नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें राज्य पुलिस को मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से जुड़े कथित आपत्तिजनक वीडियो मामले में दो महिला पत्रकारों को ज़मानत के बावजूद हिरासत में लेने की अनुमति दी गई थी।
यह आदेश जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने पारित किया। अदालत ने यह फैसला सुनते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और मामले पर आगे की सुनवाई निर्धारित की है।
सुनवाई के दौरान क्या हुआ
लाइव लॉ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने याचिकाकर्ता महिला पत्रकारों की ओर से दलीलें पेश कीं। उन्होंने तर्क दिया कि — “जब किसी आरोपी को पहले ही ज़मानत मिल चुकी हो, तो बिना ज़मानत रद्द किए उसे पुलिस हिरासत में लेना कानूनन गलत है।”
दवे ने यह भी कहा कि पुलिस जांच के लिए पूछताछ हेतु बुला सकती है, लेकिन ज़मानत अवधि के दौरान किसी व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया जा सकता। खंडपीठ ने इन दलीलों पर सहमति जताते हुए कहा कि हाईकोर्ट का आदेश तत्काल प्रभाव से निलंबित रहेगा और राज्य को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद एक कथित आपत्तिजनक वीडियो से जुड़ा है, जो सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर वायरल हुआ था। एफआईआर के अनुसार, इस वीडियो में पल्स टीवी के प्रतिनिधि को एक व्यक्ति से भड़काऊ सवाल पूछते हुए दिखाया गया था, जिसने बाद में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की।
इसी वीडियो के आधार पर पल्स न्यूज़ की प्रबंध निदेशक और संवाददाता के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
लगाई गई धाराएं
महिला पत्रकारों पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 67, तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 11, 61(2), 352 और 353(2) के तहत आरोप लगाए गए हैं।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट का यह अंतरिम आदेश पत्रकारों को तत्काल राहत प्रदान करता है। अब अगली सुनवाई में राज्य सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि ज़मानतशुदा व्यक्तियों को हिरासत में लेने की अनुमति देने का औचित्य क्या था।



