कन्हैया शुक्ला-
छत्तीसगढ़ में विगत विधानसभा चुनाव में बीजेपी का प्रमुख मुद्दा शराब घोटाला था। भारी प्रचार-प्रसार और आक्रामक अभियान के साथ छत्तीसगढ़ बीजेपी चुनावी मैदान में उतरी थी। चुनाव से पहले शराब घोटालेबाजों के खिलाफ ज़बरदस्त ढंग से सड़क पर प्रदर्शन किया गया — आरोप लगाए गए कि कांग्रेस सरकार और आबकारी विभाग के अधिकारियों ने शराब उपभोक्ताओं तक को ठग लिया, भोले-भाले पियक्कड़ों तक को लूट लिया गया।
इस जनभावना का चुनावी असर इतना पड़ा कि छत्तीसगढ़ में सरकार ही बदल गई।
लेकिन बीजेपी की सरकार बनने के बाद भी छत्तीसगढ़ की जनता को भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कोई स्पष्ट और बड़ी कार्रवाई अब तक नहीं दिखी थी — चाहे वह शराब घोटाला हो, कोयला प्रकरण या महादेव ऐप से जुड़ा मामला। बीजेपी ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप तो ज़रूर लगाए, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि उन भ्रष्टाचार के मामलों में बहुत से सरकारी अधिकारी भी नामजद पाए गए, जिन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सत्ता परिवर्तन के बाद बीजेपी सरकार ने न तो इन बड़े अधिकारियों पर कोई शिकंजा कसा, न ही किसी कड़ी विभागीय जांच की पहल की, जिससे पार्टी के भीतर भी असंतोष और विरोधाभास की स्थिति बनने लगी।
बीजेपी के सुपर सीनियर नेता ननकीराम कंवर ने भ्रष्टाचार को लेकर सैकड़ों पत्र लिखे, लेकिन उन पत्रों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिन अधिकारियों के खिलाफ वे लगातार लिखते रहे, वे ही सत्ता के सबसे प्रभावशाली और संरक्षित अधिकारियों में गिने जाते रहे।
और अब, शराब घोटाले के मुद्दे पर बीजेपी नेता नरेश चंद्र गुप्ता ने भी अपनी ही पार्टी की सरकार पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने आबकारी विभाग के भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों पर ACB-EOW द्वारा चालान पेश करने के दौरान दो टूक कहा कि:
“बीजेपी ने शराब घोटाले की गहराई तक जांच और सभी दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग सदन से लेकर सड़कों तक की थी। अब ज़रूरत है कि यह मामला CBI को सौंपा जाए, अन्यथा घोटाले के मास्टरमाइंड समेत सभी भ्रष्टाचारी बच निकलेंगे।”
और फिर जो हुआ, उसने सबको चौंका दिया —
झनाटेदार, लपलपाता, सन्नाटे को चीरता हुआ आदेश आया — 22 आबकारी अधिकारियों को सस्पेंड किया गया!
इस मामले में EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) ने 29 आबकारी अधिकारियों के खिलाफ करीब 2300 पन्नों का चालान पेश किया है। जिन अधिकारियों के नाम चालान में दर्ज हैं, उन्हें निलंबित कर दिया गया है। कुछ अधिकारी सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं।
शुरुआती अनुमान में लगभग 2100 करोड़ रुपये के घोटाले की बात सामने आई थी, जो अब बढ़कर 3200 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
यह घोटाला 2019 से 2023 के बीच हुआ, जिसमें जिलों में पदस्थ आबकारी अधिकारियों की निगरानी में डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर अवैध शराब को सीधे दुकानों में पहुंचाया गया, और इसके एवज में मोटा कमीशन लिया गया।
अब असली सवाल यह है…
क्या ये सस्पेंड अधिकारी किसी बड़े दरबार में जाकर चरण दर्शन और दक्षिणा के ज़रिए मामले को ठंडे बस्ते में डाल देंगे?
क्या उन्हें जल्द ही कोई संजीवनी वरदान प्राप्त हो जाएगा?
या फिर “भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस” की बात करने वाली विष्णु देव साय सरकार किसी भी दरबार या दबाव की परवाह किए बिना निष्पक्ष कार्रवाई करेगी?
अब पूरा प्रदेश देख रहा है कि बीजेपी सरकार के लिए उसूल बड़ा है या किसी दरबार का वसूल सिस्टम?
सस्पेंडेड अधिकरियों की लिस्ट देखें-






