अशोक श्रीवास्तव-
रोहिणी आचार्य का यह क्लिप देखना सुनना चाहिए। रोहिणी ने कैसे बिहार के एक पत्रकार की वाट लगा दी। ये पत्रकार हैं कन्हैया भेल्लारी। पूरे बिहार चुनावों में ये कई टीवी चैनलों पर विश्लेषण करते दिखे। फिर इन्होंने अपने एग्जिट पोल में तेजस्वी और कांग्रेस को जिता दिया।
रोहिणी ने जब अपने अपमान की बात की तो इन पत्रकार महोदय ने इस बात पर सवाल उठाया कि शादी के बाद रोहिणी अपने पिता के घर पर क्यों रह रही हैं।
डीडी एंकर की इस पोस्ट पर आए कुछ कमेंट्स भी पढ़िए…
आदित्य कुमार त्रिवेदी-
रोहिणी का जवाब कन्हैया पर नहीं, पूरे पितृसत्ता मॉडल पर वार था।
“शादी के बाद मायके जाऊं तो तुमसे पूछकर?”
“अपने बाप को किडनी क्यों दी?”
कन्हैया की बातों में वही पुराना नियंत्रण भाव झलकता है — और रोहिणी ने उसी सोच को धारदार जवाब दे दिया। राजनीति हो या घर, औरत के फैसले पर दूसरों की मुहर क्यों चाहिए?
पीके भाई-
दिल जीत लिया दीदी ने। यहाँ दीदी ने पूरे महिला समाज का झंडा बुलंद कर दिया। और बिकाऊ पत्तलकार को जो झन्नाटेदार जबाब दिया है वो पूरे पितृसत्ता समाज में इसका झन्नाता गूँजेगा। ये सिर्फ़ तेजस्वी और उनके चाटुकाओ की बात नहीं है बल्कि पूरे समाज को आईना दिखा दिया। सादर प्रणाम।
एन आर कदम-
पितृसत्तात्मक परिवार की वकालत करने वाले इस तथाकथित पत्रकार की दलील तो सुनिए! इसे ये तय करने का किसने अधिकार दिया कि बेटियाँ ससुराल मे रहें या मायके मे? रोहिणी ने सही सवाल किया कि खुद किसी को किडनी देकर दिखाए। पत्रकार महोदय की घिग्गी बंध गई थी।
राजीव चौबे-
रोहणी जी ने अच्छा और बिलकुल सटीक प्रश्न किया इस पत्रकार से! इतनी गिरावट नहीं होनी चाहिए! ये लोग पत्रकार और विश्लेषक बन के आ जाते हैं टीवी पर और एक पार्टी कार्यकर्त्ता के तरह अपने नेताओं के उचित अनुचित का ध्यान किये बिना उनके पक्ष में पैरवी करते रहते हैं!
राजनीतिक मंच से और टीवी चैनलों से बैठकर परिवारिक रिश्तों पर ज्ञान बांटने का ठेका लेने से पहले यदि कुछ बनावटी ज्ञानी अपने परिवारिक रिश्तों में झांक लें और उनकी कमियों में सुधार कर लें तो घर से बाहर तक लतिया जाने की संभावनाएं कम होंगी मगर नहीं दूसरे की झांकने से ज्ञानचंद बनेंगे – धीरज द्विवेदी
गुंजन मिश्र-
एक बिहारी होने के नाते ये समझना मुश्किल नहीं है कि क्या बोला गया होगा बेचारी को। बिहार में आज भी कितने ही लोग दहेज देके बेटी विदा कर देते हैं और उसके बाद उसे पराया मान लिया जाता है। ये तेजस्वी और लालू दोनों के लिए ही शर्म से डूब मरने वाली बात है।



