
पुष्प रंजन-
मैं अपने कलीग से भी कहता हूँ, गाजर -मूली की तरह उपलब्ध हैं बाहर. इतनी ही खुजली है, बाहर जाइये, खर्च कीजिये और मज़े ले लीजिये. मगर, वर्क प्लेस को बक्श दो. पूरे ऑफिस का संतुलन बिगड़ जाता है. आप जिनके साथ चक्कर चलाते हो, पट गई तो पूरे ऑफिस और आपके रुसूख़ का दुरुपयोग करेगी, आपके सहकर्मी भी परेशान रहेंगे. अगर, टाँका फिट नहीं हुआ, तो आप गए काम से. करियर तक तबाह हो जाता है.
ऐसा ही एकबार फिर जेएनयू में हुआ. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन ने जापानी दूतावास के एक अधिकारी से जुड़े यौन छेड़छाड़ के आरोपों की जांच की, और स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के प्रोफेसर स्वर्ण सिंह को बर्खास्त करने का फैसला किया। दूतावास के अधिकारी ने सबूत के तौर पर उनकी बातचीत की रिकॉर्डिंग प्रस्तुत की थी. कुछ लोगों ने बताया, नप जाने के बावजूद, कल प्रोफेसर सिंह क्लास ले रहे थे.
शिकायत पिछले साल मई में की गई थी. यह इतने महीने क्यों लटकाये रखा गया? अपने आप में जांच का विषय है. प्रोफेसर स्वर्ण सिंह को पहले भी एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान छेड़छाड़ के आरोपों का सामना करना पड़ा था। उन्होंने तब पद से इस्तीफा दे दिया था. वह बाद में एक प्रोफेसर के रूप में जेएनयू वापस आ गए।
सूत्रों ने बताया कि विश्वविद्यालय को पिछले कुछ वर्षों में सिंह के खिलाफ कथित यौन उत्पीड़न की करीब आठ शिकायतें मिली थीं। यदि यह बात सही है, तो कह सकते हैं, कि यह शख्स आदतन अपराधी Habitual offender रहा है.
प्रोफेसर सिंह अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जाने-माने स्कॉलर, भारत की रक्षा और परमाणु नीति, हथियार नियंत्रण और निरस्त्रीकरण के ऑथरिटी रहे हैं.
उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए और जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में एमफिल, पीएच-डी की है। उन्होंने स्वीडन के उप्साला से संघर्ष समाधान में पोस्ट-डॉक्टरल डिप्लोमा भी किया है। लेकिन अफ़सोस, अपनी न छूटने वाली आदतों की वजह से आज सब धो-पोंछ दिया.
“सिर्फ़ एक क़दम उठा था ग़लत राह-ए-शौक़ में, मंज़िल तमाम उम्र मुझे ढूँढती रही.”




Ashu
April 19, 2025 at 12:52 pm
ये प्रोफेसर ना सिर्फ ऐसे मामलों में बल्कि मणिपुर के एक विवादित यूनिवर्सिटी के चांसलर दीपेश मिश्रा का भी करीबी है