
अनूप नारायण सिंह-
जनता बाजार से उठी पुकार: सिवान के आर्केस्ट्रा ग्रुपों में लड़कियों की खरीद-बिक्री का काला सच
बिहार के सिवान जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने समाज की आत्मा को झकझोर दिया है। चमकती रोशनी, तेज संगीत और मंच पर थिरकते कदमों के पीछे छिपी है दर्द, शोषण और सौदेबाजी की वह दुनिया, जिसे देखने की हिम्मत बहुत कम लोग जुटा पाते हैं।
हाल ही में दैनिक भास्कर डिजिटल टीम की महिला रिपोर्टर महिमा सिंह ने अपनी पहचान छुपाकर पांच दिनों तक आर्केस्ट्रा ग्रुपों के बीच रहकर एक साहसिक स्टिंग ऑपरेशन किया। इस दौरान जो सच सामने आया, वह किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं, बल्कि समाज की भयावह हकीकत है। बताया जा रहा है कि इस दौरान महिमा सिंह को तीन बार “खरीदा और बेचा” गया, ताकि उस नेटवर्क की परतें खोली जा सकें, जो वर्षों से मासूम लड़कियों की जिंदगी निगल रहा है।
यह सिर्फ एक स्टोरी नहीं, बल्कि उन अनगिनत बेटियों की आवाज है, जिन्हें गरीबी, धोखे और मजबूरी के नाम पर दलदल में धकेल दिया जाता है। सिवान, छपरा, गोपालगंज और आसपास के कई जिलों में फैले इस नेटवर्क की जड़ें काफी गहरी बताई जाती हैं। सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश से लड़कियों को बहला-फुसलाकर लाया जाता है, फिर उन्हें आर्केस्ट्रा ग्रुपों के नाम पर बेच दिया जाता है। एक बार इस चक्रव्यूह में फंसने के बाद निकलना लगभग असंभव हो जाता है।
यह लड़ाई आज की नहीं है। इस विषय पर जागरूकता की मुहिम वर्षों पहले शुरू हो चुकी थी। करीब दस साल पहले से इस अमानवीय कारोबार पर राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में आलेख प्रकाशित हुए, सोशल मीडिया को हथियार बनाया गया, वीडियो बनाए गए, और समाज को सच दिखाने की कोशिश होती रही।
अब जब मुख्यधारा मीडिया फिर से इस मुद्दे को उठा रहा है, उम्मीद जगी है कि शायद व्यवस्था जागेगी, कानून हरकत में आएगा और इस अंधेरे कारोबार पर चोट होगी।
इसी दर्दनाक यथार्थ पर आधारित एक पुस्तक “जनता बाजार” भी जल्द आने वाली है, जिसमें उस दुनिया की परत-दर-परत सच्चाई सामने लाई जाएगी। यह सिर्फ किताब नहीं होगी, बल्कि उन चीखों का दस्तावेज होगी जिन्हें अब तक संगीत की आवाज में दबा दिया गया।
समाज को तय करना है—क्या मंच की चमक देखते रहना है, या पर्दे के पीछे का अंधेरा मिटाना है।



