनी ने पहले से काम कर रही तीन लॉबिंग फर्मों के साथ एक नई फर्म Checkmate Government Relations को भी नियुक्त किया। इस फर्म के कुछ अधिकारियों के अमेरिकी प्रशासन से पुराने संबंध बताए जाते हैं।
रूसी तेल को लेकर भी था विवाद
रिपोर्ट के अनुसार 2025 में रिलायंस समूह अमेरिकी प्रशासन की आलोचना के दायरे में भी आया था। उस समय अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि भारत की कुछ बड़ी कंपनियां सस्ते रूसी तेल खरीदकर उससे मुनाफा कमा रही हैं।
इसी दौरान अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 25% से बढ़ाकर 50% कर दिया था। बाद में फरवरी 2026 में अतिरिक्त 25% टैरिफ हटा लिया गया।
कंपनी की ओर से जवाब नहीं
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस लॉबिंग खर्च और टेक्सास रिफाइनरी निवेश को लेकर रिलायंस से सवाल पूछे गए थे, लेकिन खबर प्रकाशित होने तक कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला था।
बीजेपी के जिन सांसदों ने रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी छूट को नरेंद्र मोदी की जीत बताया था–उनकी मिट्टी पलीत हो गई। रिलायंस इंडस्ट्री ने ट्रंप को इस छूट के लिए पटाने में 13 करोड़ फूंक दिए।
अंबानी की कंपनी ने दिसंबर 2025 को 13 करोड़ का पेमेंट किया और फिर मार्च में अमेरिका ने रूस से तेल खरीद की छूट दे दी। बीजेपी के सांसदों ने मोदी को इसी बात के लिए फूलमाला पहना दी, जबकि एक भारतीय कॉरपोरेट के पैसे के आगे देश की विदेश नीति हार गई।
अंबानी ने अमेरिकी रियायत को अपनी दौलत से खरीदा और भारत देखता रह गया। अब अंबानी ने टेक्सस में रिफाइनरी लगवाने का सौदा कर अमेरिका से हमेशा के लिए दोस्ती कर ली है।
ब्लूमबर्ग ने मोदी का भंडा फोड़ दिया है। -सौमित्र राय, वरिष्ठ पत्रकार



