नई दिल्ली। ऑनलाइन फैंटेसी गेम और क्रिकेट सट्टेबाजी की दुनिया में हाल के वर्षों में कई एप्लिकेशन सामने आई हैं, जो आम जनता को “प्रेडिक्शन” के नाम पर मोटी कमाई का लालच देती हैं। इन्हीं में से एक चर्चित एप्लिकेशन है “SportsBaazi”, जिसके प्रमोशन में एक नामचीन क्रिकेटर को भी जोड़ा गया है। लेकिन अब इस एप के खिलाफ बड़ी संख्या में धोखाधड़ी की शिकायतें सामने आ रही हैं।
पीड़ितों का आरोप है कि SportsBaazi एप पहले तो यूजर्स से आसानी से पैसे जमा करवा लेता है, लेकिन जैसे ही कोई ग्राहक पैसा निकालने (Withdrawal) या रिफंड की कोशिश करता है, तो उन्हें फर्जी UTR नंबर और ट्रांजैक्शन आईडी भेजकर गुमराह किया जाता है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि एप पर कोई वैध कस्टमर केयर नंबर मौजूद नहीं है। यूजर सिर्फ एक ईमेल आईडी पर संपर्क कर सकते हैं, जहाँ से एक या दो मेल के बाद जवाब आना बंद हो जाता है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब उन्होंने कई बार मेल किया, तो उन्हें “गलती से गलत मेल चला गया” कहकर 1 हफ्ते इंतजार करने को कहा गया। इसके बाद यूजर्स को ब्लॉक कर दिया गया, जिससे वे एप में लॉगिन तक नहीं कर सके।
एक पीड़ित ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “मेरे ₹3500 एप में थे, जब निकासी की कोशिश की तो फर्जी ट्रांजैक्शन डीटेल भेज दी गई। ईमेल पर घुमा-फिराकर जवाब दिया गया और फिर मेरा अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया। यह खुला फ्रॉड है।”
अब सवाल उठता है कि इस एप के प्रमोशन में लगे सेलिब्रिटीज और क्रिकेटर की जिम्मेदारी क्या है? क्या वह सिर्फ पैसे लेकर प्रमोशन करेंगे, भले ही एप के जरिए जनता से धोखा हो?
क्या कहती है साइबर कानून की धाराएं?
भारत में आईटी एक्ट 2000 और भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत ऐसा कृत्य अपराध की श्रेणी में आता है। यदि कोई एप जानबूझकर गलत ट्रांजैक्शन डिटेल देकर लोगों से पैसा वसूल रहा है, और रिफंड नहीं कर रहा है, तो यह कंपनी और ब्रांड प्रमोटर दोनों की जवाबदेही तय करता है।
जरूरत है कार्रवाई की
देश में बढ़ते ऑनलाइन फैंटेसी लीग स्कैम को देखते हुए समय आ गया है कि सरकार, साइबर सेल और उपभोक्ता फोरम ऐसे एप्लिकेशन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। साथ ही आम नागरिकों को भी सावधान रहने की जरूरत है कि बिना पूरी जांच के किसी भी ऐसे प्लेटफॉर्म पर पैसे न लगाएं।








