नवेद शिकोह-
सीएम योगी आदित्यनाथ के दो ख़ास अधिकारी महाकुंभ में ग्राउंड पर ऐक्टिव हैं, बाइक सवार शिशिर और मृत्युंजय ने दुनिया तक पंहुचा दिया डिजिटल महाकुंभ, महाकुंभ में डीआईजी वैभव कृष्ण जैसे अधिकारियों के कर्त्तव्यपरायणता की डुबकी ने पुलिस-प्रशासनिक दक्षता की नई इबारत लिख दी
144 वर्षो के बाद एक सुंदर संयोग वाले महाकुंभ में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की पावन धरती पर चालीस करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का समागम विश्व में एक रिकार्ड बनाएगा। इससे भी बड़ी उपलब्धि ये है कि विश्व कल्याण की कामना करने वाला ये अनुष्ठान डिजिटल महाकुंभ थोड़े से समय में ही पूरे विश्व में अपनी आध्यात्मिक शक्ति फैलाने लगा है। सनातन धर्म की पुरातन संस्कृति और आस्था दुनिया वालों को सीख दे रही है।
इतनी बड़ी संख्या की सुरक्षा का मॉडल सैकड़ों देशों का स्टडी प्वाइंट बन गया है। ये आयोजन कम्युनिकेशन और अनेकता में एकता की मिसाल बन कर पेश हो रहा है। गंगा, यमुना, सरस्वती का संगम किस तरह सनातनी संपूर्ण शक्तियों को अपने बाहों में समेट सकता है। हर जाति, प्रत्येक सम्प्रदाय और पंथ का अटूट गुलदस्ता हिन्दुत्व को महाशक्ति बना रहा है। हमारे सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का दर्पण बनकर महाकुंभ देश के आर्थिक विकास,पर्यटन, व्यापार और स्वरोजगार की उन्नति,प्रगति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। ये भी देखने लायक है कि महाकुंभ की आस्था के रूप में भारत की आध्यात्मिक शक्ति किस तरह प्रासंगिक है और विकास का मार्ग प्रशस्त कर रही है।
डिजिटल महाकुंभ के जरिए दुनिया हमारी इन खूबियों को पल-पल देख रही है, सीख रही है, प्रेरणा ले रही है। आस्था के इस अनुष्ठान से सैकड़ों देश भारत के प्रति आस्थावान हो रहे हैं। अयोध्या और काशी के बाद प्रयागराज का भी कायाकल्प हो गया है।
देश को गौरवान्वित करने वाले इस भव्य और दिव्य आयोजन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उनके अफसरों को बड़ा श्रेय जाता है। मुख्य सचिव हो, प्रमुख सचिव सूचना, डीजीपी, निदेशक सूचना, मुख्यमंत्री के सलाहकार या अन्य हजारो कर्मचारी, हर किसी में आस्था के मनोभाव से अद्भुत शक्तियों और क्षमताओं का समावेश इस एतिहासिक अनुष्ठान को सफल बना रहा है।
डिजिटल महाकुंभ के पल-पल के मनमोहक आध्यात्मिक दृश्यों में एक ऐसी भी तस्वीर आज सोशल मीडिया में ट्रेंड कर रही है जिसमें उ.प्र. सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक सूचना शिशिर और मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार मृत्युंजय कुमार बाइक और स्कूटी पर घूम-घूम कर कुंभ की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने में लगे हैं। कई अफसर और कर्मचारी दिनों रात मेहनत में जुटे हैं। ड्यूटी के कर्तव्य के साथ आस्था ने जैसे इन्हें अतिरिक्त ईश्वरीय वरदान की शक्ति प्रदान कर दी हो।
सैकड़ों एकड़ में फैले इस आयोजन का मीडिया सेटर भी भव्य है। यहां ना सिर्फ उत्तर प्रदेश या देश की मीडिया बल्कि विश्व भर की मीडिया डेरा डाले है। इसकी व्यवस्था को बेहतर से बेहतर बनाने के लिए निदेशक सूचना शिशिर जी ने जी जान लगा दी है। बताया जाता है कि शिशिर जी को मांसपेशियों की समस्या के चलते ज्यादा पैदल चलने में पैर में दिक्कत होती है। इसके बावजूद वो मीडिया सेंटर की व्यवस्था और डिजिटल महाकुंभ को सफलता की श्रेष्ठता पर ले जाने के लिए दिनों रात दौड़-भाग कर रहे हैं। इस दौड़-भाग के लिए ही उन्होंने दो पहिए वाहन का भी सहारा लेना शुरू कर दिया है।




यही वीडियो आज वायरल हुआ और ट्रेंड करने लगा। जिसमें निदेशक सूचना शिशिर बाइक पर बैठकर महाकुंभ में मीडिया को हर संभव सहयोग और सुविधा देने के लिए मुस्तैद दिख रहे हैं। ये एक बानगी है। इसी तरह हर अफसर और कर्मचारी महाकुंभ में अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपनी ड्यूटी की आस्था में डुबकी लगा रहा है।
धर्म कर्तव्य पालन का आदेश देता है। ऐसे लोग अनमोल हैं जो अपनी ड्यूटी का कर्तव्य पालन कर्मठता और पूरी ईमानदारी से करते ही हैं साथ इनमें धार्मिक आस्था के प्रति समर्पण की शक्ति है। कर्त्तव्यपरायणता और धार्मिक आस्था का मिलन ऐसी महाशक्ति ईश्वरीय चमत्कार जैसी होती है। जो बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना करने में सफल होती हैं।
हजारों वर्षों पुरानी सनातनी परंपराओं का महाकुंभ हो या सैकड़ों वर्षो की प्रतिक्षा के बाद अयोध्या में श्री राम लला की प्राण प्रतिष्ठा का भव्य और दिव्य आयोजन हो, या कोरोना जैसी प्राकृतिक आपदा से लड़ने और बचने की चुनौतियां हों। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आध्यात्मिक शक्ति और उनके आलाधिकारियों की कर्तव्य निष्ठा व धार्मिक आस्था की शक्तियों ने हर चुनौती को आसान बना दिया है।
देखें ये वीडियो-
https://x.com/VarunKrRana/status/1878771647785914544?t=2DLjpwZcY7pLwuwhGQTdyg&s=08
https://x.com/lko_viveksharma/status/1878746172871045146?s=46
योगी सरकार की पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था, एडीजी, डीआईजी और एसएसपी ने संभाली कमान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरे मेला क्षेत्र में भ्रमण करते नजर आए आला अधिकारी

एडीजी भानु भास्कर ने पूरे मेला क्षेत्र का किया भ्रमण, संगम नोज में वॉच टॉवर पर चढ़ाकर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के प्रबंधों का किया मुआयना












महाकुम्भनगर, 13 जनवरी। महाकुम्भ के पहले दिन पौष पूर्णिमा स्नान पर्व पर सुरक्षा व्यवस्था के चाक चौबंद इंतजाम देखने को मिले। पूरे मेला क्षेत्र में डेप्लॉय किए गए 50 हजार से ज्यादा सुरक्षा कर्मी पूरी तरह मुस्तैद रहे तो वहीं एडीजी भानु भास्कर, डीआईजी महाकुम्भ वैभव कृष्ण और एसएसपी महाकुम्भ राजेश द्विवेदी ने ग्राउंड जीरो पर उतरकर सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाली।
महाकुम्भ की सुरक्षा को लेकर योगी सरकार ने व्यापक तैयारियां की हैं। पहले दिन इसकी झलक भी देखने को मिली, जब पूरे मेला क्षेत्र में पुलिसकर्मी मुस्तैदी से ड्यूटी करते नजर आए। वहीं आला अधिकारी भी हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए ग्राउंड पर दिखाई दिए। एडीजी वैभव कृष्ण ने पूरे मेला क्षेत्र का पैदल भ्रमण किया और जगह-जगह पर श्रद्धालुओं से बातचीत की कि कहीं उन्हें कोई समस्या तो नहीं आ रही। यही नहीं, उन्होंने संगम नोज पर वॉच टॉवर पर चढ़कर ऊंचाई से श्रद्धालुओं के लिए किए गए प्रबंधों और सुरक्षा व्यवस्था का मुआयना किया।
वहीं दूसरी तरफ, डीआईजी महाकुम्भ वैभव कृष्ण और एसएसपी महाकुम्भ राजेश द्विवेदी घोड़ों पर सवार होकर काफी देर तक सुरक्षा का मुआयना करते रहे।

यही नहीं, एसएसपी राजेश द्विवेदी तो सुरक्षा व्यवस्था को परखने के लिए संगम नोज पर गंगा में ही उतर गए।

सभी अधिकारियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए हर संभव प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में अधिकारियों ने खुद सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालकर महाकुम्भ के पहले दिन श्रद्धालुओं के अनुभव को यादगार बना दिया।
बटालियन लेकर निकले मेलाधिकारी
मेलाधिकारी विजय किरण आनंद भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आए। वो खुद एक बटालियन को लीड करते हुए संगम नोज पहुंचे और वहां तमाम व्यवस्थाओं का जायजा लिया। यही नहीं, उन्होंने सभी सेक्टर मजिस्ट्रेट को अपने-अपने सेक्टर में बने घाटों पर सभी तरह की व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने पूरी मेला टीम को लगातार 45 दिन तक पूरी मुस्तैदी से कार्य करने के लिए इंस्पायर किया और सुनिश्चित करने को कहा कि किसी भी श्रद्धालु को कहीं भी कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए।






