दीप और रोशनी के प्रतीक पर्व दीपावली पर रुबिका लियाकत का एक ट्वीट उनके ही गले की फाँस बन गया। रुबिका लिखती हैं- हम दिए जलाएंगे और पटाखे भी फोड़ेंगे। साथ ही उन्होंने लिखा है, बहुतेरों के दिल भी जलाएंगे। अब आप जरा बताइये कि एक न्यूज एंकर को क्या इस तरह की शब्दावलियों का इस्तेमाल करना चाहिए। इस मामले में कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने रुबिका को घेर रखा है। यहां तक की उनका सत्ता को खुश करने वाले ट्वीट को लोग शर्मनाक तक करार दे रहे हैं।
पहले रुबिका का ट्वीट पढ़िए और उसके बाद किसने क्या कुछ लिखा है वो देखिए?
रुबिका लियाकत ने 20 अक्तूबर को अपनी पोस्ट में लिखा-

हम दिए जलाएँगे…लेकिन पटाखे फोड़ कर…. बहुतेरों के दिल भी जलाएँगे… समाचार समाप्त हुए
पटाखों का दीपावली से कोई लेना-देना नहीं है. बारूद और आतिशबाज़ी लेकर मुग़ल शहंशाह मिर्ज़ा बाबर हिंदुस्तान आये थे. बारूद से उन्होंने लोदियों को हराया और आतिशबाज़ी से मुग़लिया शानो-शौक़त को दोबाला किया. फिर उसके बाद हमारा इतिहास धुँआ धुँआ हो गया. – प्रकाश के रे
अशोक कुमार पांडेय-
हमारी संस्कृति में दीपावली अंधेरा दूर करने के लिए मनाई जाती है, खुशियाँ बाँटने के लिए.. कुछ लोग जाम्बी बन गए हैं जिन्हें दूसरों को दुख देकर शांति मिलती है। आप ठीक से हिन्दू-मुस्लिम क्या इस देश की संस्कृति को ही नहीं समझ पाईं।
ईश्वर आपको सद्बुद्धि दे
प्रशांत कनोजिया-
रूह बिका अपने बुजुर्ग पिता को बाहर बैठाओ और उनके सामने 10 लाख के पटाखे फोड़ों उसके बाद दिल क्या सब कुछ जलेगा
समाचार समाप्त। एक पैकेट सोन पापड़ी के लिए गुलामी करती चमची।
ज़ीनत सिद्दीकी-
क्या ये इंसानी ज़ुबां हो सकती है। क्या राम जी के ऐसे ही विचार रहे होंगे। हुनर बेचने और ज़मीर बेचने का जो महीन फर्क़ है वो इस ट्वीट में..देखा-पढ़ा-समझा जा सकता है।
डॉ चयनिका उनियाल-
दिवाली लोगों का दिल जलाने के लिए नहीं, लोगों में ख़ुशियाँ बांटने और लोगों के जीवन में प्रकाश फैलाने का नाम है। हमारे त्योहार का ऐसा भद्दा मजाक बनाने का अधिकार किसने दिया? दिल जलाने को ईद मनाते हो आप?



