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नफ़रत फैलाने के बाद अब सच बोलते सुधीर चौधरी को सुनिए!

अरे यार यह सुधीर चौधरी ही हैं न, तबीयत – वबीयत तो ठीक है न इस बन्दे की!

कन्हैया शुक्ला-

2014 पूर्व जनता की समस्याओं पर डिबेट होती थी और सरकार को जवाबदेह ठहराया जाता। इसलिए जनता न्यूज़ चैनल देखतीं थीं। 2014 के बाद न्यूज़ चैनल मालिक गुजरात कार्टेल के सामने नतमस्तक हो गये। अब PMO के जोशी के WA मेसेज पर न्यूज़ बनती है। ऐसे में जनता ने यूट्यूब पर अपने पर्याय ढूंढ़ लिए।

सुधीर चौधरी इस समय जो बोल रहा है एकदम सच बोल रहा है. ये नफरत फैलाना इनके हाथ में नहीं है, व्हाट्सअप पर मैसेज आता है, PMO से script आती है बकायदा कि ये बोलना है!

लोगों ने न्यूज़ चैनल देखना लगभग बंद कर दिया है। वजह है वही दलाल पत्रकार, जो आज जनता की नहीं, बल्कि सरकार की भाषा बोल रहे हैं। जब पत्रकार सरकार से सवाल करने के बजाय सरकारी एजेंट बनकर काम करेंगे, तो आम आदमी क्यों न्यूज़ देखे? अगर जनता की बात नहीं होगी, और सिर्फ़ सत्ता के गुणगान होंगे, तो भरोसा कैसे बचेगा?

2014 से पहले दूध, बटर, सब्ज़ी, मटर, प्याज़, आलू, टमाटर, लहसुन, पेट्रोल, डीज़ल, डॉलर, रुपया, महंगाई, बेरोज़गारी, गरीबी, भुखमरी, आमदनी के स्रोत, भ्रष्टाचार और जनकल्याण जैसे मुद्दों पर बहस होती थी। लोग शौक से टीवी देखते थे क्योंकि उन्हें अपनी बात और अपने सवाल वहां सुनाई देते थे।

लेकिन अब हालात बदल गए हैं। आज चैनलों पर सरकारों के गुणगान हैं, जनता के सवाल नहीं। इसलिए लोगों ने टीवी से दूरी बना ली है। पिछले आठ साल से मैंने खुद किसी न्यूज़ चैनल पर कोई ख़बर नहीं देखी — बस मोबाइल पर कभी-कभी ट्विटर या ऑनलाइन न्यूज़ देख लेता हूं, क्योंकि अब चैनल जनता की आवाज़ नहीं, सत्ता की प्रतिध्वनि बन गए हैं।

If hypocrisy had a face it would of this imposter and d one who has rented her platform to him.

-Vinod Sharma

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