संजय कुमार सिंह
अमेरिकी टैरिफ से निर्यात प्रभावित होगा। इसका ‘मुकाबला’ स्वदेशी के प्रचार से करने वालों का समूह आज बता रहा है कि सरकार निर्यातकों के साथ मजबूती से खड़ी है और उनके हितों की हिफाजत करेगी। यह आज अमर उजाला की लीड का शीर्षक है। आरएसएस का 100 वर्ष पूरा होने पर समारोह चल रहा है। उसकी खबरें वैसी ही होनी है जैसी होती रही है इसलिए अभी हिन्दू-मुसलमान की खबरों को रहने देता हूं। वरना संघ प्रमुख ने कहा है और नवोदय टाइम्स में शीर्षक है, न हम सरकार में दखल देते हैं, न अध्यक्ष बनाते हैं। इसपर मेरा मानना है कि फिर भी लाल किले से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आरएसएस की सराहना की, संगठन को दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ बताया, बिना पंजीकरण चलने दिया, उसके पीछे ईडी-सीबीआई नहीं लगाई ….. इसलिये संघ परिवार और उनके लोग भाजपा और सरकार का समर्थन करते हैं। यह अलग बात है कि इन समर्थकों में ज्यादातर की आंखें कई साल से बंद हैं। मैं जानता हूं कि वे दृष्टिहीन नहीं हैं खास चीजें ही देखते हैं। इसलिए आज मैं सिर्फ प्रचार वाली खबरों की बात करूंगा प्रचार सामग्री की नहीं। वैसे भी खबरें कम नहीं हैं। आप जानते हैं कि कई बार कहने, समय पूर्व चेतावनी देने के बाद सरकार तब सक्रिय हुई लगती है जब टैरिफ लागू हो गया। सवाल है कि मोदी सरकार 40 देशों से व्यापार “अब” क्यों बढ़ाएगी? पहले बढ़ाने की जरूरत नहीं थी या बढ़ जाता तो पचा नहीं पाते (पता नहीं कौन – देश सरकार या कोई और)। अगर व्यापार बढ़ाने के लिए तब काम नहीं किया तो अब बताना चाहिये कि 11 साल में जो विदेश यात्राएं की उससे देश या देशवासियों को क्या फायदा हुआ?
दूसरी ओर राहुल गांधी ने कहा है – अभी वोट काटे जा रहे हैं फिर राशन कार्ड खत्म होगा। खबर है कि वोटर अधिकार यात्रा गुरुवार को सीतामढ़ी पहुंच गई। आप जानते हैं कि भाजपा सरकार ने रेल यात्रा में वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली छूट खत्म कर दी है। रेल टिकटों पर जीएसटी लगाया है और तमाम ऐसे काम किये या नहीं किये हैं जिससे रेल यात्रा न सिर्फ महंगी हुई, मुश्किल भी हुई है। इसके बावजूद राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि भाजपा के लोग अमीरों के अधिकार छीनना चाहते हैं तो यह खबर सिर्फ नवोदय टाइम्स में पहले पन्ने पर है। अमर उजाला में पहले पन्ने की खबर का शीर्षक है, राहुल और तेजस्वी की यात्रा में पीएम को अपशब्द, शाह बोले – माफ नहीं करेगा देश। गृहमंत्री ने कहा – गांधी परिवार ने मोदी के लिए नफरत फैलाने में कसर नहीं छोड़ी। संभव है, अमित शाह सही हों। मुद्दा यह है कि जो हुआ वह कानूनन गलत है तो कार्रवाई होनी चाहिये। भाजपा के लोग या राहुल गांधी के विरोधी उनके खिलाफ मुकदमा करने, सजा दिलाने की कोशिश के मामले में कभी कमजोर या उदार तो नहीं दिखे। अभी भी कानून को अपना काम करना चाहिये। नरेन्द्र मोदी से सहानुभूति क्यों? भारत का प्रधानमंत्री इतना कमजोर तो नहीं ही हो सकता है कि राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर (या करवा) सके। ऐसा नहीं है कि पहले से माफी मिलती रही है इसलिए राहुल गांधी सीमा पर कर रहे हैं। अगर इसी कारण हद से आगे बढ़ गये हैं तो कार्रवाई होनी चाहिये, सहानुभूति लेने-दिलाने की कोशिश किस लिये? वह भी तब जब आज ही खबर है कि पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी गई है। खबर के अनुसार, शिकायत पटना के कोतवाली थाने में दर्ज करवाई गई है। खबर में ही लिखा है कि राज्य भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने शिकायत दर्ज करवाई है।
पकंज चतुर्वेदी ने लिखा है, एक तो वह मंच राहुल गांधी का नहीं था, दूसरे मंच पर राहुल गांधी या अन्य कोई नेता नहीं था। फिर भी गाली देने वाले पर क़ानूनी कार्यवाही होती रहे…. यह सब कुछ वोटर अधिकार यात्रा की असीम सफलता के परिणामो को पटरी से उतारने की साजिश हैं। बिहार में पाकिस्तान के आतंकी घुस गये, इंडिया टुडे ने लोकसभ चुनाव और प्रधानमन्त्री के सर्वे कर दिए, और भी बहुत से तीर हैं जन-आन्दोलन को मोथरा करने के लिए। ….. हो सकता है गाली देने वाला भी स्लीपर सेल हो। जो भी हो, उसकी सलाह और उलाहना राहुल गांधी को न दें। जो आदमी इतना घटिया है कि राम वीर सिंह विधूड़ी या प्रज्ञा से गाली दिलवा कर उन्हें गले लगाये रखता हो — उसके लिए क्या संवेदना। कुल मिलाकर, किसी ने गाली दी। उसके लिए राहुल गांधी को घेरा जा रहा है। लोग समझ रहे हैं। आप जानते हैं कि इससे पहले सीएसडीएस के संजय कुमार के गलत ट्वीट, उसके लिये माफी मांगने को मुद्दा बनाया गया और यह प्रचारित किया गया कि वोट चोरी से संबंधित राहुल गांधी के आंकड़े संजय कुमार या सीएसडीएस के ही थे। इसलिये अब राहुल गांधी के आरोप या रिसर्च का कोई मतलब नहीं है और राहुल गांधी को भी माफी मांगनी चाहिये। यह तथ्य नहीं है इसलिए राहुल गांधी ने माफी नहीं मांगी पर तिल का ताड़ बनाने के लिए संजय कुमार के खिलाफ एफआईआर करवाई गई। इस तथ्य के बावजूद कि सीएसडीएस सरकारी संस्था है और संजय कुमार एक सीमा में ही स्वतंत्र रूप से काम कर सकते हैं। सीएसडीएस की पितृ संस्था ने उन्हें नोटिस भी जारी किया। सब खबरें छपीं। राहुल गांधी और उनके आरोप की धार कम करने के हर संभव उपाय हुए और फिर एक दिन खबर छप गई कि सुप्रीम कोर्ट ने संजय कुमार के खिलाफ एफआईआर को स्टे कर दिया या खारिज कर दिया।
कहने की जरूरत नहीं है कि पुलिस में शिकायत भी डराने के लिए की जाती है। अगर अजीत अंजुम डर जाते तो एसआईआर से संबंधित खुलासे होते? अभी भी खुलासों को गलत साबित करने का अभियान चल रहा है। पर गलत खुलासे के लिए कोई शिकायत नहीं है। अनुराग ठाकुर से शपथ पत्र नहीं मांगा गया तो अब किससे कैसे मांगे, कार्रवाई भी नहीं तो आप शपथपत्र का सच समझ सकते हैं और यह तथ्य सबको मालूम है कि समाजवादी पार्टी के 18,000 शपथपत्रों पर कार्रवाई नहीं हुई है। प्रधानमंत्री की शिक्षा से संबंधित शपथपत्र की पुष्टि नहीं हुई है। गाली देने का अपराध अगर दरभंगा में हुआ है तो पटना में एफआईआर क्यों? क्या पन्ना प्रमुख रखने वाली पार्टी का दरभंगा में प्रतिनिधित्व नहीं है? पहले पन्ने पर खबर छापने से पहले इस बारे में पूछा-सोचा नहीं जाना चाहिये था? दूसरी ओर, दूसरे दलों के बीएलए से चुनाव आयोग, एसआईआर या मतदाता सूची के काम कराने की अपेक्षा देखी गई है। जहां तक मोदी के लिए नफरत फैलाने की बात है मोदी, उनकी पार्टी और समर्थकों ने कांग्रेस के खिलाफ माहौल बनाने में कब कसर छोड़ी और चुनाव के समय आम तौर पर प्रधानमंत्री जैसी बातें नहीं करते रहे हैं वो सब नरेन्द्र मोदी ने की है। चुनाव आयोग ने कार्रवाई नहीं की सो अलग। वरना कहने के लिए तो उन्होंने यह भी कह दिया था कि आग लगाने वालों को कपड़ों से पहचानते हैं। कांग्रेस या विपक्ष के तथाकथित वोट बैंक के खिलाफ घुसपैठियों का हौव्वा कौन नहीं झेल रहा है। पहले ये सत्तारूढ़ पार्टी को वोट करते थे अब सत्तारूढ़ पार्टी नहीं बता रही है कि वे कैसे घुस आये या जमे हुए हैं। 1956 से भारत में अवैध रूप से रह रही दो पाकिस्तानी महिलाओं के मामले का खुलासा अब हुआ है।
जहां तक सरकार के काम और उसके प्रचार का मामला है, नवोदय टाइम्स की आज की लीड का शीर्षक है, निर्यातकों को राहत की तैयारी। उपशीर्षक है, निर्यात संवर्धन मिशन की शुरुआत समेत कई उपायों पर काम। आप जानते हैं कि अमेरिकी टैरिफ का यह मामला रूस से तेल खरीदने के कारण है और अमेरिका को इससे मतलब नहीं होना चाहिये पर तथ्य यह है कि रूस से तेल खरीदने का लाभ आम आदमी या निर्यातकों को नहीं मिला है जबकि उसका नुकसान सबको होगा, हो रहा है और सरकार ने पूर्व सूचना होने पर भी समय रहते क्या किया उसकी कोई जानकारी नहीं है। जहां तक टैरिफ की बात है, ट्रम्प ने दूसरी बार शपथ लेने के बाद (यानी 20 जनवरी 2025 को) भारत पर टैरिफ की धमकी दी थी। 30 जुलाई 2025 को, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की कि 1 अगस्त 2025 से भारत पर 25% “जवाबी टैरिफ” लागू किया जाएगा, साथ ही भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद के लिए अतिरिक्त “जुर्माना” भी लगेगा। बाद में इस घोषणा को आधिकारिक रूप देने के लिए 1 अगस्त 2025 को व्हाइट हाउस ने एक एक्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर किए। इसमें यह उल्लेख था कि भारत और अन्य देशों पर 25% जवाबी टैरिफ लागू किया जाएगा—ये ड्यूटीज़ सात दिनों बाद, यानी 7 अगस्त 2025 से प्रभावी होने थे। इधर आप देख रहे हैं कि अभी योजनाएं ही बन रही हैं और आश्वासन दिये जा रहे हैं। कोई नहीं पूछ रहा है कि इतनी देर क्यों हुई या यह नहीं बता रहा है कि टैरिफ की धमकी के मद्देनजर कब क्या किया जाना चाहिये था। अब जब टैरिफ के प्रभाव से राहत के उपाय दिखाये, बताये और प्रचारित किये जा रहे हैं तो यह भी देख लेना चाहिये धमकी मिलने के बाद भारत ने क्या किया।
- धमकी ट्रम्प ने सत्ता में आने के तुरंत बाद दी थी लेकिन भारत की पहली प्रतिक्रिया 4 अगस्त 2025 की मिलती या याद आती है।
- विदेश मंत्रालय इसे “अनुचित और अकारण” कहा था। इसके अलावा, विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस स्थिति ने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को चुनौती दी है और इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत किसानों, मछुआरों और डेयरी किसानों के हितों से समझौता नहीं करेगा, “भारी कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन मैं तैयार हूँ” इस कर्ज़ का भुगतान करने के लिए।
- कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस कदम को “शुद्ध और सरल ब्लैकमेल” कहा था और यह भी कि भारत को धमकी से नहीं झुकना चाहिए।
- इंडिया टुडे ने कहा था कि भारत की प्रतिक्रिया “नपी हुई लेकिन दृढ़” थी। एफआईईओ ने इसे “गंभीर नुकसान” कहा था और अनुमान लगाया कि यह 30–35% प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान पहुंचाएगा।
- सरकार अब फैसले पर प्रभाव का मूल्यांकन कर रही है और “सभी आवश्यक कदम” उठाएगी। इसमें एमएसएमई, किसानों, और निर्यातक क्षेत्रों को बचाने की तैयारी शामिल है। निर्यात को बढ़ावा देने का मिशन (अब) शुरू किया गया है।
- छोटे व्यापार (एसएमई) विक्रेताओं ने यूरोप, अफ्रीका और एशिया जैसे वैकल्पिक बाजारों की खोज तेज कर दी है। कई व्यवसाय रूटिंग परिवर्तन, मध्यस्थ देश के माध्यम से शिपमेंट आदि के उपाय कर रहे हैं।
कुल मिलाकर सरकार ने जो किया है वह नहीं के बराबर है। अब क्या कर रही है या क्या करेगी उसके प्रचार में कोई कमी नहीं है। पीएम मोदी की चीन यात्रा और जापान से रक्षा एवं तकनीकी सहयोग मजबूत करना। आज दि एशियन एज की खबर है, अमेरिका स्टूडेंट यानी छात्र वीजा को चार साल के लिए सीमित करेगा और पत्रकारों के लिए 240 दिन। यहां भारत ने जो कार्रवाई की थी उसे याद कीजिये और मान लीजिये कि यह सब सामान्य बात है। द टेलीग्राफ ने लिखा है, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के व्यापार सलाहकार ने बुधवार को यूक्रेन के साथ रूस के युद्ध को मोदी की लड़ाई कहा है। इस तरह प्रधानमंत्री को एक ऐसे टकराव के लिए दोषी ठहराया है। भारत हमेशा इसका विरोध किया है फिर भी अमेरिका भारत पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है ताकि वह रूसी तेल खरीदना बंद कर दे। भारत यह सब दबाव क्यों झेल रहा है, देसी मीडिया इसके बारे में नहीं बता रहे हैं और सब कुछ सामान्य होने जैसा माहौल बनाने में लगा है। इसमें अमेरिका की बदमाशी या मनमानी को नहीं स्वीकारना शामिल है और राहुल गांधी की चुनौती के बावजूद प्रधानमंत्री ने नहीं कहा कि ट्रम्प झूठ बोल रहे हैं। उधर ट्रम्प ने नया आरोप लगाया है कि युद्ध विराम 24 घंटे में होना था पांच घंटे में ही हो गया।
टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने निर्यातकों से कहा, आजीविका की रक्षा कीजिये, सरकार आपके साथ है। इंट्रो है, वाणिज्य मंत्रालय के अफसरों ने कहा है, पैकेज आने वाला है। मेरा मानना है कि पैकेज आना होता तो आ चुका होता, अब क्या आयेगा और कब आयेगा। जहां तक आजीविका की रक्षा की बात है, सरकार ने इसकी चिन्ता नोटबंदी से लेकर कोविड तक कब की पर निर्यातकों को करना है तो वे करें और कहने की जरूरत नहीं है कि, होइहें वही जो राम रचि राखा”। द हिन्दू ने अमेरिकी अधिकारी की बात को लीड बनाया है। अमरिकी अधिकारी ने अगर ऐसा कहा है तो यह निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है। लेकिन इससे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देशवासियों की नजरों में कमजोर लगेंगे और सरकार समर्थक कहने लगेंगे (द हिन्दू के मामले में एक बार कहा जा चुका है) कि यह विदेशी (पाकिस्तान का) अखबार लग रहा है। लेकिन यह की एक महत्वपूर्ण खबर है। इससे पाठकों को यह भी पता चलेगा कि देसी मामलों में हेडलाइन मैनेजमेंट करने में उस्ताद मोदी की टीम विदेशी मामलों में चूक रही है। फिर भी मोदी को महान बनाने के प्रयासों के बीच आज मोहन भागवत का यह बयान कई अखबारों में प्रमुखता से है कि उन्होंने कभी नहीं कहा कि मुझे या किसी और को 75 साल में रिटायर हो जाना चाहिये। इससे निश्चित होकर प्रधानमंत्री जापान-चीन के यात्रा पर निकल गये। अमर उजाला ने इसका शीर्षक लगाया है, टैरिफ विवाद के बीच जापान-चीन यात्रा पर पीएम मोदी। हिन्दुस्तान टाइम्स ने इस खबर को और आशावादी तरीके से वोट बटोरू बनाकर छापा है।
आज अखबार की लीड का शीर्षक है, प्रधानमंत्री के जापान दौरे के दौरान बुलेट ट्रेन का सौदा संभव। इंडियन एक्सप्रेस की लीड का शीर्षक है – प्रधानमंत्री ने कहा, शी, पुतिन से मिलने के इंतजार में, साझी चुनौतियों को रेखांकित किया। यह संयोग ही होगा कि जून 2020 में गलवान घाटी में चीनी सेना के साथ हुई हिंसक झड़प भारतीय सेना की 16 बिहार रेजीमेंट के जवानों से हुई थी। 15-16 जून 2020 की रात हुई इस झड़प में इस घटना में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हुए थे। इनमें 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू भी शामिल थे। दूसरी ओर, ना कोई घुसा है ना कोई घुसा हुआ है की मशहूर घोषणा कभी न भूलने वाली है। अब ट्रम्प टैरिफ से जूझ रहे लोगों को सपने दिखाना, आशावादी होना अपराध तो हो नहीं सकता है। भ्रष्टाचार दूर करने वाली सरकार से संपादकों को रिश्वत की भी उम्मीद नहीं है और यह सब तो पहले होता था। अब पद्म पुरस्कार पाने वाले पत्रकार सरकार की सेवा का जिम्मा खुद उठा लें तो कोई क्या कर सकता है। फिर भी, ऑपरेशन सिन्दूर के बाद सरकार को एक और मुद्दा मिल गया है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। चैट जीपीटी का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


