सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स और फेसबुक पर 32 सेकंड का एक वीडियो छाया हुआ है। वीडियो में रशियन पत्रकार रिपोर्टिंग करते देखा जा रहा है, तभी ठीक उसके बगल में एक मिसाइल गिरती है। यह कैमरे में कैद हो जाता है और सबकुछ अस्त व्यस्त हो जाता है। हमला किसने किया, पत्रकार कौन है और किस हालात में है?- नीचे पढ़िए
https://twitter.com/i/status/2034617345339986003
अपूर्व भारद्वाज-
इजरायल का पत्रकार पर हमला… Steve Sweeney ब्रिटेन के अवॉर्ड विनिंग वॉर जर्नलिस्ट हैं, रियल टाइम ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं।
कुछ दिन पहले उन्होंने लेबनान में इज़रायल की बर्बरता की रिपोर्टिंग की थी।
आज इज़रायल ने उन्हें टारगेट कर बम मारा — उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई, वो अस्पताल में भर्ती हैं।
इज़रायल मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन है।
इजरायल ने हवाई हमला किया तो लेबनान में रशियन टीवी संवाददाता स्टीव स्वीनी और एक कैमरामैन घायल हो गए। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी ने इसकी पुष्टि की है। -अजीत सिंह राठी, पत्रकार
https://twitter.com/ajitanjum/status/2034628425907048836
शीतल पी सिंह-
Big Breaking News… CNN की रिपोर्ट
ईरान की वायु सुरक्षा प्रणाली के हमले से US F-35 फाइटर जेट क्षतिग्रस्त हुआ। मिडिल ईस्ट में एक US एयर बेस पर इमरजेंसी लैंडिंग की।
पायलट की हालत स्थिर बतायी गई है। F35 को युद्ध के दौरान इस तरह छतिग्रस्त करने की पहली घटना।

एफ-35 लड़ाकू विमान को कल तक लगभग अजेय माना जाता था। यही इसकी पूरी अवधारणा थी।
Lockheed Martin ने करीब तीस साल और लगभग 400 अरब डॉलर खर्च करके दुनिया का सबसे महंगा सैन्य विमान कार्यक्रम तैयार किया। इसका उद्देश्य ऐसा विमान बनाना था जिसे दुश्मन के रडार, सेंसर या मिसाइलें पहचान ही न सकें। एफ-35 सिर्फ एक फाइटर जेट नहीं था, बल्कि अमेरिका की तकनीकी श्रेष्ठता का प्रतीक था — मानो यह संदेश कि अब कोई हमें छू नहीं सकता।
लेकिन ईरान ने शायद यह मानने से इनकार कर दिया।
19 मार्च 2026 को, ईरान के हवाई क्षेत्र के ऊपर, एक Infrared Search and Track (IRST) सिस्टम ने इस विमान को पहचान लिया और उस पर नज़र जमा ली। यह कोई बहुत जटिल तकनीक नहीं थी — बल्कि एक ऐसा सेंसर जो सिर्फ गर्मी के आधार पर लक्ष्य को ढूंढता है। समस्या यह है कि एफ-35 का इंजन बहुत ज़्यादा गर्मी पैदा करता है, और यही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गई।
अब ईरान के पास इस विमान के हीट सिग्नेचर का डेटा है। यह सिर्फ अमेरिका के लिए शर्मिंदगी की बात नहीं है, बल्कि रूस, चीन और उन सभी देशों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी है जो यह सोच रहे थे कि क्या एफ-35 को मार गिराने वाले सिस्टम पर पैसा खर्च करना चाहिए। अब उन्हें जवाब मिल गया है — हाँ, करना चाहिए।
सबसे बड़ी चिंता Pentagon के लिए यह है कि तकनीक को सुधारा जा सकता है, सॉफ्टवेयर अपडेट किया जा सकता है, लेकिन पायलट के मन में बैठा डर या संदेह आसानी से नहीं हटाया जा सकता। अब हर एफ-35 पायलट उड़ान भरते समय यह सोचकर जाएगा कि जमीन से कोई उसे देख भी सकता है। इससे उनकी उड़ान शैली बदल सकती है — आक्रामकता की जगह सावधानी, और तेज़ फैसलों की जगह झिझक आ सकती है।
400 अरब डॉलर खर्च करने के बाद भी, अगर एक साधारण हीट सेंसर से विमान की पहचान हो जाए, तो यह अमेरिका की सैन्य रणनीति के मुंह पर तमाचे की तरह है! तुम अपराजेय नहीं हो!



