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सांध्य टाइम्स ने इस साल से ‘मेरा व्यापार-मेरा सम्मान अवॉर्ड’ देने का फैसला किया!

Group of colleagues and a police officer posing in a newsroom office with a red backdrop behind them.
Group of six around a wooden conference table; a uniformed police officer reads a document while others review papers.

विवेक शुक्ला-

पिछले दो-तीन दशकों के दौरान मीडिया का चेहरा बदला है, पर सांध्य टाइम्स की दिल्ली वालों और यहां के बाजारों में अब भी साख बरकरार है।

दोपहर तीन बजे के बाद चांदनी चौक, खारी बावली, दरीबा कलां, करोल बाग, आईएनए, लाजपत नगर सेंट्रल मार्केट, सदर बाजार, राजौरी गार्डन से लेकर नजफगढ़, चिराग दिल्ली, पटेल नगर वगैरह के बड़े शो रूमों से लेकर छोटी-छोटी दुकानों तक मालिक और मुलाजिम सांध्य टाइम्स को बड़े चाव से पढ़ते दिख जाते हैं। कई जगहों पर दो-दो सांध्य टाइम्स खरीदे जाते हैं। फिर उनके पन्ने भी बंट जाते हैं। सांध्य टाइम्स पढ़ लेने के बाद ही इनका काम में मन लगता है। मुझे बीते कुछ दिन पहले ही गोल मार्केट के पास एक सज्जन साइकिल पर सांध्य टाइम्स बेचते नजर आए। वे तेज आवाज में उस दिन की ब्रेकिग खबर भी बता रहे थे।

सांध्य टाइम्स ने इस साल से ‘मेरा व्यापार-मेरा सम्मान अवॉर्ड’ देने का फैसला किया है। इसके लिए नौ कैटेगरी में व्यापारियों और उद्यमियों को अवॉर्ड दिए जा रहे हैं। इनमें लाइफटाइम अवॉर्ड, युवा बिजनेस अवॉर्ड, व्यापारियों की आवाज अवॉर्ड, ग्रीन बिजनेस अवॉर्ड, महिला बिजनेस लीडर अवॉर्ड आदि शामिल हैं।

इसके लिए नवभारत टाइम्स और सांध्य टाइम्स में सूचनाएं प्रकाशित की जा रही थीं, ताकि कुछ हटकर बिजनेस करने वाले व्यापारी अपने नॉमिनेशन कर सकें। नतीजा यह हुआ कि बड़ी संख्या में नॉमिनेशन आए। इनका चयन करने की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) देवेश चंद्र श्रीवास्तव, नवभारत टाइम्स और सांध्य टाइम्स से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार ललित वत्स तथा आपके दोस्त को सौंपी गई।

मैं भी लंबे समय तक बिजनेस जर्नलिस्ट रहा हूँ, इसलिए बिजनेस की दुनिया से थोड़ा-बहुत वाकिफ हूं। 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी देवेश चंद्र श्रीवास्तव लंबे समय से दिल्ली पुलिस के अहम पदों पर रहे हैं। उन्हें दिल्ली के क्राइम सीन के साथ-साथ बिजनेस जगत की भी गहरी समझ है। यह बात कल उनकी बातचीत में साफ समझ आई।

हमें सांध्य टाइम्स की उत्साही टीम के सदस्यों- हेमलता भारद्वाज, पूनम बिष्ट, सूरज सिंह आदि का भरपूर सहयोग मिला। इस चयन प्रक्रिया पर नवभारत टाइम्स और सांध्य टाइम्स के संपादक आशीष पांडे बारीकी से नजर रख रहे थे। वे बीच-बीच में हम लोगों से मिलने भी आते रहे।

टाइम्स हाउस में करीब दो घंटों तक चली बैठक के बाद हम लोग ‘मेरा व्यापार-मेरा सम्मान अवॉर्ड’ के विजेताओं के नामों का चयन करने में सफल रहे। खुशी की बात यह है कि एक-दो कैटेगरी को छोड़कर बाकी सभी विजेताओं के नामों पर हम सबकी एक राय थी। अब विजेताओं के नामों की घोषणा किसी भी दिन हो जाएगी। नॉमिनेशन भेजने वालों के बायोडाटा पर गहराई से नजर डालने पर लगा कि अब राजधानी में बिजनेस की दुनिया समावेशी हो रही है। इसका स्वागत होना चाहिए।

मैं एक विजेता का जिक्र अवश्य करूंगा। ये सज्जन 93 वर्ष की उम्र पार करने के बाद भी रोज अपने शो रूम में आते हैं। इनकी जिजीविषा देखकर कोई भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता। कनॉट प्लेस में एक मशहूर केमिस्ट शॉप के मालिक भी 90 पार होने के बाद रोज दुकान में आते हैं, पर हमारे विजेता दूसरे सज्जन हैं।

कई पहली पीढ़ी के व्यापारियों के भी नॉमिनेशन मिले थे। देखिए इनमें से कितने सरदार रौनक सिंह (अपोलो टायर्स) और महाशय धर्मपाल गुलाटी (एमडीएच) जैसे बनते हैं। इन दोनों ने अजमेरी गेट और करोल बाग से बिजनेस की दुनिया में कदम रखे थे। अब इनका हजारों करोड़ों का बिजनेस है।

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